राम जन्मभूमि

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की तैयारियां तेज, कानपुर से आई कासा ग्रांडे मशीन

05/09/2020

अयोध्या, 05 सितम्बर (हि.स.)। श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण के नक्शा पास होने के बाद निर्माण की तैयारियां तेज हो गई हैं। शनिवार को मंदिर निर्माण के लिए अब बड़ी मशीनों का आना शुरू हो गया है। 

  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास मंदिर का स्वीकृत नक्शा मिलने से अब राम मंदिर निर्माण के कार्य में तेजी आ गई है। राम मंदिर निर्माण के लिए नींव की खुदाई में प्रयोग होने वाली बड़ी मशीन आई है। कासा ग्रांडे मशीन कानपुर से आई है और इस मशीन के माध्यम से राम मंदिर की नींव की खुदाई होगी। राम मंदिर निर्माण क्षेत्र में 1200 स्थानों पर पिलर के लिए खुदाई होगी।

 राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के अनुसार लगभग 200 फीट गहरी नींव की खुदाई कराई जाएगी। जिसमें कंक्रीट से चट्टानों का निर्माण कराया जाएगा। जिस पर राम मंदिर का निर्माण होगा। ऐसे में बड़ी-बड़ी मशीनों के माध्यम से राम मंदिर के लिए नींव की खुदाई का कार्य किया जाएगा। अब बड़ी-बड़ी मशीनें आनी शुरू हो गई हैं। इन मशीनों को राम जन्म भूमि परिसर के गेट नंबर 3 से अंदर भेजा जा रहा है। जिसके माध्यम से नींव की खुदाई की जाएगी। नींव की खुदाई से पहले रामजन्म भूमि स्थल पर बने जर्जर मंदिरों को हटाने का काम भी शुरू हो चुका है। जर्जर मंदिरों को हटाने के बाद ही इन बड़ी मशीनों के माध्यम से नींव की खुदाई का काम शुरू होगा।

  खास बात यह है कि राम मंदिर के नक्शे के स्वीकृत होने के बाद से अब राम मंदिर निर्माण के कार्य में तेजी आ गई है। राम मंदिर निर्माण के लिए एलएंडटी के कुशल वैज्ञानिक इंजीनियर काम में लग गए हैं और परिसर के अंदर इन इंजीनियरों की रहने की व्यवस्था भी कराई जा रही है। यही नहीं राममंदिर के नींव के लिए किन गिट्टी और सीमेंटो का इस्तेमाल किया जाए उसके लिए आईआईटी चेन्नई रिसर्च कर रही है। लगभग 5 एकड़ भूमि में खुदाई का काम होना है जिसके समतलीकरण का काम पहले ही हो चुका है अब नींव की खुदाई के लिए मशीनों से काम किया जाना शुरू होना है। 

- पितृ पक्ष के बाद श्री राममंदिर के आधार का निर्माण शुरू होगा 

 17 सितम्बर को पितृ पक्ष खत्म होने के बाद शुरू होगा। राम जन्मभूमि में विराजमान राम लला के मंदिर निर्माण की नींव डालने के लिये नक्शे में दर्शाये गये 13 हजार वर्ग मीटर के सौ फिट नीचे तक बारह सौ जगहों पर कुयें की तरह पाइलिंग कर चट्टान की तरह आधारशिला तैयार की जायेगी। फिर उस पर नक्शे के अनुसार आधारशिला खड़ी होगी और मंदिर के धरातल का निर्माण किया जायेगा। निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो ने खुदाई के लिये विशेष प्रकार की मशीनों को पहले ही मंगा लिया है। मंदिर को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

हिन्दुस्थान समाचार/पवन पाण्डेय/राजेश


 
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