मधुप

कोलकाता, 07 अप्रैल (हि.स.)। दक्षिण कोलकाता की हाई प्रोफाइल जादवपुर विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। यहां से निवर्तमान माकपा विधायक सुजन चक्रवर्ती को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों से कड़ी टक्कर मिल रही है। तृणमूल ने देवब्रत मजूमदार को और भाजपा ने नए चेहरे रिंकू नस्कर को टिकट दिया है। रिंकू नस्कर स्थानीय पार्षद रह चुकी हैं। इसका चुनाव प्रचार में उन्हें लाभ भी मिल रहा है। तृणमूल के देवब्रत मजूमदार भी पार्षद और मेयर परिषद के सदस्य रहे हैं। 

कोलकाता के वार्ड नंबर 102 की पार्षद रिंकू नस्कर चुनाव से ठीक पहले माकपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं। दरअसल कांग्रेस के साथ चुनावी समझौते को लेकर माकपा के कई नेता असंतुष्ट हो गए थे। नस्कर उन्हीं में से एक हैं। 

माकपा छोड़कर भाजपा में शामिल होने के सवाल पर रिंकू नस्कर ने बुधवार को "हिन्दुस्थान समाचार" को बताया कि माकपा पथभ्रष्ट और आदर्शों से विमुख होने पर अब अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, इसीलिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी। नस्कर का बचपन दक्षिण 24 परगना के गौरदह स्टेशन के पास नारायणपुर में गुजरा है। उन्होंने स्थानीय अक्षय विद्या मंदिर से माध्यमिक तथा कैनिंग के एक स्कूल से उच्च माध्यमिक की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके बाद प्रेसिडेंसी से बांग्ला में स्नातक किया और फिर रविंद्र भारती विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तथा जादवपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की।  

हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मेरे परिवार का कोई भी कभी राजनीति से जुड़ा नहीं रहा। मैं 2008 में डीवाईएफआई से जुड़ीं। 2010 में कोलकाता नगर निगम चुनाव में माकपा ने मुझे उम्मीदवार बनाया और मैं जीतकर काउंसिलर बनी। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में रिंकू ने दक्षिण 24 परगना कीषमथुरापुर सीट से माकपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गई थीं। इलाके में रिंकू की पहचान एक जुझारू नेता के रूप में है।वर्ष 2015 में भी नगर निगम चुनाव में उन्होंने तृणमूल के खिलाफ लड़ते हुए जादवपुर इलाके के 102 नंबर वार्ड से जीत हासिल की थी। 

वर्ष1967 में जादवपुर विधानसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद से यहां पर माकपा का स्ट्राइकिंग रेट काफी अच्छा रहा है। वर्ष 1987, 91, 96, 2001 और 2006 के चुनावों में यहां से पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य जीत हासिल करते रहे। हालांकि 2011 के विधानसभा चुनाव में  मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए बुद्धदेव यहां से चुनाव हार गए थे। उस चुनाव में उन्हें उनके अधीन काम कर चुके प्रशासनिक अधिकारी और तृणमूल उम्मीदवार मनीष गुप्त के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी थी। मनीष गुप्त को 53.1 30 प्रतिशत वोट मिले, जबकि बुद्धदेव भट्टाचार्य को 44.63 फीसदी वोट मिले थे। 2016 में माकपा ने इस खोई हुई सीट को दोबारा हासिल कर पार्टी के वरिष्ठ नेता सूजन चक्रवर्ती ने मनीष गुप्त को परास्त कर दिया था। इस चुनाव में भाजपा के मोहित राय को महज 6.82  प्रतिशत  वोट ही मिल सके थे। 

वार्ता के दौरान भाजपा उम्मीदवार रिंकू नस्कर ने बताया कि उन्हें प्रचार के दौरान जगह-जगह बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस सेे शिकायत करने पर भी कोई लाभ नहीं होता। उन्होंने कहा कि तृणमूल के पैरों के नीचे से जमीन खिसक चुकी है, जिसके कारण टीएमसी अपना अस्तित्व बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार है।
उल्लेखनीय है कि कोलकाता की इस  हाई प्रोफाइल सीट पर चौथे चरण में 10 अप्रैल को मतदान होना है। हिन्दुस्थान समाचार
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