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सबसे युवा प्रधानमंत्री

02/01/2020

सबसे युवा प्रधानमंत्री


फिनलैंड की सोशल डेमोक्रेट पार्टी ने 8 दिसंबर को प्रधानमंत्री पद के लिए 34 वर्षीय पूर्व परिवहन मंत्री सना मरीन को चुना। इसी चुनवा के साथ मरीन देश के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गई हैं। उनके बाद यूक्रेन के प्रधानमंत्री ओलेक्सी होन्चारुक हैं। जिनकी उम्र अभी 35 वर्ष है। मरीन ने 8 दिसंबर को हुए मतदान में जीत हासिल कर निवर्तमान नेता एंटी रिने का स्थान लिया। एंटी रिने ने डाक हड़ताल से निपटने को लेकर गठबंधन सहयोगी सेंटर पार्टी का विश्वास खोने के बाद 3 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद मरीन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह और मेहनत के साथ जनता के लिए काम करेंगी । मरीन ने कहा कि , ‘हमें फिर से विश्वास बहाल करने के लिए काफी काम करना होगा।’ अपने अनुभव और महिला होने के सवाल का जवाब देते हुए मरीन ने कहा कि ‘मैंने कभी अपनी उम्र या महिला होने के बारे में नहीं सोचा। मैं कुछ वजहों से राजनीति में आई और इन चीजों के लिए हमने मतदाताओं का विश्वास जीता।’ सना मरीन का जन्म 16 नवंबर 1985 को फिनलैंड में हुआ था। उन्होंने 2012 में प्रशासनिक विज्ञान में टैम्पियर विश्वविद्यालय से स्नातक किया। 2012 में उन्हें टैम्पियर की नगर परिषद के लिए चुना गया। वह वह 2013 से 2017 तक सिटी काउंसिल की चेयरपर्सन भी रहीं। वह 2015 में पहली बार संसद सदस्य बनीं।

जून 2019 में वह सरकार में शामिल हुईं और उन्हें परिवहन और संचार मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। वह सरकार में पहली बार 2019 में शामिल हुईं। इस बार उनके साथ मंत्रिमंडल में गठबंधन दल की चार सहयोगी हैं। इनमें स्वीडिश पीपुल्स पार्टी की प्रमुख 55 साल की अन्ना हेनरिक्सन शामिल हैं। उन्हें कानून मंत्रालय दिया गया है। कात्री कुलमुनी को वित्त, मारिया ओहिसालो को गृह और ली एंडरसन को शिक्षा का प्रभार दिया गया है। पढ़ाई के दौरान सना की मुलाकात ली एंडरसन, मारिया और कात्री से हुई। ये तीनों सना की हमउम्र थीं। इन चारों ने पढ़ाई के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़कर कई आंदोलनों में भाग लिया। सभी ने राजनीति में अपनी अलग पहचान बना ली। सना ने सोशल डेमोक्रेट, ली एंडरसन ने लेμट अलायंस, मारिया ने ग्रीन लीग और कात्री ने सेंटर पार्टी का दामन थाम लिया। फिनलैंड उत्तरी यूरोप में स्थित है। जिसकी राजधानी हेलसिंकी है। फिनलैंड इस वक्त राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। डाक कर्मचारियों की हड़ताल से यह अस्थिरता शुरू हुई। पूरे देश में डाक कर्मचारी मेहनताने में कटौती को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, नवंबर के आखिरी सप्ताह में कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।



 
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