योगिता पाठक
नई दिल्ली, 01 मई (हि.स.)। कोरोना संक्रमण की बेकाबू रफ्तार से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा है। इसकी वजह से विकास दर के भी प्रभावित होने की आशंका बन गई है। इस विषम परिस्थिति के बावजूद जीएसटी कलेक्शन के मामले में सरकार को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। अप्रैल महीने का जीएसटी कलेक्शन 1.41 लाख करोड़ रुपये हुआ है। कलेक्शन की ये राशि ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच कर नया रिकॉर्ड बना रही है। 

वित्त मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक अप्रैल महीने का कुल जीएसटी कलेक्शन 141384 करोड़ रुपये का रहा है, जो जीएसटी व्यवस्था की शुरुआत के बाद से ही अभी तक का एक रिकॉर्ड है। कुल जीएसटी कलेक्शन में सेंट्रल जीएसटी 27837 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी 35621 करोड़ रुपये और इंटेग्रटेड जीएसटी 68481 करोड़ रुपये रहा है। इसके अलावा 9445 करोड़ों रुपये सेस के हैं। इंटेग्रेटेड जीएसटी में 29599 करोड़ रुपये केवल आयात किए गए सामानों पर लगाए गए टैक्स से मिले हैं। 

इसके पहले मार्च के महीने में भी जीएसटी कलेक्शन ऑल टाइम हाई रहा था। मार्च में कुल 123902 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था, जो जीएसटी की शुरुआत के बाद का सबसे ज्यादा कलेक्शन था। अप्रैल के महीने में ये आंकड़ा भी काफी पीछे छूट गया। मार्च के पहले फरवरी में 113143 करोड़ रुपये, जनवरी में 119875 करोड़ रुपये, दिसंबर 2020 में 115174 करोड़ रुपये, नवंबर 2020 में 104963 करोड़ रुपये और अक्टूबर 2020 में 105155 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था। इसके पहले अप्रैल से सितंबर 2020 तक जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से नीचे ही रहा था। 

इन आंकड़ों से साफ है कि अर्थव्यवस्था पर लगातार प्रतिकूल असर डाल रहे कोरोना के संक्रमण के बावजूद देश के कारोबारियों ने न केवल रिटर्न फाइल करने में प्रतिबद्धता दिखाई है बल्कि समय पर अपने जीएसटी बकाए का भुगतान भी किया है। ये आंकड़े इस बात को भी दर्शाते हैं कि तमाम प्रतिकूल दबावों का सामना करने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं। इससे ये भी जाहिर है कि मजबूत फंडामेंटल्स के बल पर महामारी का दबाव कम होते ही देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर पूरी गति से कुलांचे भर सकती है। 

हिन्दुस्थान समाचार
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