राजाराम ने लगाए सात लाख पौधे पर नहीं मनाते पर्यावरण दिवस


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आशुतोष पांडेय
नई दिल्ली, 05 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के एक किसान डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी इन दिनों चर्चा में हैं। त्रिपाठी का दावा है कि वो अभी तक सात लाख से अधिक पौधे लगाये हैं और ये पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं। 

त्रिपाठी का कहना है कि वो पौध रोपण का कार्य बीते 25-30 वर्षों से करते आ रहे हैं। त्रिपाठी इन दिनों चर्चा में इस लिए भी हैं क्योंकि वो हर वर्ष पांच जून को मनाये जाने वाला 'विश्व पर्यावरण दिवस' को नहीं मानते। 

इस विषय पर उन्होंने शनिवार को 'हिन्दुस्थान समाचार' से बातचीत करते हुए कहा कि पांच जून पूरी दुनिया के लिए खास है क्योंकि यह दिन प्रर्यावरण को समर्पित है। इस दिन पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए कई तरह के जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। लेकिन वो पर्यावरण दिवस नहीं मनाते। क्योंकि वो हर दिन पर्यावरण के प्रति अपना दायित्व निभाते हैं। जैविक-हर्बल खेती में विशेष योगदान देने वाले और बैंक ऑफ स्कॉटलैंड के 'अर्थ हीरो' पुरस्कार सहित भारत सरकार के 'राष्ट्रीय कृषि रत्न' पुरस्कार से सम्मानित किसान डॉक्टर राजाराम कहते हैं कि वो और उनकी टीम ने पिछले 25 वर्षों में 7 लाख से अधिक पौधे लगाए जो वृक्ष का रूप ले चुके हैं।

त्रिपाठी ने कहा कि वो जल्द ही 11 लाख वृक्षों के लगाने का संकल्प पूरा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष देवता का पूजन सनातन परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में इसकी सेवा परमेश्वर की सेवा करने जैसी है। मत्स्यपुराण में वर्णित है कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी होती है, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र है और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।

त्रिपाठी ने कहा कि जब वो गगनचुम्बी पेड़ो के नीचे खड़े होते हैं तो उन्हें लगता है कि वो अपने 7 लाख परिवार के बीच खड़े हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कहा था कि 'हम दुनिया के जंगलों के लिए क्या कर रहे हैं, यह इस बात का प्रतिबिंब है कि हम वास्तव में एक- दूसरे के लिए क्या कर रहे हैं'। उन्होंने कहा कि वो वर्षाकाल के तीन महीनों में लगातार पौध रोपण करते हैं और 09 महीने तक उसकी देखरेख करते हैं। इसी कारण वो पर्यावरण दिवस नहीं मनाते। उनका हर दिन पर्यावरण को समर्पित है वो इसे किसी एक दिन में नहीं बांधना चाहते। 

त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने देश के सबसे पिछड़े व संवेदनशील क्षेत्र बस्तर में अपने बूते पर 7 एकड़ पर जंगल उगाया साथ ही 400 से भी अधिक प्रजाति की वनस्पतियों को संरक्षित की। यहां पर इन्होंने प्राकृतिक रहवास में ऐसी 32 दुर्लभ वन औषधियों को संरक्षित किया है, जो इस पृथ्वी से विलुप्त प्राय मानी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बस्तर में पौध रोपण अभियान शुरु किया तो लोग उनपर हंसते थे लेकिन जब उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलान ने उनके कार्य और प्रयास की सराहना की तो उनके उत्साह को और बल मिला और उन्होंने तमाम कठिनाइयों के बाद भी यह कार्य जारी रखा और आज परिणाम सामने है। 

हिन्दुस्थान समाचार
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