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क्या होगा अजित पवार का!

09/10/2019

क्या होगा अजित पवार का!

सुधीर जोशी

हाराष्ट्र के कद्दावर राजनेताओं में शामिल अजित पवार सहित 70 लोगों के खिलाफ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सहकारी बैंक में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मुंबई उच्च न्यायालय ने इस संबंध में कहा है कि घोटाले में जो साक्ष्य सामने आए हैं, वे जांच के योग्य हैं। आरोप है कि वर्ष 2007 से 2011 के बीच इन लोगों की मिलीभगत से बैंक को एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। घपले चीनी मिलों तथा कताई मिलों को ऋण देने और वसूली में अनियमितता के कारण हुए। आरोपितों में 34 जिलों के विभिन्न बैंक अधिकारी शामिल हैं। सहकारी बैंक के अध्यक्ष के तौर पर अजित पवार तथा उनके अन्य साथियों ने ऋण के मामले में जो किया, उससे यह बात उजागर हो गई कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है।

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे पर घोटाले के आरोप से पार्टी परेशानी में आ सकती है। यह चुनाव का मुद्दा बनेगा और इससे एक बार फिर अजित पवार के सत्ता से दूर रहने की ही स्थितियां बनेंगी।

महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में हुए 25,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में अजित पवार के अलावा जिन अन्य लोगों पर कार्रवाई हो सकती है, उनमें माणिक राव पाटिल, नीलेश नाईक, विजय सिंह मोहिते पाटिल, दिलीप देशमुख, राजेंद्र शिंगणे, मदन पाटिल, हसन मुश्रीफ, मधुकर राव चव्हाण, शिवराम जाधव, पृथ्वीराज देशमुख, राजवर्धन कंदमबांडे, राम प्रसाद कदम, जयंत पाटिल, धनंजय दलाल समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। इस प्रकरण में राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार का कहना है कि यह सब कुछ बदले की भावना से किया जा रहा है। बारामती की सांसद तथा राज्य के वरिष्ठ नेता शरद पवार की सुपुत्री सुप्रिया सुले कहती हैं कि अजित पवार को बेवजह परेशान किया जा रहा है। दूसरी ओर,नाबार्ड का तर्क है कि बैंक संचालक मंडल को पूरी जानकारी होने के बावजूद, ऐसा होना भ्रष्टाचार को ही दर्शाता है। राज्य की राजनीति में दादा के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अजित पवार राकांपा के सबसे भरोसेमंद और निष्ठावान नेता हैं। जब राकांपा के कई बड़े नेताओं ने भाजपा और शिवसेना का दामन थाम लिया है, अजित पवार पर घोटाले के आरोप सुखद संकेत नहीं हैं।

सिमट रही राकांपा

राज्य की राजनीति में दो दशकों से सक्रिय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, यानी राकांपा को अपना मुख्यमंत्री देखने का अवसर नहीं मिला है। जिस तरह इस पार्टी का कुनबा लगातार छोटा होता जा रहा है, उससे निकट भविष्य में भी यह मुमकिन नहीं लगता। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि राकांपा का कांग्रेस में विलय हो जाय, तो जरूर कुछ मजबूती आ सकती है। ऐसे में अजित पवार की उम्मीदों के भी पर लग सकते हैं। हालांकि फिलहाल दोनों पार्टियों के विलय के आसार नहीं दिखते। कुछ राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि इस समय अजित पवार के पीछे खड़े होने से कांग्रेस को नुकसान ही होंगे।

जांच की रμतार से लगता है कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने तक संभवत: अजित पवार पर कोई कार्रवाई न हो। फिर भी इसे चुनाव का मसला बनाया जा सकता है। आगे अगर भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी तो अजित पवार पर शिकंजा भी कस सकता है। दसवीं कक्षा के बाद आगे की शिक्षा अपने चाचा शरद पवार के यहां रहकर पूरी करने वाले अजित ने उनसे राजनीति का ककहरा भी सीखा। राजनीति के चाणक्य कहे जाने अपने चाचा के सानिध्य में रहकर ही उन्होंने सहकारी संस्था के जरिए अपने सामाजिक कार्यों की नींव तैयार की। अल्प काल में ही अजित पवार ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। अब अजीत और सुप्रिया सुले आरोप लगाते हैं कि राज्य की फडणवीस सरकार के विरोध में आवाज उठाने के चलते ही बदले की भावना से यह सब किया जा रहा है।  सहकारी बैंक घोटाले का पूरा सच क्या है, यह तो अजित पवार तथा बैंक के वे लोग जानते हैं, जिन्होंने ऋण दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। फिर भी जिस तरह से अजित पवार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा जरूर बनेगा।




 
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