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उपचुनाव का खेल

09/10/2019

उपचुनाव का खेल

जुगनू शारदेय

राज्य में यह केवल उपचुनाव नहीं है, बल्कि 2020 की बानगी है। अगले साल लगभग सितंबर-अक्टूबर में ही विधान सभा का चुनाव होगा।

बिहार में चुनाव हमेशा मजेदार होता है। अगर यह उपचुनाव का आम चुनाव हुआ, तो कुछ अधिक ही दिलचस्प होता है। पहला तो जाति का खेल आरंभ होता है। बिहार में जाति का खेल हमेशा होता ही है। लोक सभा के चुनाव के समय नरेन्द्र मोदी का भी नाम था, पर उससे अधिक नीतीश कुमार की रणनीति थी। इस बात को अमित शाह ने समझ लिया था, इसलिए अपनी पांच क्षेत्रों को जदयू के लिए छोड़ दिया था। उस समय जदयू के पास केवल दो लोकसभा के क्षेत्र ही थे। उस समय राजनीति का जो खेल रामविलास पासबान ने खेला था, वह अद्भुत था।
वह राज्य सभा में जाना चाहते थे। अंदाजा लगाया गया कि वह असम से जायेंगे क्योंकि वहां दो सीटें खाली थी, तो वहीं से चले जायेंगे। पर ऐसा हुआ नहीं, वह बिहार से ही गये क्योंकि रविशंकर प्रसाद लोकसभा में जा चुके थे। अभी भी उनकी कार्ययोजना समझ के बाहर है क्योंकि उन्होंने हाजीपुर से लोक सभा सदस्य पशुपति कुमार पारस को दलित सेना का अध्यक्ष बना दिया है और चिराग पासबान को बिहार का अध्यक्ष बना दिया है। पारस की नीतीश कुमार से अच्छी पटती थी। अब अक्टूबर में 21 को समस्तीपुर में उपचुनाव होगा।
वहां के सांसद रामचंद्र पासवान का निधन 22 जुलाई को हो गया। वह केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान के अनुज थे। आमतौर पर सदस्य के निधन के 6 माह के अंदर चुनाव हो जाता है। 30 सितंबर को नामांकन की आखिरी तिथि है और चुनाव 21 अक्तूबर को होगा। नतीजा 24 अक्टूबर को आ जायेगा। अमुमन लोक जनशक्ति घरेलू पार्टी है, इसलिए माना जाता है कि वहां से उम्मीदवार प्रिंस राज होंगे। वह रामचंद्र पासवान के बेटा हैं और 2015 में विधान सभा का चुनाव लड़ चुके हैं। 2019 में यहां से कांग्रेस के अशोक कुमार ही उम्मीदवार होंगे। दलित क्षेत्र में होने के बावजूद यह कुशवाहा बहुल है। इसी के साथ बिहार विधान सभा के 5 सदस्यों का चुनाव होगा।
यहां के विधान सभा सदस्य लोकसभा के लिए चुने गये हैं। सिमरी बखतियारपुर विधान सभा के सदस्य दिनेश चंद्र यादव ने मधेपुरा से शरद यादव को पराजित कर लोक सभा पहुंच गये। नाथनगर के विधायक अजय कुमार मंडल भागलपुर से जीते। बांका से लोक सभा के लिए जीतने वाले गिरधारी यादव बेलहर से विधायक थे। कविता सिंह सिवान जिला के दरौंदा से विधायक रहीं। ये सारे लोग जदयू के सदस्य हैं। दरोंदा से उम्मीदवार चुनना नीतीश कुमार के लिए कठिन होगा। कविता सिंह का चुनाव भी अजीब ढंग से हुआ था। 2010 में वह विधान सभा के लिए इसलिए चुनी गयीं कि उनके संभावित पति बाहुबली थे। फिर भी अशुभ काल में उनका विवाह हुआ।
यह उनके लिए शुभ ही साबित हुआ। कांग्रेस की ओर से किशनगंज के विधायक मोहम्मद जावेद लोकसभा पहुंच गये। माना जा रहा है कि किशनगंज का विधान सभा नीतीश कुमार के लिए उनका सपना भी है। यह मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और तीन तलाक विधेयक पर राज्य सभा में जदयू ने बहिष्कार किया था। विधान सभा 2019 के इन उपचुनाव में नीतीश कुमार का मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल से तो होगा ही। उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी से भी होगा। तकलीफ तो होगी ही। सिर्फ दरौंदा में कम्यूनिस्ट (लिबरेशन- माले) से हो सकता है। कहा जाता है कि नीतीश कुमार ने यहां से लोक सभा सदस्यों को ही विधान सभा के लिए उम्मीदवार तय करने के लिए कहा है।
महागठबंधन की पार्टियों में खूब झगड़ा चल रहा है क्योंकि राजद ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बीजेपी और जदयू में इस बात पर बहस चल रही है कि रामजेठमलानी की मृत्यु के बाद किसे राज्यसभा में भेजा जाए।


 
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