नवोत्थान

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सबका योग, योग के सब

02/07/2019

सबका
योग, योग के सब



नरेन्द्र
मोदी



झारखंड
में योग दिवस के लिए आना अपने-आप में बहुत सुखद अनुभव है। आप लोग बहुत सुबह ही अपने
घरों से निकलकर दूर-दूर से यहां आए हैं
मैं आप सभी का आभारी हूं। बहुत से लोगों के मन
में आज यह सवाल है कि मैं आपके साथ पांचवां योग दिवस मनाने के लिए रांची ही क्‍यों
आया हूं। रांची से मेरा लगाव तो है ही
, लेकिन आज मेरे लिए रांची आने की तीन
बड़ी वजह है। पहली वजह तो यह है कि झारखंड अपने नाम में ही वन प्रदेश है
। यह प्रकृति के बहुत करीब है। योग और
प्रकृति का तालमेल इंसान को एक अलग ही एहसास कराता है। दूसरी वजह है कि रांची और
स्‍वास्‍थ्‍य का रिश्‍ता अब इतिहास में दर्ज है। पिछले साल
23
सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय की जन्‍म-जयंती नि‍मित्‍त रांची से ही हमने
आयुष्‍मान भारत योजना की शुरुआत की थी। आज दुनिया की सबसे बड़ी
स्वास्थ्य संबंधी योजना, प्रधानमंत्री जन-आरोग्‍य योजना बहुत कम
समय में गरीबों के लिए बहुत बड़ा संबल बनी है। भारतीयों को आयुष्‍मान बनाने में
योग का जो महत्‍व है
, उसे भी हम भली-भांति जानते और समझते हैं, इसलिए भी आज रांची आना मेरे लिए विशेष
है। तीसरी सबसे बड़ी बात यह है कि अब योग के अभियान को मुझे और हम सबको मिलकर एक
अलग स्‍तर पर ले जाना है।



योग
हमारे देश में हमेशा से रहा है
,
हमारी संस्‍कृति का अभिन्‍न हिस्‍सा
रहा है। यहां झारखंड में भी जो
छऊ नृत्य होता है, उसमें आसनों और मुद्राओं को व्‍यक्‍त किया जाता
है। लेकिन यह भी सच है कि आधुनिक योग की जो यात्रा है
, वह देश के ग्रामीण और आदिवासी अंचल में अभी उस
तरह नहीं पहुंची है
, जैसी पहुंचनी चाहिए थी। अब मुझे और हम सबको मिलकर
आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गांवों की तरफ
, जंगलों की तरफ, दूर-सुदूर आखिरी इंसान तक ले जानी है। गरीब और
आदिवासी के घर तक योग को पहुंचाना है। मुझे योग को गरीब और आदिवासी के जीवन का भी
अभिन्‍न हिस्‍सा बनाना है, क्‍योंकि ये गरीब ही हैं जो बीमारी की वजह से सबसे ज्‍यादा
कष्‍ट पाते हैं। बीमारी ही है जो गरीब को और अधिक गरीब बना देती है। इसलिए ऐसे समय
में जब देश में गरीबी कम होने की रफ्तार बढ़ी है
, योग उन लोगों के लिए भी एक बड़ा माध्‍यम है जो
गरीबी से बाहर निकल रहे हैं। उनके जीवन में योग की स्‍थापना का मतलब है उन्‍हें
बीमारी और गरीबी के चंगुल से बचाना।
सिर्फ सुविधाओं से जीवन को आसान बनाना काफी
नहीं है। दवाइयों और सर्जरी का समाधान पर्याप्‍त नहीं है। आज के बदलते हुए समय में
बीमारी
से बचाव के साथ-साथ कल्याण पर हमारा अधिक ध्यान
केंद्रित होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है। यही भावना योग की है
, पुरातन भारतीय दर्शन की भी है। योग सिर्फ तभी
नहीं होता, जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर
या दरी पर होते हैं; योग
अनुशासन है

समर्पण है इसका पालन पूरे जीवनभर करना होता है। योग- आयु, रंग, जाति, सम्‍प्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद
के भेद
, सीमा के भेद, इन
सबसे परे है। योग सबका है और सब योग के हैं।



बीते
पांच वर्षों में योग को
स्वास्थ्य और कल्याण के साथ जोड़कर हमारी सरकार ने इसे रोग निवारक चिकित्सा प्रणाली का मजबूत स्‍तंभ
बनाने का प्रयास किया है। आज हम यह कह सकते हैं कि भारत में योग के प्रति जागरूकता
हर कोने तक
, हर वर्ग तक पहुंची है- ड्राइंग-रूम से
बेड-रूम तक
, शहरों के पार्क से खेल के मैदान तक, गली-कूचों
तक
,
आज चारों तरफ योग को अनुभव किया जा
सकता है।
तब
मुझे और संतोष मिलता है
, जब मैं देखता हूं कि युवा पीढ़ी हमारी इस
पुरातन पद्धति को आधुनिकता के साथ जोड़ रही है
। उसे प्रचारित और
प्रसारित कर रही है। युवाओं के नवीन

और रचनात्मक विचार से योग पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय और जीवंत
हो गया है।
आज
के इस अवसर पर
योग के प्रचार और विकास के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार
की घोषणा की गई। एक ज्‍यूरी ने इसका
निर्णय किया है और पूरी दुनिया में मशक्‍कत करके उन लोगों को खोजा गया है,
जिन साथियों को पुरस्‍कार मिला हैमैं उनकी तपस्‍या और योग के प्रति उनके
समर्पण की सराहना करता हूं।



इस
वर्ष के अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस का विषय है-
ह्रदय की देखभाल के
लिए योग।
ह्रदय की समस्या आज पूरे विश्‍व के लिए एक चुनौती बन चुकी है।
भारत में तो बीते दो-ढाई दशकों में
ह्रदय से
जुड़ी बीमारियों में कई गुना बढ़ोत्‍तरी हुई है। दुखद बात यह है कि बहुत ही कम
उम्र के युवाओं में भी
दिल की
समस्‍या बढ़ रही है। ऐसे में
दिल संबंधी जागरूकता
के साथ-साथ योग को भी रोकथाम और उपचार का हिस्‍सा बनाना जरूरी है। मैं यहां के स्‍थानीय योग आश्रमों से
भी आग्रह करूंगा कि योग के प्रसार में वे और आगे बढ़ें। चाहे देवघर का रिखिया
पीठयोग आश्रम हो
, रांची का योगदा सत्‍संग सखा मठ या अन्‍य
संस्‍थान
वे
भी इस वर्ष
ह्रदय संबंधी जागरूकता को विषय बनाकर
आयोजन करें।
जब
उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य होता है तो जीवन की नई ऊंचाइयों को पाने का एक जज्‍बा भी होता
है। थके हुए शरीर और
टूटे
हुए मन से

सपने सजाए जा सकते हैं
,
अरमानों को साकार किया जा सकता है। जब हम उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य की बात करते हैं
तो पानी, पोषण, पर्यावरण, परिश्रम इन चार बातों पर ध्यान देना चाहिए। पीने
का शुद्ध पानी मिले
, आवश्‍यकता के अनुसार पोषण प्राप्‍त हो, पर्यावरण स्‍वच्‍छ हो और परिश्रम जीवन का हिस्‍सा हो तो
उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ये चार
'' परिणाम
देते हैं।



अंतरराष्‍ट्रीय
योग दिवस की शुरुआत के बाद हमने अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं
,  जिनका
लाभ भी देखने को मिल रहा है। भविष्‍य को देखते हुए हमें योग को हर व्‍यक्ति के
जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए
, स्‍वभाव बनाने के लिए निरंतर काम करना
है। इसके लिए योग से जुड़े साधकों
, शिक्षकों और संगठनों की भूमिका बढ़ने
वाली है। योग को करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्‍सा बनाने के लिए
श्रमशक्ति को तैयार करना, मानव संसाधन विकास भी
बहुत जरूरी है। ये तभी संभव है, जब हम योग से जुड़े
मानक और संस्था को विकसित करें।
इसलिए हमारी सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।
आज हमारे योग को दुनिया अपना रही है तो
हमें योग से जुड़े शोध-कार्य पर जोर देना होगा। जैसे हमारे फोन का सॉफ्टवेयर लगातार
अपडेट होता
रहता है
, वैसे ही हमें योग के बारे में जानकारी
दुनिया को देते रहना है। इसके लिए जरूरी है कि हम योग को किसी दायरे में बांधकर न
रखें। योग को
मेडिकल, फिजियोथेरेपी आदि से भी जोड़ना होगा।
इतना ही नहीं
, हमें योग से जुड़े निजी क्षेत्र को
भी प्रोत्‍साहित करना पड़ेगा
तभी
हम योग का विस्‍तार कर पाएंगे। हमारी सरकार इन आवश्‍यकताओं को समझते हुए अनेक
क्षेत्रों में काम कर रही है। मैं आपको अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की कामना के साथ एक
बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। और मैं आशा
करूंगा कि आप सभी यहां जितने प्रयोग हम योगा के करने वाले हैं
, ज्‍यादा न करें, इतना ही करें, लेकिन लगातार उसकी अवधि बढ़ाते
जाएं
आप महसूस
करेंगे कि उसका अद्भुत लाभ आपके जीवन में हुआ है। मैं फिर से एक बार आपको उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य
के लिए शांति
, सद्भाव और समन्‍वय वाली जिंदगी के लिए बहुत-बहुत
शुभकमानाएं देता हूं।



मैं
झारखंड सरकार को भी बधाई देता हूं कि बहुत ही कम समय में इतना बड़ा उन्‍होंने
आयोजन किया। पहले से इन्‍हें कोई पता नहीं था।
 दो
सप्‍ताह पहले ही
नई
सरकार बनी। उसके बाद रांची में इतना बड़ा कार्यक्रम करने का विचार आया। लेकिन इतने
कम समय में झारखंड-वासियों ने जो कमाल करके दिखाया है
, उसके लिए मैं आपको और आपकी सरकार को बहुत-बहुत
बधाई देता हूं।



पांचवें
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून 2019) पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का
संपादित अंश।) 


 
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