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कर्नाटक कांग्रेस कार्यकारिणी भंग , नेताओं को अब पार्टी आलाकमालन के अगले कदम का इंतजार

19/06/2019

नूरुद्दीन
बेंगलुरु,19 जून (हि.स.)। पिछली लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार मल्लिकार्जुन खड़गे की 2019 के लोकसभा चुनाव में  हार, चुनाव के दौरान पार्टी में बगावती सुरों का निकलना और सत्ता में जनता दल सेकुलर के साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में तालमेल का अभाव ही कर्नाटक कांग्रेस कार्यकारिणी को भंग कर उसका पूर्णरूपेण पुन:र्गठन करने का सबब बना है। 
पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर पार्टी के महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी केसी वेणुगोपालन ने 170 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया लेकिन प्रदेश पार्टी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव और कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खंडरे को उनके पदों को यथावत रखा है। पार्टी में चल रही खींचतान से आजिज गुंडूराव ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ब्लॉक से जिलास्तर तक पुनर्गठन करने का अनुरोध किया था। इसी पर पार्टी अध्यक्ष ने आज यह बड़ा फैसला लिया है।
कर्नाटक में कांग्रेस के साथ सत्ता में भागीदार जनता दल (एस) के नेता व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी इस फैसले के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने उनके आवास पर गए। समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने इस फैसले के आलोक में राज्य की नवीनतम राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। 
कांग्रेस विधायक आर रोशनबेग का पार्टी से निलंबन और आज  कार्यकारिणी को भंग कर देने का निर्णय राज्य कांग्रेस में बड़े परिवर्तन का संकेत दे रहा है। राज्य में लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद कांग्रेस में एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ा जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहने के और प्रदेश में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली सरकार के विस्तार के बाद कांग्रेस में उठापटक और तेज हो गई है। साल 2014 में कर्नाटक में 28 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार खिसककर मात्र एक सीट पर आ गई है।  
पार्टी में पद नहीं मिलने से शुरू से ही उठापटक चल रही थी लेकिन इसने पिछले साल दिसंबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के पश्चात उस समय विकराल रूप ले लिया जब मंत्री पद से हटाए गए गोकाक से पार्टी विधायक रमेश जारकीहोली ने आलाकमान को ही चुनौती दे दी। उनको कथित तौर पर भाजपा के साथ नजदीकियां बढ़ाने के आरोपों के चलते पद से हटाया गया था। वह पिछले सात माह से बागी होने के बावजूद कांग्रेस में बने हुए हैं, जबकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते रोशन बेग को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
कर्नाटक में पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद ही भाजपा ने असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों को अपनी ओर खींचने के प्रयास किया था, जिसमें भाजपा सफल नहीं हुई थी लेकिन कांग्रेस के बागी रमेश जारकीहोली भूमिगत रहकर ऑपरेशन कमल चलाने के लिए प्रयास करते रहे। हाल ही हुए मंत्रिमंडल विस्तार में स्थान नहीं मिलने से भी कई नेता अपनी नाराजगी प्रकट कर चुके हैं, क्योंकि सरकार का अस्तित्व बचाने के लिए इस विस्तार में दो निर्दलीय विधायकों आर शंकर और एच नागेश को मंत्री बनाया गया था। कांग्रेस उम्मीदवारों को ही परास्त करने वाले निर्दलीय विधायक अब मंत्री हैं, यह बात कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के गले नहीं उतर रही है।  
पूर्व पुलिस अधिकारी से राजनेता बने बीसी पाटिल, रामलिंगारेड्डी, आर रोशन बेग, एचके पाटिल समेत कई नेता मंत्री पद के दावेदार थे लेकिन उन सबकी अनदेखी की गई। इसके बाद रोशन बेग ने खुलकर पार्टी के उच्च नेताओं की कार्यशैली और निर्णयों पर सवाल उठा  दिया था। बेग ने कर्नाटक में पार्टी के लचर प्रदर्शन के लिए सिद्धरमैया, दिनेश गुंडूराव और वेणुगोपालन को जिम्मेदार ठहराया था। 
बेग ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वे (राहुल) उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं जिन्होंने मंड्या में निर्दलीय उम्मीदवार सुमलता अंबरीश का खुलकर समर्थन किया और कोलार में केएच मुनियप्पा के खिलाफ काम किया। कांग्रेस और जेडीएस की संयुक्त सरकार में तनातनी की खबरें आम बात है। यहां तक कि एक बार तो मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने हालात से तंग आकर मुख्यमंत्री पद छोडने की धमकी दे दी थी। बहरहाल, राज्य के कांग्रेस नेताओं को अब पार्टी आलाकमालन के अगले कदम का इंतजार है।
हिन्दुस्थान समाचार


 
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