युगवार्ता

Blog single photo

ब्लैकलिस्ट होने की ओर पाकिस्तान

28/10/2019

ब्लैकलिस्ट होने की ओर पाकिस्तान

बकरे की मां आखिर कब तक खैर मनाएगी। पाकिस्तान के वर्तमान हालात के लिए यह मुहावरा बिल्कुल सटीक है। चीन, तुर्की व मलेशिया के कारण वह टेरर फंडिंग को लेकर फिलहाल ब्लैकलिस्ट होने से तो बच गया है लेकिन चार महीने बाद उसके सिर पर ब्लैकलिस्ट होने की तलवार लटक गई है। फाइनैंशियल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे सुधरने का अंतिम मौका देते हुए चेतावनी दी है कि फरवरी 2020 तक अपनी आदतों में सुधार कर आतंकियों को प्रश्रय देना बंद कर दे। अन्यथा उसे ब्लैकलिस्ट होने से न तो उसका सदाबहार मित्र चीन बचा सकेगा और न ही तुर्की और मलेशिया। यही नहीं, एफएटीएफ ने पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन और व्यापार पर भी सदस्यों को नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस फैसले को सार्वजनिक कर एफएटीएफ ने एक खास संदेश दिया है। यह संदेश है अंतरराष्ट्रीय वैश्विक संस्थाओं को पाकिस्तान को फरवरी 2020 से और सहायता नहीं देने के लिए तैयार रहने का। एफएटीएफ अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की फंडिंग की निगरानी करती है। एफएटीएफ की सख्ती के साथ यह भी तय हो गया कि अब ग्रे लिस्ट से निकलना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन-सा हो गया है। उल्लेखनीय है कि जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था और 27 प्वाइंट का ऐक्शन प्लान लागू करने के लिए उसे एक साल का समय दिया गया था। इसमें आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के उपाय करने थे।
लेकिन आदत से लाचार पाकिस्तान आतंकियों का पनाहगाह बना रहा। अपनी इसी धृष्टता की वजह से ही उसे आॅस्ट्रोलिया की राजधानी कैनबरा में संपन्न एफएटीएफ की पिछली बैठक में भी ग्रेलिस्ट में ही रखा गया। अगर अब भी वह नहीं सुधरा तो उसे कोई भी नहीं बचा पायेगा। उल्लेखनीय है कि एफएटीएफ द्वारा किसी देश को ब्लैक लिस्ट में डाले जाने के बाद उस पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज हासिल करना मुश्किल हो जाता है। ब्लैकलिस्टेड होने के बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। ऐसे में पहले से ही कंगाल पाकिस्तान की आर्थिक सेहत और डांवाडोल हो जायेगी।
यहां तक कि बदहाली से उबरने के लिए चीन व सऊदी अरब जैसे देशों से भी उसे फंड मिलने में मुश्किल हो सकती है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बाद पाकिस्तान ने खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हुए भारत से वाणिज्यिक संबंध खत्म कर लिये थे। इसका परिणाम यह हुआ कि वहां महंगाई चरम पर पहुंच गई। आलू, प्याज व टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजें सौ रुपये किलो में भी नहीं मिल रही हैं। उस पर से तुर्रा यह कि खाने को नहीं दाने अम्मा चली भुनाने की तर्ज पर वह परमाणु बम की गीदड़ भभकी देने से नहीं चूक रहा है। बहरहाल, देखना दिलचस्प होगा कि एफएटीएफ की काली सूची में जाने से बच निकलने में कामयाब पाकिस्तान अपने रवैये में तब्दीली करता है या दुम सीधी न होने वाली कहावत को ही एक बार फिर चरितार्थ करता है।


 
Top