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श्रीकांत शर्मा ने उप्र कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा कानूनी नोटिस, कहा मांगें माफी

07/11/2019

संजय सिंह 
लखनऊ, 07 नवम्बर (हि.स.)। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भविष्य निधि की 2600 करोड़ की धनराशि निवेश के मामले में धांधली को लेकर संगीन आरोप लगाने पर गुरुवार को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें माफी नहीं मांगने पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। 

आरोप के हर बिन्दु पर​ दिया जवाब
श्रीकांत शर्मा के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह ने नोटिस में लल्लू से कहा है कि उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएचएफल से सम्बन्धित व्यक्तियों ने ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से उनके कार्यालय, सरकारी आवास और म​थुरा स्थित आवास पर भेंट की। इसके साथ ही लल्लू ने 03 नवम्बर को अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में आरोप लगाये थे कि गरीब जनता की बिजली कुछ सौ और हजार रुपये के बकाया पर कटवा देने वाले ऊर्जा मंत्री विभाग के खजाने से हजारों करोड़ रुपये देशद्रोहियों दाउद इब्राहिम और इकबाल मिर्ची से जुड़ी कम्पनियों को देते हैं। 

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने 05 नवम्बर को आरोप लगए कि इस बात की जांच की जानी चाहिए कि सितम्बर-अक्टूबर 2017 में ऊर्जा मंत्री किस प्रयोजन से दुबई गये और वहां किन-किन लोगों से मुलाकात की। यह दौरा उस समय करने के आरोप लगाये गये जब डीएचएफएल का पैसा सनब्लिंक कम्पनी को जा रहा था। ऊर्जा मंत्री से दस दिनों की इस आधिकारिक यात्रा का उद्देश्य पूछा गया था। 

किसी भी विदेश दौरे पर जाने से किया इनकार, मुलाकात का औचित्य नहीं
नोटिस में ऊर्जा मंत्री के हवाले से कहा गया कि जब उनकी डीएचएफएल या सनब्लिंक कम्पनी से धन हस्तानान्तरण में कोई भूमिका नहीं रही और निवेश प्रक्रिया से कोई सरोकार नहीं है तो उनका डीएचएफएल या उसके अधिकारियों-कर्मचारियों से मिलने या न मिलने का कोई औचित्य नहीं है। श्रीकांत शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया है कि सितम्बर-अक्टूबर में या कभी भी वह दुबई या किसी अन्य विदेश यात्रा पर नहीं गए। भविष्य निधि की धनराशि का प्रबन्धन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसमें श्रीकांत शर्मा किसी भी पद पर नहीं हैं। 

षड्यंत्र के तहत लगाए झूठे आरोप
श्रीकांत शर्मा के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह ने कहा है कि आरोप पूरी तरह असत्य, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक हैं और बिना तथ्यों की जांच करे षड्यंत्र के तहत ऊर्जा मंत्री की छवि धूमिल करने के लिए लगाये गये हैं। इसलिए नोाटिस मिलने के सात दिनों के अन्दर अजय कुमार लल्लू माफी मांगे। अन्यथा मानहानी और दीवानी की कार्यवाही की जाएगी। 

नोटिस की पहले ही दी थी चेतावनी
इससे पहले श्रीकांत शर्मा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि वह मीडिया में प्रसिद्धि के लिए बचकाने और मनगढ़ंत आरोपों पर उतर आए हैं। अगर वह माफी नहीं मांगते हैं तो वह उन्हें कानूनी नोटिस देंगे। इसके बाद श्रीकांत शर्मा ने अपने अविधवक्ता के जरिए ये नोटिस दे भी दिया। 

अखिलेश सरकार में रची गई धांधली की पटकथा
ऊर्जा मंत्री इस पूरे मामले के लिए अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। उन्होंने कहा है कि अखिलेश सरकार में ही 21 अप्रैल 2014 को निवेश का फैसला लिया गया था और पहला निवेश 17 मार्च 2017 को डीएचएफएल में किया गया। कर्मचारियों का पैसा कहां जमा होगा ये तय करने का अधिकार ट्रस्ट को है। इसमें ऊर्जा मंत्री की कोई भूमिका नहीं होती है। भाजपा सरकार में मामला संज्ञान में आते ही जांच शुरू करवाई हुई और सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। इस मामले में आरोपितों यूपीपीएसएल पूर्व निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी, महाप्रबंधक लेखा एवं इम्प्लाइज ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता और पूर्व प्रबंध निदेशक एपी मिश्रा को तीन-तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंपा गया है। 

शीर्ष प्रबंधन की भूमिका पर उठाये सवाल
इसके साथ ही श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले में कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन यानी चेयरमैन की भूमिका को संदेहास्पद मानते हुए जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। 10 अक्तूबर, 2019 को मिले एक गुमनाम शिकायती पत्र के आधार पर शीर्ष प्रबंधन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की तो उस विषय में भी उन्हें ऊर्जा मंत्री होने के नाते कोई सूचना नहीं दी गई। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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