अपराध

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कानुपर कलेक्ट्रेट में हुए फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में दो अन्य आरोपित गिरफ्तार

03/10/2019

-कारीगर जितेन्द्र की रिमांड मिलने पर एसआईटी को अभियुक्तों तक पहुंचने में मिली कामयाबी

मोहित वर्मा
कानपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। जनपद की कलेक्ट्रेट में असलहा विभाग के बाबुओं की साठगांठ से हुए फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में एसआईटी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने कारीगर जितेन्द्र की रिमांड पर लेकर पूछताछ में इस फर्जीवाड़े में दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों ने फर्जी लाइसेंस बनाने का जुर्म कबूल किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों ने कलेक्ट्रेट में कार्यरत प्रशासनिक अफसरों पर भी अंगुलियां उठाई हैं, लेकिन उन पर हाथ डालने में एसआईटी कतरा रही है। 

पुलिस अधीक्षक (अपराध) राजेश यादव ने पुलिस लाइन में गुरुवार शाम को बीते दिनों कलेक्ट्रेट में बने असलहा लाइसेंस कार्यालय में फर्जी लाइसेंस बनाए जाने का खुलासा हुआ था। प्रकरण में फर्जी दस्तावेजों पर शस्त्र लाइसेंस बनाने के मामले में प्रथम दृष्टया बाबू विनीत तिवारी का नाम प्रकाश में आया। जिसने बचने के लिए जहरीला पदार्थ खा लिया और बाद में पुलिस के पकड़े जाने के चलते अस्पताल से ही भाग निकला। प्रकरण के सामने आने पर जिलाधिकारी विजय विश्वा सपंत सहित प्रशासनिक अफसरों को होश उड़ गये। जिसके बाद कोतवाली थाने में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनंत देव के निर्देश पर मुकदमा दर्ज करते हुए एसआईटी से प्रकरण की जांच शुरु कराई गई। 

एसपी क्राइम ने बताया कि जांच में रायपुरवा के लक्ष्मीपुरवा में रहने वाले कारीगर जितेन्द्र का नाम सामने आया। जिसकी मिली भगत से शस्त्र कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के जरिए असलहों के लाइसेंस बनाए जा रहे थे। करीब फर्जी लाइसेंस बनाने का खुलासा जांच में हुआ। जिनके बाद इन सभी लाइसेंसों के लिए लगाए गये दस्तावेजों की जांच के साथ ही उनके निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरु कर दी गई। 

कारीगर को रिमांड पर लेने में दो अभियुक्तों तक पहुंची टीम
एसपी क्राइम ने बताया कि एसआईटी की जांच के बढ़ते दबाव के चलते कारीगर जितेन्द्र कुमार गुपचुप तरीके से कोर्ट में पेश हो गया और न्यायिक अभिरक्षा में जेल चला गया। फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में बाबू विनीत के अलावा सबसे बड़ी भूमिका जितेन्द्र की होने का पता छानबीन में चला। जिसके चलते बीते माह 21 सितम्बर को उसकी रिमांड अर्जी कोर्ट में दी गई। कोर्ट ने तीन दिनों की पुलिस कस्टडी का आदेश दिया। रिमांड पर लाकर जितेन्द्र से पूछताछ की गई। जिसमें फर्जी लाइसेंस बनाने का पूरा नेटवर्क का पता चलाने के साथ ही दो अन्य लोगों के नाम प्रकाश में आए।

फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में दो और गिरफ्तार 
एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि कारीगर जितेन्द्र से पूछताछ के आधार पर बिठूर के तात्याटोपे नगर निवासी जैकी उर्फ जय किशन प्रजापति व रायपुरवा के लक्ष्मीपुरवा निवासी विशाल प्रजापति ने नामों का पता चला। जांच में दोनों की फर्जी दस्तावेजों के साथ शस्त्र लाइसेंसों की वैध दस्तावेजों के भी जाली बनाए जाने का पता चला। साक्ष्यों के आधार पर दोनों को कोतवाली क्षेत्राधिकारी की अगुवाई में बनी टीम ने गिरफ्तार कर दिया। दोनों ने पूछताछ में अपना जुर्म भी कबूल किया है। खुलासे के दौरान गिरफ्तार अभियुक्तों ने एक प्रशासनिक अफसर का नाम लेकर फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जानकारी होने की सनसनीखेज बात कही। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें इस पर कुछ भी आगे बोलने से मना करा दिया। अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेजने की कार्रवाई के साथ रिमांड खत्म होने के चलते कारीगर जितेन्द्र को जेल भेज दिया गया है। 

धर्मनगरी में फेंक दिये गये सभी दस्तावेज 
एसआईटी टीम की कमान संभाल रहे एसपी क्राइम ने बताया कि रिमांड पर लाए गये कारीगर जितेन्द्र ने पूछताछ में बताया कि प्रकरण के सामने आते ही उसने शस्त्र कार्यालय से सभी दस्तावेजों को हटा दिया। बचने के लिए उन दस्तावेजों को धर्मनगरी चित्रकूट लेकर पहुंचा और मंदाकिनी नदी किनारे फेंक दिया। एसपी क्राइम ने बताया कि रिमांड पर लेकर जितेन्द्र को चित्रकूट ले जाकर दस्तावेज बरामद करने का प्रयास किया गया, लेकिन दस्तावेज नहीं मिल सके। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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