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जन मन में योग

02/07/2019

जन मन में योग



नवोत्थान टीम



योग का कारवां
चल पड़ा है। बच्चे हों या बुजुर्ग
! सभी में योग को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। तारीख
21 जून थी। इस बार शुक्रवार का दिन था। पारा बढ़ा हुआ था। इसके बावजूद दिल्ली के
राजपथ से गांवों की पंचायतों तक लाखों लोग योग करने के लिए इकट्ठा हुए। स्वयं प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी ने रांची के
प्रभात तारा मैदान में सामूहिक योगाभ्यास
किया। उनके साथ करीब 40 हजार लोगों ने योग का अभ्यास किया। इस अवसर पर वे बोले,
हमें योग को शहरों से
गांव तक और गांवों से आदिवासी इलाकों तक ले जाने के प्रयास करने होंगे। योग धर्म
,
जाति, रंग, लिंग और
क्षेत्र से ऊपर है।
लोगों से अपनी बात साझा करते हुए
उन्होंने योग को बीमारियों से तकलीफ उठाने वाले गरीब और आदिवासी लोगों के जीवन का
अभिन्न अंग बनाए जाने पर जोर दिया। लोगों को सचेत करते हुए उन्होंने कहा,
आज के बदलते समय में हमारा ध्यान रोग से बचाव के साथ-साथ आरोग्य पर भी होना चाहिए। योग हमें आरोग्य होने की शक्ति प्रदान करता है। योग की मूल भावना और प्राचीन भारतीय दर्शन यही है।



यह पांचवां
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस था।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने योग सबका और सब योग केका नारा दिया। देश विदेश में योग के
प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को देखते हुए उन्होंने कहा कि आज हम यह कह सकते हैं कि योग
के प्रति जागरूकता हर कोने और वर्ग तक पहुंची है। गली
-कूचों से
आरोग्य केंद्रों तक योग ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमें योग के बारे में और
अधिक अनुसंधान पर जोर देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
के दिन
योग को लेकर जैसा रूझान दिखाई पड़ा, उसकी कल्पना नहीं थी। दिल्ली के
संभ्रांत इलाकों से घिरे लोदी पार्क में भारत सरकार के मंत्री
पीयूष गोयल व रविशंकर प्रसाद के साथ
बड़ी संख्या में लोग योग करते दिखाई दिए। राजपथ पर सैकड़ों की संख्या में लोग
इकट्ठा हुए और कई तरह के योग आसन करते हुए दिखे। दिल्ली के छोटे-बड़े पार्कों का
नजारा भी अलग था। वहां भी लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। यहां तक कि कई
मोहल्लों व अपार्टमेंटों से खबर आई कि लोगों ने आरोग्य रहने के लिए जागरूकता
अभियान चलाया और जीवन में योग को महत्व देन पर बल दिया। लोगों का यह स्वस्फूर्त
भाव था कि वे सामूहिक योगाभ्यास के लिए घर से निकले।



21 जून का दृश्य
अलग था। अहलेसुबह दिल्ली के छोटे-बड़े पार्कों में भीड़ एकत्र होने लगी थी। बच्चों
का उत्साह देखते बन रहा था। उस दिन वे निश्चित उद्देश्य के लिए पार्कों में एकत्र
हो रहे थे। सभी अपनी हाथों में चटाई लेकर पहुंचे थे। देखकर लग रहा था कि कोई विशेष
प्रयोजन है। कुछ देर बाद सामूहिक योगाभ्यास शुरू हुआ। करीब घंटे पर लोगों ने योग
का अभ्यास किया। अपनी जरूरत के हिसाब से योग के नए-नए आसन सीखे। आपस में
जाना-समझा। फिर घर लौट आए। यह वातावरण केवल राजधानी दिल्ली का नहीं था, बल्कि भारत
के साथ विश्व भर से सामूहिक योगाभ्यास की खबरें आईं। दोपहर होते-होते सोशल मीडिया
पर तस्वीरे भर गईं। एक तस्वीर गुजरात से आई, जहां पंद्रहवीं शताब्दी में बनी
बावड़ी में योग का अभ्यास करते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे थे। बावड़ी का आकर्षण
देखते बन रहा था। वहां लोगों ने योग का अभ्यास कर
एक पंथ दो काज का उदाहरण प्रस्तुत किया। एक तो यह कि योग के प्रति जनजागरण का काम किया।
दूसरी यह कि उस मध्यकाल की बनी बावड़ी के महत्व को रखांकित किया। इस बात का स्मरण
रहे कि प्रधानमंत्री लगातार इस बात को दोहरा रहे हैं कि जल के स्रोतों को संरक्षित
किया जाए और बारिस के जल का उचित संचय हो।



खैर, भारत के
दक्षिणी छोर पर स्थित चेन्नई में भी लोगों का उत्साह देखने को मिला। वहां समुद्र
तट पर बड़ी संख्या में लोगों ने योग का अभ्यास किया, जिसमें हर उम्र और वर्ग के
लोगों ने हिस्सा लिया। योग के प्रति जो ललक दिल्ली के राजपथ पर थी, वही सुदूर
दक्षिण भारत में देखने को मिली। जम्मू कश्मीर में भी लोगों ने योग का अभ्यास किया।
अब तक यह अनुभव आया था कि बड़े शहरों में योग के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है।
कस्बे और गांव इससे दूर हैं, लेकिन इस बार स्थिति भिन्न दिखाई दी। बड़े शहरों के
साथ गांव-कस्बों में भी सामूहिक योगाभ्यास के लिए लोग एकत्र हुए। निजी व सरकारी
दफ्तरों में भी यही दृश्य रहा। इन खबरों के आधार पर यह बात बिना किसी हिचक के
स्वीकार की जा सकती है कि योग को लेकर जन-मन में रुचि पैदा हो गई है। 21 जून 2015
को प्रधानमंत्री ने योग को लेकर देश-दुनिया में अलख जगाने का जो बीड़ा उठाया था,
उसमें वे पूरी तरह सफल रहे हैं। हिमालय की चोटियों पर शांत और ठंडे वातावरण में
भारत के सुरक्षाकर्मी इस बार योग करते नजर आए। इस बात को जानकर कोई भी आश्चर्य
करेगा कि भारत तिब्बत सीमा पुलिस के साथ उनके कुत्ते व घोड़ों ने भी योग का अभ्यास
किया। इस संबंध में रोचक तस्वीरें आईं। आईटीबीपी के प्रशिक्षित जानवर योग दिवस के
मौके पर अपनी योग कला का प्रदर्शन करते दिखे।



निरोग और
स्वस्थ्य रहने के लिए योग भारत की प्राचीनतम विद्या है। दुर्भाग्य से विपरीत काल
परिस्थिति में भारत के लोग इस विद्या से दूर हो गए। योग की कई क्रियाएं तो लुप्त
हो गईं। कुछ योगियों ने उन क्रियाओं फिर से जागृत किया और लोगों तक पहुंचाया।
कुमार प्राणेश कहते हैं,
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता के साथ-साथ
योग विद्या को जन-जन पहुंचाने का अभूतपूर्व कार्य किया है। इससे स्वस्थ्य भारत का
निर्माण संभव है। दुर्भाग्य से हम अपनी विद्या को भूल गए थे। प्रधानमंत्री आगे
बढ़कर उसकी याद करा रहे हैं।
भारत में योग संभ्रांत लोगों
की पसंद बनकर रह गया था। श्रेष्ठ योग गुरुओं तक आम लोगों की पहुंच नहीं थी। वे
बड़े समाज से कट चुके थे। 21वीं शताब्दी के पहले दशक में बाबा रामदेव ने इसका
प्रचार किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उससे आगे की शुरुआत की। वे स्वयं योग
की क्रियाएं करते हुए आम लोगों के बीच आए। योग के आसन लगाए। योग का महत्व गिनाना
प्रारंभ किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको पहचान दिलाई। तब कहीं उनकी मेहनत रंग
लाई है। भारत के जन-मन में योग घर कर गया है। यही भाव बीते 21 जून को जगह-जगह
दिखाई दिया।



दुनिया में भी योग
को स्वीकार्यता मिली है। इस संबंध में एक दिलचस्प रिपोर्ट बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने
पिछले दिनों जारी की थी। उसका शीर्षक था-
योग को क्या स्वीकार
कर पाए हैं इस्लामिक देश।
विलियम क्रीमर ने अपनी इस रिपोर्ट
में लिखा है कि
योग की कक्षाओं में ज्यादातर लोगों को इस
बात की चिंता रहती है कि क्या वे सही ढंग से सांस ले रहे हैं या क्या उनके पैर सही
दिसा में हैं। लेकिन कुछ लोग इस कश्मकश में रहते हैं कि क्या उन्हें इन कक्षाओं
में आना चाहिए या कहीं इससे उनका धर्म तो भ्रष्ट नहीं हो रहा है
?’ अपनी रिपोर्ट में वे आगे लिखते हैं कि अमेरिका में रहने वाली एक मुस्लिम
महिला फरीदा हमजा ने योग शिक्षक बनने का फैसला किया और वो पिछले दो या तीन साल से
योग कर रही हैं। उक्त महिला ने रिपोर्टर से अपने अनुभव को साझा किया है। जिसमें वे
बताती हैं कि जब मैंने अपने परिवार और कुछ दोस्तों को इस बारे में बताया तो उनकी
प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं थी। वे काफी हैरान थे कि आखिर मैं ये क्यों करने जा
रही हूं। क्योंकि हो सकता है कि यह इस्लाम के खिलाफ हो।



अपनी रिपोर्ट में विलियम क्रीमर ने जानकारी दी
है कि दुनिया भर में कई मुस्लिम
, ईसाई योग
को लेकर संदेह जाहिर करते हैं। वे योग को हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़ी एक प्राचीन
आध्यात्मिक साधना के रूप में देखते हैं। साल 2012 में ब्रिटेन में एक योग क्लास को
चर्च ने प्रतिबंधित कर दिया था। कुछ लोगों ने इसकी परिभाषा करते हुई यह बात भी कही
थी कि योग एक हिन्दू आध्यात्मिक साधना है। इन सबके बावजूद 27 सितंबर, 2014 को
प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त
राष्ट्र संघ में अपने
पहले संबोधन के
दौरान

योग की चर्चा की और यह कहा कि 'योग प्राचीन भारतीय परंपरा
एवं संस्कृति की
अमूल्य देन है।
उसका असर दिखाई दिया। करीब तीन महीने बाद ही 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र
महासभा के 193 सदस्यों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव
मंजूर किया। 177 देशों ने सह समर्थक बनकर उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया था। 90
दिनों के भीतर इस प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से पारित किया गया था। पहले
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून, 2015) को सामूहिक
योग में 84 देशों
के प्रतिनिधि शामिल
हुए। इस दिन दुनिया के 192 देशों
के
251
शहरों में योग के
सामूहिक कार्यक्रम आयोजित
हुए, जिनमें 46 मुस्लिम देश भी
थे। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में
कुल मिलाकर दो करोड़
लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया था। इस पर संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की मून ने
कहा था-
'मैं अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मिली भारी सफलता से आश्चर्यचकित हूं। वैसे तो
राष्ट्र संघ कई दिवस आयोजित करता है। लेकिन जिस तरह का उत्साह योग दिवस के लिए
देखने को मिला वह अचंभित करने वाला है।
' बहरहाल, इस संख्या में
निरंतर वृद्धि हो रही है और योग विद्या का फैलाव हो रहा है।



21 जून को
पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र की महासभा समेत दुनिया
के सभी महत्वपूर्ण देशों में लोगों ने सामूहिक रूप से योग का अभ्यास किया। संयुक्त
राष्ट्र महासभा के हॉल में लोगों ने योग का अभ्यास किया। इस अवसर पर संयुक्त
राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि योग की पद्धति
सालाना वैश्विक उत्सव में बदल चुकी है।
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बड़ी संख्या में लोग टेम्स नदी के किनारे इकट्ठा
हुए और
योग किया। वहीं न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का जश्न मनाने के लिए
भारी भीड़ इकट्ठा हुई।
जश्न का आयोजन टाइम्स स्क्वॉयर अलायेंस की ओर से किया
गया था। पिछले साल यहां आयोजित कार्यक्रम में
30,000 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था। विश्व में जिस तरह से योग लगाता लोकप्रिय होता
जा रहा है, उससे लगता है कि विश्व आरोग्य बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।



भारत के पड़ोसी देश नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश से भी लोगों के सामूहिक
योगाभ्यास की खबरें आई हैं। नेपाल में उत्साह देखने बना। सुबह प्रभात फेरी निकाली
गई। उसके बाद योग के कार्यक्रम में भारत के राजदूत मंजीत सिंह पुरी समेत कई
महत्वपूर्ण लोगों ने हिस्सा लिया। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी.शर्मा ओली बतौर
मुख्य अतिथि कार्यक्रम में सिरकत कर रहे थे। उन्होंने योग को प्राचीन संस्कृति का
अनमोल तोहफा बताया। वहीं खाड़ी देशों में भी योग की धूम रही। संयुक्त अरब अमीरात
की राजधानी अबू धाबी में योग का विशेष आयोजन किया गया था। भारतीय दूतावास की ओर से
आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने भाग लिया।
श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने भी योग के एक कार्यक्रम में
हिस्सा लिया और योग जैसी अनमोल विद्या से दुनिया का परिचय कराने के लिए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की। वहीं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में
लोगों ने बढ़-चढ़कर योग में हिस्सा लिया। अब यही कहा जा सकता है कि पूरी दुनिया ने
योग को अरोग्य होने का माध्यम चुना है। इस पथ पर लोगों का कारवां चल पड़ा है।



पांचवां अंतरराष्ट्रीय
योग दिवस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आबा बिरसा मुंडा की धरती पर मनाया। रांची
के प्रभात तारा मैदान में 2,600 बच्चों सहित करीब 40 हजार लोगों ने प्रधानमंत्री
के साथ योग के आसन लगाए। यहीं से प्रधानमंत्री ने मानवता के लिए योग की महत्ता का
संदेश देश-दुनिया को दिया। हल्की फुहार के बीच 45 मिनट तक  मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान
के निदेशक डॉ. ईश्वर
विश्वरेड्डी योग का अभ्यास कराते रहे। इस दौरान लोगों ने 24 तरह के योगासन किए। उसके
बाद प्रधानमंत्री ने 23 मिनट तक लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि
योग
विश्व शांति
, सद्भाव और समृद्धि के लिए है। योग आयु, रंग, जाति, संप्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत और सरहद से परे
है। योग सबका है और सब योग के हैं।

उन्होंने कहा
, मेरी चाहत है कि योग गरीब और आदिवासियों के जीवन का हिस्सा बने। वे स्वस्थ और
संपन्न बनें। आधुनिक युग में योग सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले
गरीब और आदिवासियों तक नहीं पहुंच पाया है। हमें मिलकर योग को उन तक पहुंचाना है
, क्योंकि योग से बीमारी
को दूर रखा जा सकता है। गरीब बीमारी की वजह से कष्ट पाते हैं। हमें यह सुनिश्चित
करना होगा कि योग को उन तक पहुंचा कर हम उन्हें बीमारी के चंगुल से बचाएं। अब हमें
आधुनिक योग की यात्रा शहरों से गांवों की तरफ ले जानी है।
योग के
महत्व की व्याख्या करते हुए
प्रधानमंत्री ने कहा कि
योग का मतलब सिर्फ आसन नहीं होता है। योग तो यम
, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के
संपूर्ण प्रकारों का नाम हैं।






 
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