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बॉम्बे ब्लड ग्रुप की बढ़ी मांग

20/09/2019

बॉम्बे ब्लड ग्रुप की बढ़ी मांग

एक बार फिर बॉम्बे ब्लड ग्रुप (रक्त का एक दुर्लभ प्रकार) की चर्चा है। अस्पतालों में इस ब्लड ग्रुप की मांग बढ़ गई है। जबकि इसकी आपूर्ति दुर्लभ है। इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप की खोज पहली बार वर्ष 1952 में मुंबई (तब बॉम्बे) में डॉ. वाई.एम. भेंडे ने की थी। इसलिए इसे बॉम्बे ब्लड ग्रुप कहते हैं।
सामान्य रूप से चार रक्त समूह अ, इ, अइ और ड हैं। इसमें एंटीजन होता है, जो यह निर्धारित करता है कि वह किस समूह से संबंधित है। जबकि बॉम्बे रक्त समूह, जिसे ऌऌ भी कहा जाता है, एंटीजन ऌ को व्यक्त कर पाने में कमजोर है। जिसका मतबल है कि आरबीसी का कोई एंटीजन एच नहीं है। विश्व स्तर पर चार मिलियन में से किसी एक व्यक्ति में ऌऌ रक्त प्रकार पाया जाता है। वहीं भारत में प्रत्येक 7,600 से 10,000 व्यक्तियों में एक व्यक्ति बॉम्बे ब्लड ग्रुप के साथ पैदा होता है।


 
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