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बजट 2019 : शेयर बाजार में आयी मायूसी, उद्यमियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

05/07/2019

राधेश्याम यादव
मुंबई, 05 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय बजट को लेकर शेयर बाजार की प्रतिक्रिया निराशाजनक रही है। बजट से पहले शेयर बाजार ने 100 अंकों की तेज उछाल हासिल की थी, लेकिन जैसे ही बजट पेश हुआ, कारोबार की समाप्ति पर सेंसेक्स इस सप्ताह के 395 अंकों की सबसे भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। शेयर बाजार का निफ्टी सूचकांक भी 136 अंकों की सबसे तेज गिरावट में बंद हुआ है। हालांकि मुंबई और महाराष्ट्र के कारोबारी जगत की बजट 2019 को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है। गोदरेज समूह के मुखिया आदि गोदरेज ने ट्विट किया है कि बजट ग्रोथ ओरिएंटेड नहीं है, जबकि कई उद्यमियों ने स्टार्टअप व एसएमई सेक्टर पर फोकस किए जाने की पहल का स्वागत किया है। 

निर्यात उद्योग को बढ़ावा देने में चूक 
ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई )  के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि केंद्रीय बजट में निर्यात उद्योग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है। निर्यात क्षेत्र पहले से ही वैश्विक उठा-पटक का शिकार हो रहा है। जून में निर्यात का आंकड़ा नकारात्मक रहा है। इससे विनिर्माण और रोजगार के अवसर में संभावित वृद्धि पर असर पड़ेगा । इसके साथ ही निर्यात उद्योग तरलता की कमी से जूझ रहा है। सरकार ने औद्योगीकरण पर भी जोर नहीं दिया है।  

क्रांतिकारी साबित होगा केंद्रीय बजट
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने कहा है कि केंद्रीय बजट एक क्रांतिकारी बजट साबित होगा। व्यावसायिक समुदाय और एसएमई क्षेत्र को बजट में प्राथमिकता दी गई है। बजट में की गई घोषणाओं को अगर रणनीति बनाकर समय सीमा के साथ बेहतर तरीके से लागू किया जाए, तो निश्चित रूप से भारत को  5 ट्रिलियन डालर वाली अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। देश में 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन ने बताया कि आगामी काल में निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय कारोबार की हिस्सेदारी बढ़ेगी।  

पेट्रोलियम पर अधिभार गलत
केंद्रीय बजट में पेट्रोलियम पर लगाए गए एक रुपये के अधिभार को गलत बताते हुए ऑटो सेक्टर की कंपनी के संचालक आर.एन. यादव ने कहा कि पहले से ही पेट्रोलियम सेक्टर पर उच्च कर का भार है। उस पर बजट में पेट्रोल और डीजल पर 1 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दिए जाने से इस उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।  

बजट ग्रोथ ओरिएंटेड नहीं
गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन आदि गोदरेज ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि बजट ग्रोथ ओरिएंटेड है। बजट के बाद जिस तरह शेयर बाजार का ग्राफ गिरा है, उससे  निराशा हुई है। फरवरी में अंतरिम बजट में भी उन्होंने रियल एस्टेट और फिस्कल डेफिसिट को लेकर सरकार की नीतियों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि बजट विकासोन्मुख होना चाहिए, ढांचागत व बुनियादी सेक्टर पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने  बताया कि बजट को अच्छा व दीर्घकालिक आधार पर विकासोन्मुख बनाए जाने की जरूरत है। कुछ उद्योगों के लिए बजट वास्तव में अच्छा होगा। लेकिन यह कतई विकासपरक नहीं है।  
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण निर्माता संघ (सीईएएमए) के अध्यक्ष ने कहा कि मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। इस बजट से उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में कस्टम ड्यूटी संरचना में जिन संशोधनों की सिफारिश की है, उसका स्वागत होना चाहिए। इसके साथ ही तैयार माल, उपकरण और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के कई क्षेत्रों में घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करने पर सरकार को फोकस करना चाहिए।

लेन-देन के आंकड़ों में आएगी पारदर्शिता
येस सिक्योरिटीज के अमर अंबानी का कहना है कि सरकार ने एक साल में एक करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी पर जो 2 प्रतिशत टीडीएस लगाने का फैसला किया गया है, वह बेहतरीन कदम है। सरकार को डिजीटल अर्थव्यवस्था में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। डिजीटल लेन-देन पर लगने वाले चार्ज को हटाकर और हर साल एक करोड़ से ज्यादा की रकम निकालने वाली कंपनियों पर सरचार्ज लगाने से डिजीटल अर्थव्यवस्था को धक्का लगेगा और डिजीटल अर्थव्यवस्था को गति देने में और लेन-देन के आंकड़ों में अधिक पारदर्शिता आएगी।  

जीएसटी अनुपालन को सरल बनाना जरूरी
अकाउंटेंसी की कंपनी चलाने वाले राकेश पांडे ने कहा कि ई-टैक्स का आकलन करते समय करदाताओं को कर विभाग की ओर से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। डिजीटल मोड पर इलेक्ट्रॉनिक कर निर्धारण की योजना जल्द ही शुरू की जानी चाहिए। इससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी। इस बजट में जीएसटी परिषद की ओऱ से एकल रिटर्न, स्वचालित रिफंड तंत्र, केंद्रीकृत ई-चालान व ई-इन्वाइसिंग को बेहतर करने की सिफारिश की गई है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। ई-वे बिल्स की समाप्ति करने के फैसले के बाद उसका अनुपालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा, जिससे राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। जीएसटी अनुपालन को सरल बनाने के कदमों को इस बजट में दोहराया गया है। इसी तरह, सीमा शुल्क में कमी और कच्चे माल और पूंजीगत वस्तुओं पर सीमा शुल्क में वृद्धि का जो फैसला लिया गया है, उससे "मेक इन इंडिया" पहल को भी प्रोत्साहन मिलेगा।   

लिक्विडिटी की कमी से जूझ रहा है एमएसएमई सेक्टर
उद्योग सेक्टर की कई हस्तियों ने भी कहा है कि हालांकि सरकार ने बजट में  बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दी गयी है। हालांकि यह देखने की जरूरत है कि बजट के लागू होने के बाद इस सेक्टर की लागत पर क्या असर पड़ता है। एमएसएमई क्षेत्र की कंपनियों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। हालांकि सरकार ने इस सेक्टर को भी बूस्ट करने पर फोकस किया है। पिछले कुछ साल से एमएसएमई सेक्टर लिक्विडिटी की कमी से जूझ रहा है। बैंकों से कर्ज लेने में भी परेशानी आ रही है। भारत में एमएसएमई सेक्टर में मांग और ऋण आपूर्ति के बीच का अंतर को आसानी से नहीं पाटा जा सकता। सरकार को ठोस उपाय करना चाहिए। बजट में फिलहाल एक करोड़ छोटे कारोबारियों को राहत दी गयी है। एकल पोर्टल के माध्यम से ऋण की सुलभता आसान हो जाएगी। 

एंजेल टैक्स खत्म, मांगें मानी गई
यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर भास्कर मजूमदार ने बताया कि यह बजट स्टार्टअप समुदाय के लिए एक अच्छा बजट साबित होगा। वित्त मंत्री ने एंजेल टैक्स को खत्म करने की घोषणा की है। इस उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग थी और हम इस कदम का स्वागत करते हैं। एंजेल टैक्स के अलावा, टीयर 2 और 3 शहरों में एएसपीआईआरई (ASPIRE) इन्क्यूबेटरों को लॉन्च कर वहां उद्यमशीलता का व्यापक आधार तैयार किया जा रहा है। टियर 2 और 3 शहरों पर भारत नेट फोकस डिजीटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। हालांकि सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज पर ध्यान नहीं दिया गया है। इसके माध्यम से सोशल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय उद्यमी धन जुटाने में सक्षम होंगे और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है।  

स्टार्टअप और एसएमई क्षेत्र पर फोकस 
सीक्वेटक के सह-संस्थापक व सीईओ आनंद नाइक ने बताया कि वास्तव में स्टार्टअप और एसएमई क्षेत्र पर इस सरकार ने फोकस रखा है। इसकी सराहना की जानी चाहिए। इस बजट में स्टार्टअप पहल बहुत उत्साहजनक है और भारत में इससे नवाचार के माहौल को बढ़ावा मिलेगा । एंजेल टैक्स के लिए लेखांकन में आसानी, इन्क्यूबेटरों और कैशलेस लेनदेन के लिए शुल्क हटाने से अधिक स्टार्टअप बनाने और इस क्षेत्र में रोजगार पैदा करने में भी मदद मिलेगी। यह बहुत ही सकारात्मक कदम है। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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