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सियासत का शातिराना अंदाज

17/02/2020

सियासत का शातिराना अंदाज

आर. के. सिन्हा

पिल गुर्जर का सच अब सबके सामने है। वही कपिल जिसने राजधानी के शाहीन बाग में गोली चलाकर तहलका मचा दिया था। दिल्ली पुलिस ने अपनी सघन जांच के बाद दावा किया है कि कपिल और उसके पिता का सम्बन्ध अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) से रहा है। पुलिस की जांच से यह भी पता चला है कि कपिल आप की सभाओं में आता-जाता था। उसके आप के नेताओं के साथ फोटो भी सामने आ चुके हैं। हालांकि कपिल के परिवार ने उसके आप से संबंधों पर सवाल तो खड़े किए पर वे तब चुप हो गए जब उन्हें कपिल की आप नेताओं के साथ फोटो दिखाई गई। अब कहा जा रहा है कि कपिल अपने पिता के साथ आप के कार्यालय में गया था तो आप के एक सांसद महोदय ने उसे टोपी पहना दी लेकिन वह आप का सदस्य नहीं है। कपिल के शाहीन बाग में फायरिंग करने से केजरीवाल का एक बार फिर से चेहरा बेनकाब हो गया है। अब सबको समझ आ रहा है कि उनके साथ किस तरह के उपद्रवी तत्व जुड़े हुए हैं। कुछ साल पहले केजरीवाल पर एक इंसान ने स्याही फेंकी थी। बाद में पता चला था कि स्याही फेंकने वाला शख्स भी दरअसल आप का ही कार्यकर्ता था।

शाहीन बाग में हवाई फायरिंग कर देश में बस हिंदुओं की चलेगी कहने वाले कपिल गुर्जर की जन्मकुंडली खंगालने पर यह भी केजरीवाल का ही आदमी निकला। इसका अर्थ है कि हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश बहुत गहरी है।

मुमकिन है, केजरीवाल ने उस सारे मामले को इसलिए करवाया हो ताकि उन्हें दिल्ली की जनता की सहानुभूति मिल सके। अब चूंकि दिल्ली विधान सभा चुनाव में उन्हें अपनी कुर्सी हिलती दिखाई दे रही थी, इसलिए केजरीवाल ने एक बार फिर से अपने पक्ष में यह ड्रामा करवाया हो। उल्लेखनीय है कि केजरीवाल की सारी सियासत ही झूठ और फरेब पर आधारित लगती है। केजरीवाल ने दिल्ली के अनाधिकृत कालोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को पूरे पांच साल तबीयत से छला। केजरीवाल सीना ठोंक कर सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किए जाने का दावा कर रहे थे पर किया कुछ नहीं। लेकिन, जब मोदी सरकार ने इन कॉलोनियों को नियमित कर दिया तो वे कहने लगे हैं कि खेती की जमीन पर रजिस्ट्री कैसे होगी? उन्होंने इन कॉलोनियों को शायद कभी देखा तक नहीं। कभी आप संगम विहार, अल्लाह कॉलोनी महिपालपुर बांध या चंदर विहार आदि का दौरा कर लें। तब आपको पता लगेगा कि केजरीवाल सरकार ने लाखों गरीब लोगों के हित में कुछ नहीं किया। दिल्ली में चुनावों की घोषणा से पहले वे ढेरों योजनाएं शुरू करते रहे। चाहे वह बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा कराना हो, महिलाओं को दिल्ली परिवहन निगम की बसों में मुμत यात्रा कराना हो या 5000 बसों के बदले 102 बसों को हरी झंडी दिखाना हो। वे विद्यार्थियों को मुμत बस यात्रा का वायदा भी करते रहे।

बेशक सभी राजनेता अपने मतदाताओं से तमाम वादे करते ही हैं। फिर सत्ता में आने के बाद वे उन वादों को पूरा करने की चेष्टा भी करते हैं। पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तो सिर्फ वादे ही वादे करते हैं। अपनी सरकार का नेतृत्व करते हुए वे साढ़े चार सालों के दौरान कहते रहे कि उन्हें केन्द्र सरकार कुछ भी काम नहीं करने दे रही है। पर चुनाव से पहले के छह महीनों में वे दावे करने लगे कि उन्होंने उन सारे कामों को कर दिया जो उन्होंने दिल्ली की जनता के साथ किए थे। सच्ची बात तो यह है कि वे देश के सबसे ज्यादा झूठ बोलने वाले नेताओं की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। केजरीवाल ने मुμत बिजली देने के नाम पर एक बहुत खराब परंपरा शुरू कर दी है। वे 200 यूनिट बिजली उन दिल्ली वालों की भी माफ कर चुके हैं, जो करोड़पति हैं। यानी दिल्ली की पॉश कॉलोनियों में रहने वालों को भी वे पंजीरी बांट रहे हैं। हालांकि उनमें से अधिकांश इस सुविधा को लेना भी नहीं चाहते। उन्होंने औरतों को डीटीसी की बसों में टिकट से माफी दे दी है। वे कह चुके हैं कि दिल्ली मेट्रो रेल में भी औरतों को भविष्य में किराया नहीं देना होगा।

देश के सबसे ज्यादा झूठ बोलने वाले नेताओं की श्रेणी में शामिल हो चुके केजरीवाल ने देश की राजनीति को पतित करने के सिवाय कुछ भी नहीं किया है।

चूंकि डीटीसी तो पूरी तरह से दिल्ली सरकार के अंतर्गत चलती है, इसलिए केजरीवाल के फैसले पर पर्याप्त हंगामा नहीं हुआ। लेकिन दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को मुμत में सफर की सुविधा देने का कसकर विरोध हुआ। यह बात समझ से परे है कि उन्होंने औरतों को डीटीसी और दिल्ली मेट्रो में मुμत सफर का वादा किस आधार पर किया? इसकी जरूरत ही क्या थी? क्या उनसे किसी महिला संगठन ने मांग की थी कि महिलाओं से डीटीसी और मेट्रो में किराया ना लिया जाए? अब देश के बहुत से शहरों में मेट्रो रेल चलने लगी है। पर जितनी बेहतर तरीके से दिल्ली मेट्रो का कामकाज है, उतना किसी का नहीं है। इसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मेट्रो रेल में से एक माना जाता है। यूरोप के देशों के नागरिक भी कहते हैं कि दिल्ली मेट्रो उनके देश की मेट्रो रेल से उन्नीस नहीं है। केजरीवाल माने या न मानें, पर दिल्ली मेट्रो को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनका कोई रोल नहीं रहा है। वे जब दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए तब तक तो दिल्ली मेट्रो ने अपना काफी लंबा सफर पूरा कर लिया था। दिल्ली मेट्रो को खड़ा करने में उसके हजारों छोटे-बड़े कर्मियों ने दिन-रात एक की है। अब केजरीवाल दिल्ली मेट्रो को तबाह करना चाह रहे हैं।

केजरीवाल से अपेक्षा थी कि दिल्ली में पेयजल की समस्या से जनता को निजात दिलवा देंगे। अभी दिल्ली में लाखों लोगों के पास टैंकरों से पानी आता है। दिल्ली की सैकड़ों बस्तियों में सुबह के वक्त पानी को लेकर महाभारत होता है। इस तरफ तो उन्होंने कुछ नहीं किया। वे आरोप लगाकर माफी मांगने में भी नंबर वन हैं। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया से लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, स्वर्गीय अरुण जेटली और कपिल सिब्बल एवं उनके पुत्र अमित सिब्बल से भी माफी मांगी है। केजरीवाल ने अपने माफीनामों में अपने द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए उनसे माफी मांगी। केजरीवाल द्वारा लगाए गए ज्यादातर आरोप झूठे ही हैं, कम से कम नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल और विक्रम मजीठिया पर सारे आरोप बेबुनियाद ही हैं, ऐसा केजरीवाल ने लिखित हलफनामें में माना। केजरीवाल की राजनैतिक बुनियाद ही आरोप-प्रत्यारोप पर ही आधारित रही है। एक समय केजरीवाल कहते थे कि उनके पास शीला दीक्षित के भ्रष्टाचार से जुड़े तमाम साक्ष्य हैं, और सरकार बनाते ही वे शीला दीक्षित को जेल भेज देंगे। हालांकि वह आज तक एक भी आरोप को साबित नहीं कर पाये। सच में उन्होंने देश की राजनीति को पतित करने के सिवाय कुछ भी नहीं किया है।


 
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