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वाराणसी आकर मॉरीशस के प्रवासी भारतीयों ने बाबा के दरबार और संकटमोचन में लगाई हाजिरी

07/11/2019

- संगीतमय रामायण से मॉरीशस में सनातन संस्कृति की अलख जगा रहे प्रवासी भारतीय 

- अस्सी घाट पर देंगे संगीतमय प्रस्तुति 

श्रीधर त्रिपाठी
वाराणसी, 07 नवम्बर (हि.स.)। हिंद महासागर की गोद में बसे छोटे-से देश मॉरीशस में सनातन संस्कृति की सुगन्ध चहुंओर फैली हुई है। इस सुगन्ध को फैलाने के साथ पूर्वजों की संस्कृति को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक पूरी पीढ़ी लगातार प्रयास कर रही है। इसमें युवाओं के बीच संगीतमय रामायण के जरिये सनातनी संस्कृति की बीज रोपने वाली संस्था ह्यूमन सर्विस ट्रस्ट के अगुवाई में संगीतमय रामायण का पाठ, रामलीला की पारम्परिक प्रस्तुति अहम भूमिका निभा रहा है।

ट्रस्ट की अगुवाई में अपने पूर्वजों की धरती पर आये मॉरीशस के भारतवंशी धर्म नगरी काशी की गंगा घाट के किनारे नैसर्गिक आध्यात्मिक छटा, अलमस्त सुबह और हसीन शाम, मंदिरों के घंटियों की टंकार से अभिभूत दिखे। 

बनारस भ्रमण पर आये दल ने गुरुवार को हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि से बातचीत में बताया कि बाबा विश्वनाथ और श्री संकट मोचन दरबार में दर्शन करने पर अलौकिक अनुभव हुआ। ट्रस्ट से जुड़े प्रकाश बहादुर ने बताया कि 1967 में संस्था की स्थापना स्वामी कृष्ण नारायण ने किया था।

मॉरीशस की आजादी के तुरन्त बाद संस्था ने 40 युवाओं की टीम बनायी गई। टीम को प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें भारत वंशियों को अपने पूर्वजों की सनातनी संस्कृति को बताने और संस्कार से गहरे जुड़ाव के लिए कार्य पर लगाया गया। टीम ने देश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने के साथ अर्थव्यवस्था में सहयोग देने और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षण देने के लिए कार्य शुरू कर दिया। युवा पीढ़ी को पूर्वजों के मानवीय मूल्य और आदर्श से परिचय कराने के लिए संगीतमय रामायण शुरू किया गया। संस्था ने भारत के जीवन मूल्यों को युवकों को बताने के लिए समय-समय पर अपना सांस्कृतिक और शैक्षणिक दल भी भारत भेजा। आज संगीतमय रामायण से सनातनी भारतवंशियों में एकता का प्रवाह दौड़ रहा है।

संगीतमय रामायण दल में शामिल सूर्यदेव, वंदना, शान्ता, तारा, रीटा भगवान राम के जीवन चरित्र से बेहद प्रभावित है। 

दल के सदस्यों ने बताया कि अपने देश में पिछले कई वर्षों से संगीत की धुनों पर रामायण की चौपाइयों को गाते हैं। काशी में अस्सीघाट के सुबह ए बनारस के मंच पर शाम को बालकांड पर आधारित पदों की प्रस्तुति करेंगे। उन्होंने बताया कि मॉरीशस के कालबास में संस्था से जुड़े लोग लगभग तीन घंटे नियमित संगीतमय रामायण में भाग लेते हैं। यहां संस्था के सांस्कृतिक भवन में पूरा आयोजन होता है।

गौरतलब हो कि मॉरीशस के आम आदमी से लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी अपने पुरखों की जन्मभूमि पर आकर भाव विहृवल हो जाते हैं। वर्ष 2013 में मॉरीशस के तत्कालीन राष्ट्रपति राजकेश्वर पुरयाग जब बिहार आये तो पूर्वजों की धरती देख फफक-फफक कर रो पड़े थे। पिछले वर्ष मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविन्द जगन्नाथ ने अपने पैतृक गांव को तलाशने के लिए भारत में मौजूद मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश्वर गोवर्धन को बलिया जिले में भेजा था। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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