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कारवां में बदलता योग

01/07/2019

कारवां में बदलता योग


बद्रीनाथ वर्मा

विश्व योग दिवस के जरिए भारतीय अध्यात्म, ज्ञान, दर्शन, परंपरा और संस्कृति का अगर पूरी दुनिया ने लोहा माना है तो इसके पीछे मूल वजह यह है कि योग अति सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित वैदिक पद्धति है। यह न केवल शरीर को व्याधियों से मुक्त करता है बल्कि मन के विकारों को भी दूर करता है।

5 वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लोगों में जिस प्रकार का उत्साह देखा गया, उससे यह कहना उचित होगा कि योग का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। रांची के प्रभात तारा मैदान में जहां पीएम मोदी ने 40 हजार लोगों के साथ एक घंटे पांच मिनट तक योग किया। वहीं देश के अन्य हिस्सों में केंद्र व राज्य के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों से लेकर आम जनता ने योग कर इसे जनांदोलन का रूप दे दिया। जल, थल, नभ से लेकर बर्फीली चोटियों पर भी योग ने अपना परचम फहराया। सरकारी व प्राइवेट दμतरों में भी योग दिवस को उत्सव की तरह मनाया गया। योग करने के बाद पीएम मोदी ने स्वीकार किया कि योग हमेशा से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। बहरहाल, श्रीमद्भगवद्गीता के 9वें अध्याय के 22वें श्लोक में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने कहा है-अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।। 

आदिगुरु शंकराचार्य ने योगक्षेमं को परिभाषित करते हुए कहा है कि अप्राप्त वस्तु की प्राप्ति का नाम योग है और प्राप्त वस्तु की रक्षा का नाम क्षेम है। दोनों का ही संबंध हमारे शरीर से ही है। कहा भी गया है पहला सुख निरोगी काया। उपनिषदों में भी कहा गया है शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्। अर्थात शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का साधन है। इसलिए शरीर को स्वस्थ बनाए रखना सबसे जरूरी है। इसी के होने से सभी का होना है। अत: शरीर की रक्षा और उसे निरोगी रखना मनुष्य का सर्वप्रथम कर्तव्य है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है। स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मन के लिए योग से बढ़कर कुछ भी नहीं। नियमित योग से न केवल कार्य क्षमता बढ़ती है बल्कि रोगों से भी मुक्ति मिलती है। एक दौर था जब योग को गूढ़ विषय माना जाता था।

आज हमारे योग को दुनिया अपना रही है तो हमें योग से जुड़ी रिसर्च पर भी जोर देना होगा। इसके लिए जरूरी है कि हम योग को किसी दायरे में बांध कर ना रखें। योग को मेडिकल, फिजियोथैरपी, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, इनसे भी जोड़ना होगा। लोग अपने योग के ज्ञान को फोन के सॉμटवेयर की तरह अपडेट करें। -नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

माना जाता था कि यह भौतिक नहीं, आध्यात्मिक क्रिया है, जो साधु संन्यासियों के लिए है। जन सामान्य में इसे लेकर ढेर सारी भ्रांतियां थीं। लेकिन बदलते समय के साथ योग को लेकर बनी भ्रांतियां पूरी तरह से टूट गई हैं। इन भ्रांतियों को तोड़ने में योग गुरु बाबा रामदेव की बड़ी भूमिका है। उन्होंने योग को देश के घर-घर व जन-जन तक पहुंचाया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वैश्विक फलक दे दिया। इसी का नतीजा है कि शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य के अद्भुत विज्ञान योग के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। न केवल भारत, बल्कि पूरा विश्व 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाता है। विश्व योग दिवस का यह पांचवां सोपान है।

पीएम की योगयात्रा का पांचवां पड़ाव रांची

21 जून को रांची के प्रभात तारा मैदान में 50 हजार लोगों के साथ पीएम मोदी ने योग किया। प्रधानमंत्री मोदी का योग को लेकर रांची पांचवा पड़ाव है। विश्व योग दिवस की शुरुआत के बाद से ही पीएम ने मानो एक परंपरा ही बना डाली है। विश्व योग दिवस पर वह हर साल योग करने के लिए किसी न किसी नये शहर को ठिकाना बनाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए उन्होंने इस बार रांची को चुना। इसके पहले साल 2018 में चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पीएम मोदी ने देहरादून में 50 हजार लोगों के साथ योग किया। इसके पूर्व 55 हजार लोगों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर पार्क में बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच बैठकर तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 2017 में योग किया था। इसी तरह 2016 में दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य आयोजन चंडीगढ़ में किया गया था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 35 हजार लोगों के साथ योग किया। इस दौरान उनके कई योगासन काफी चर्चित हुए थे। पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तो बात ही निराली है। 21 जून 2015 को जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजपथ पर हुआ तो एक ही दिन दो विश्व रिकॅर्ड बने। गिनीज बुक में दर्ज इन दोनों रिकॉर्ड में पहला था सबसे बड़ी योग कक्षा के लिए। इस योग कक्षा में 35, 985 लोग शामिल थे। दूसरा रिकार्ड इस आयोजन में सबसे ज्यादा देशों (84 राष्ट्र) के भाग लेने को लेकर था।

विश्व योग दिवस के जरिए भारतीय अध्यात्म, ज्ञान, दर्शन, परंपरा और संस्कृति को नई पहचान मिली है। दुनिया ने पहली बार 21 जून 2015 को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस पर मुहर लगाई थी। दरअसल, पीएम मोदी ने 27 सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए योग के महत्व पर चर्चा की थी। पीएम के इस आह्वान के बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। यूं तो योग से अपना नाता जोड़ने के लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं है। मगर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाये जाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है। दरअसल, इस दिन सूर्योदय जल्दी होता है और सबसे देर में सूर्यास्त होता है। यानी, उत्तरी गोलार्ध में साल का यह सबसे लंबा दिन होता है। सच कहें तो योग विश्व का सबसे प्राचीन विज्ञान है, जिसका सृजन भारतभूमि पर हुआ। योग का सरल अर्थ है जोड़ना। शरीर का मन से जुड़ना।

पहले योग दिवस पर दो वैश्विक रिकॉर्ड योग का पहला अंतरराष्ट्रीय दिवस 21 जून, 2015 को भारत समेत पूरी दुनिया में मनाया गया था। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 35, 985 लोगों और 84 देशों के गणमान्य व्यक्तियों ने एक साथ दिल्ली के राजपथ पर 21 योग मुद्राओं को 35 मिनट तक किया। राजपथ पर हुए इस आयोजन ने एक साथ दो गिनीज विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए थे। पहला था एक सबसे बड़ी योग कक्षा के लिए, जिसमें 35, 985 लोग शामिल थे और दूसरा इस आयोजन में सबसे ज्यादा देशों (84 राष्ट्र) ने भाग लिया था।

योग मूलत: वह वैदिक पद्धति है जो अति सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित है। यह मन एवं शरीर के बीच सामंजस्य एवं एकरूपता लाने की विधि है। महर्षि पतंजलि ने पहली बार योग को व्यवस्थित एवं सुचारू ढंग से 196 योग सूत्रों द्वारा इसे क्रमबद्ध किया। इन सूत्रों की विशेष बात यह है कि हरेक सूत्र अगले सूत्र के लिए सीढ़ी का काम करते हैं। यही नहीं, प्रत्येक सूत्र अपने आप में न्यायसिद्ध है। पतंजलि ने अपने भाष्य में योग को आठ अंगों में बांटा।

योग सबका, सब लोग योग के: पीएम
रांची के प्रभात तारा मैदान में 40 हजार लोगों के साथ योग करने के बाद पीएम मोदी ने इससे होने वाले लाभ को बताते हुए लोगों का आह्वान किया कि योग हमेशा से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है, इसके प्रसार के लिये हमें साथ आना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि योग सबका है और सब लोग योग के हैं। योग अमीरी गरीबी से परे है। साथ ही पीएम ने यह भी कहा कि योग सिर्फ तभी नहीं होता जब हम आधा घंटा जमीन या मेट पर होते हैं। योग का अनुशासन और पालन पूरे जीवनभर करना होता है। योग, धर्म, जाति, संप्रदाय, अमीरी-गरीबी से परे है। उन्होंने इस बात
पर प्रसन्नता व्यक्त की कि योग के प्रति लोगों में काफी जागरूकता बढ़ी है।

यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि। इसे ही अष्टांग योग कहते हैं। बहरहाल, योग को भले ही विश्व ने योग दिवस के रूप में पांच साल पहले वैश्विक मान्यता प्रदान की। लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने व अध्यात्म के शिखर तक पहुंचने के लिए योग हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। संसार के प्रथम ग्रंथ ऋग्वेद में कई स्थानों पर यौगिक क्रियाओं के विषय में उल्लेख मिलता है। गीता में भी योगेश्वर कृष्ण के द्वारा बार-बार योग का उल्लेख हुआ है।

अष्टांग योग यानी योग के आठअंग 
महर्षि पतंजलि ने योग को आठ अंगों में बांटा। यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि। इन आठ अंगों के उप अंग भी हैं।

यम
कायिक, वाचिक और मानसिक शुद्धि के लिए सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह व ब्रह्मचर्य का पालन करना।

नियम 
अनुशासित, सुव्यवस्थित व संयमित जीवन जीने के लिए शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय तथा प्राणीधान का पालन करना बेहद जरूरी है।

आसन 
सही अवस्था में बैठकर योग की क्रियाओं को संपादित करना योग साधना में आगे बढ़ने की अनिवार्य शर्त है।

प्राणायाम 
नाड़ी शोधन के लिए श्वांस के जरिए सही पद्धित के साथ प्राण वायु को ग्रहण करने व विसर्जित करने की समुचित प्रक्रिया या जीवन शक्ति यानी प्राण ऊर्जा को नियंत्रित करने की साधना।

प्रत्याहार 
इंद्रियां बड़ी चंचल होती हैं। बहिर्मुखी इंद्रियों को अंतर्मन की ओर दिशा देना यानी मन को भटकने से रोकने के लिए जरूरी।

धारणा 
चित्त को एकाग्र कर केंद्रित कर लेने की प्रक्रिया।

ध्यान 
जब चित्त में केवल और केवल ध्येय का ही विचार रह जाये।

समाधि 
योग का अंतिम पड़ाव। चित्त की वह अवस्था जिसमें चित्त अभिष्ठ के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाये। योग दर्शन में समाधि के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति को संभव माना गया है।

इस आधार पर कहा जा सकता है कि योग कम से कम पांच हजार वर्षों से भारतीय संस्कृति में रच बसकर इसे पुष्पित पल्लवित करता आ रहा है। योग साधना की इस मंदाकिनी से आज समूचा विश्व आप्लावित हो रहा है। योग को अपनाकर लोगों ने कई असाध्य समझी जाने वाली बीमारियों को परास्त किया है। इस तरह के सैकड़ों उदाहरण हैं कि डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर लिये थे लेकिन योग व प्राणायम की बदौलत लोगों ने न केवल उन रोगों पर विजय पाई बल्कि आज स्वस्थ जीवन जी भी रहे हैं।

योग स्थल की सुविधाएं

 400 अस्थायी शौचालय की व्यवस्था
 200 से ज्यादा पेयजल प्वाइंट्स
 100 के लगभग पानी के टैंकर
 8 मेडिकल रिस्पांस टीम
 21 एंबुलेंस की तैनाती
 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे
 28 डिस्प्ले स्क्रीन
 6-7 डीएफएमजी हर चेकिंग प्वाइंट पर
 योग स्थल तक पहुंचने के लिए फ्री बस सेवा

ऐसे में यह कहना समीचीन होगा कि हम अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाकर न केवल अपना, परिवार का बल्कि देश का भी भला करेंगे। विश्व योग दिवस की सार्थकता भी इसी बात में है कि लोगों का जीवन योगमय हो। इसी से युग की धारा को बदला जा सकता है। गीता में लिखा भी है-योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है।


 
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