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पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सहित मंत्री-विधायकों का भत्ता बढ़ा

24/08/2019

ओम प्रकाश सिंह
- विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल ने दी मंजूरी
कोलकाता, 24 अगस्त (हि.स.) । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का दैनिक भत्ता बढ़ाने वाले विधेयक को राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने शनिवार को मंजूरी दे दी। यह विधेयक पिछले महीने विधानसभा ने पारित कर दिया था। 
राजभवन की विज्ञप्ति के मुताबिक राज्यपाल की मंजूरी के बाद जनप्रतिनिधियों का दैनिक भत्ता दो हजार से बढ़कर तीन हजार हो जाएगा। मंत्री और विधायकों के वेतन-भत्ते से संबंधित दो विधेयक पारित किए गए थे। इसमें 'दी वेस्ट बेंगाल सैलरिज एंड एलावेंस (अमेंडमेंट) बिल 2019' और 'दी वेस्ट बेंगाल लेजिसलेटिव मेंबर्स एलावेंस (अमेंडमेंट) बिल 2019' शामिल हैं। पहले विधेयक को राज्यपाल ने शनिवार को मंजूरी दी है, जबकि दूसरे विधेयक पर नौ अगस्त को ही मंजूरी दे दी थी। 'दी वेस्ट बेंगाल सैलरिज एंड एलावेंस (अमेंडमेंट) बिल 2019' को 11 जुलाई को विधानसभा ने पारित किया था। 
पहले मंत्रियों का दैनिक भत्ता 2000 रुपये था, जो बढ़कर 3000 रुपये हो गया है। विधायकों का दैनिक भत्ता 1000 रुपये था, जो बढ़कर 2000 रुपये हो गया है। हालांकि विधायकों को दैनिक भत्ता देने के लिए शर्त रखी गई है। शर्त यह है कि विधानसभा की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में विधायकों को मौजूद रहना होगा। प्रति महीने कम से कम दो बार स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होती है। इसमें अगर विधायक उपस्थित नहीं रहते हैं तो उनके दैनिक भत्ते में कटौती की जाएगी।
मुख्यमंत्री का वेतन-भत्ता बढ़कर 1.17 लाख रुपये हो गया है। मुख्यमंत्री को वेतन के तौर पर 27,001 रुपये मिलते हैं, जबकि भत्ते के तौर पर 3000 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं। इसी तरह मंत्रियों का वेतन-भत्ता बढ़कर अब 1.12 लाख रुपये हो गया है। राज्य मंत्रियों का वेतन-भत्ता अब एक लाख 11 हजार 900 रुपये हो गया है, जिसमें 21,900 रुपये वेतन और 90 हजार रुपये भत्ता शामिल है। विधायकों को 21,870 रुपये मासिक वेतन मिलता है। उन्हें भत्ते के तौर पर 60 हजार रुपये मिलेंगे। यानी उनका कुल वेतन-भत्ता बढ़कर 81,870 रुपये हो गया है।
यूनिवर्सिटी लॉ को भी मिली मंजूरी 
मंत्रियों का भत्ता बढ़ाने संबंधी कानूनी संशोधन को हरी झंडी देने के साथ ही राज्यपाल ने "दी वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी लॉ (संशोधित) 2019़" को भी मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल 70 साल की उम्र तक दो-दो साल बढ़ाया जा सकेगा। 
हिन्दुस्थान समाचार


 
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