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वित्तीय समावेशन समय की मांग

20/09/2019

वित्तीय समावेशन समय की मांग


वित्तीय समावेशन का अभाव समाज एवं व्यक्ति दोनों के लिए हानिकारक होता है। बैंकिंग सुविधा से वंचित लोग साहूकारी के मकड़जाल में फंसने के लिए बाध्य हो जाते हैं।

भारत को 5 ट्रिलियन वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए वित्तीय समावेशन वरदान साबित हो सकता है। बशर्ते कि योजना के अनुरूप ईमानदारी से वित्तीय लेनदेन से कटे कमजोर व गरीब लोगों को इससे जोड़ा जा सके। इस मकसद को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सीएसआर रिसर्च फांउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन हाल ही में देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में किया गया। संगोष्ठी का विषय वित्तीय समावेश-ए वे टू पीपुल प्लानेट एंड प्रॉस्पेरिटी रखा गया था। सेमिनार को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहां विकास को बढ़ावा देने समेत देश के कई भागों में बाढ़ की वजह से बेघर हुए लाखों लोगों के पुनर्वास में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बैंक एजेंसियां, सीएसआर व अन्य वित्तीय संस्थानों का सार्थक प्रयास कारगर साबित हो सकता है। इससे सरकार वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सकती है।
रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के निदेशक सतीश काशीनाथ ने कहा कि क्रेडिट, डिपॉजिट, इंश्योरेंस, रेमिटेंस और पेंशन जैसे विभिन्न आयामों के जरिए आम आदमी का उत्थान कर भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। आगामी वर्षों में इसका लाभ आम लोगों के साथ देश की अर्थव्यवस्था को मिलना तय है। वहीं, सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन सी.ए. दीनदयाल अग्रवाल ने वित्तीय साक्षरता पर जोर देते हुए कहा कि इसके माध्यम से एक अनपढ़ व्यक्ति भी व्यापार कर सकता है। इसके लिए लक्षित समूहों को वित्तीय रूप से जागरूक करना होगा।
भारत विकास परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन का कहना था कि वित्तीय समावेश अंत्योदय का ही पर्याय है। आर्थिक दृष्टि से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को सामाजिक आर्थिक सुरक्षा देकर ही अर्थव्यवस्था को मजबूत करना संभव हो पाएगा। वहीं एसबीआई के महाप्रबंधक अनंत नारायण ने सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि बैंकिंग पार्टनर के रूप में स्टेट बैंक आॅफ इंडिया का वंचित समाज को देश की मुख्यधारा में लाने के लिए किया जा रहा प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।

क्या है वित्तीय समावेशन
कम आय वाले लोग और समाज के वंचित वर्ग को कम से कम कीमत पर भुगतान, बचत, क्रेडिट आदि सहित वित्तीय सेवाएं पहुंचाने का प्रयास वित्तीय समावेशन है। इसे समावेशी वित्तपोषण भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन प्रतिबंधों को दूर करना है जो वित्तीय क्षेत्र में भाग लेने से लोगों को बाहर रखते हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के लगभग 2 अरब लोग औपचारिक वित्तीय सेवाओं का उपयोग नहीं करते हैं। सर्वाधिक गरीब परिवारों में 50 प्रतिशत से अधिक व्यस्क बैंक रहित हैं। यही कारण है कि ऐसे लोगों को वित्तीय समावेशन के तहत डिजिटली साक्षर करने की आवश्यकता है।

वित्तीय समावेशन के लाभ
सीएसआर रिसर्च फाउण्डेशन के चेयरमैन दीनदयाल अग्रवाल के मुताबिक इस तरह के सेमिनारों से जहां एक ओर समाज के कमजोर तबके को उनकी जरूरतों तथा भविष्य की आवश्यकताओं के लिए धन की बचत करने, विभिन्न वित्तीय उत्पादों जैसे बैंकिंग सेवाओं, बीमा और पेंशन आदि के उपयोग से देश के आर्थिक क्रियाकलापों से लाभ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। वहीं देश को पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि करने में भी सहायता प्राप्त होती है। जबकि वित्तीय समावेशन का अभाव समाज एवं व्यक्ति दोनों के लिए हानिकारक होता है। इसके अभाव में बैंकिंग सुविधा से वंचित लोग अनौपचारिक बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। जहां ब्याज दरें अधिक होती हैं और प्राप्त होने वाली राशि काफी कम होती है। ऐसी स्थिति में उधार देने वालों और उधार लेने वालों के बीच उत्पन्न किसी भी विवाद का कानूनन निपटान संभव नहीं हो पाता।


 
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