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माया के आनंद पर शिकंजा

30/07/2019

माया के आनंद पर शिकंजा

 राम जी तिवारी

मायावती के भाई आनंद कुमार लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे। अनेक मामलों में अवैध तरीके से उनकी संलिप्तता को लेकर जांच जारी थी। इसी का परिणाम नोएडा में चार सौ करोड़ की बेनामी संपत्ति की जब्ती है।

‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर स्थापित बहुजन समाज पार्टी (बसपा) इस नीति और सिद्धांत से भटक कर सर्वजन हिताय की जगह ‘स्वजन सुखाय’ के रास्ते पर निकल पड़ी है। कभी दलितों और गरीबों के हक की आवाज बनीं मायावती आज अपने कुनबे की आवाज बनकर स्वजन को बचाने की जंग लड़ रही हैं। बहन कुमारी मायावती अपनी राजनतीकि शक्ति के प्रयोग परिवार की तरक्की के लिए करती रही हैं। इसका जरा सा भी एहसास उनके समर्थकों को नहीं था। यहां इस बात का जिक्र इसलिए जरूरी है क्योंकि आयकर विभाग ने मायावती के भाई आनंद कुमार की नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपये की कीमत की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली है।
दिल्ली के पास नोएडा में जमीन का यह भूखंड, जिसकी वर्तमान में मार्केट वैल्यू 400 करोड़ रुपये है। एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि सात एकड़ का भूखंड मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्रलता के लाभदायक स्वामित्व में था। आयकर विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई ने इस भूखंड को जब्त करने का आदेश जारी किया था। यह भूखंड उन्होंने फर्जी कंपनियों के जरिए नोएडा सेक्टर-92 में खरीदा था। जांच में पता चला कि 7 एकड़ की जमीन विजन टाउन प्लानर्स लिमिटेड के नाम से 400 करोड़ में खरीदी गई। इतनी बड़ी रकम का स्रोत और भुगतान का तरीका भी नहीं मालूम है।
यह कार्रवाई बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 की धारा 24 (3) के तहत हुई है। आयकर विभाग दिल्ली और नोएडा में उच्च मूल्य की अन्य बेनामी संपत्तियों की जांच कर रहा है, जिसके तार आनंद कुमार और उनकी पत्नी से जुड़े हो सकते हैं। इसकी आंच मायावती तक भी जा सकती है। यानी जांच का दायरा अभी और बढ़ेगा। आयकर विभाग के अलावा ईडी भी इस मामले की जांच कर रहा है। मायावती के भाई आनंद कुमार कभी नोएडा अथॉरिटी में मामूली क्लर्क हुआ करते थे। लेकिन मायावती के सत्ता में आने के बाद आनंद कुमार की संपत्ति अचानक तेजी से बढ़ी। फर्जी कंपनी बनाकर शुरू हुआ अरबपति बनने का खेल और उनके सत्ता में रहने तक लगातार जारी रहा। साल 2007 में मायावती के सत्ता में आने के बाद, आनंद कुमार ने एक के बाद एक लगातार 49 कंपनियां खोलीं। देखते ही देखते 2014 में, वह 1,316 करोड़ की संपत्ति के मालिक बन गए।
यानी 7 साल में आनंद की संपत्ति में लगभग 18 हजार फीसदी का इजाफा हुआ। इसके अलावा रियल एस्टेट में निवेश के जरिए गैरकानूनी तरीके से उनपर मुनाफा कमाने का आरोप है। इस एंगल को लेकर भी इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की आनंद कुमार पर लंबे समय से नजर है। नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान भी आनंद के खाते में अचानक 1.43 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इस तरह कई मामलों में वह जांच एजेंसियां की रडार पर हैं। इसके चलते कई बार आनंद के घर और दμतरों में छापेमारी भी हो चुकी है।

 16 जुलाई को बेनामी निषेध इकाई ने आदेश जारी किया।
 18 जुलाई को आयकर विभाग ने प्लॉट को जब्त किया।
 यह सात एकड़ (28328.07 वर्ग मीटर) का बेनामी प्लॉट है। 
 वर्तमान बाजार भाव से इसकी कीमत 400 करोड़ रुपये है।

नवंबर 2016 से नए बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम के तहत मोदी सरकार ने बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू की थी। देश में बेनामी अधिनियम को लागू करने वाला नोडल विभाग, आयकर विभाग है। इस कानून मुताबिक दोषी पाए जाने पर आरोप में, सात साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही बेनामी संपत्ति के उचित बाजार मूल्य का 25 फीसदी तक जुर्माना भी देना पड़ सकता है।


 
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