यथावत

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अपनत्व का भाव जगाने वाली शिक्षा बने पाठ्यक्रमों का हिस्सा: भागवत

18/09/2019

अपनत्व का भाव जगाने वाली शिक्षा बने पाठ्यक्रमों का हिस्सा: भागवत

यथावत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने 17 अगस्त को दिल्ली में ‘शिक्षा में भारतीयता’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञानोत्सव-2076 (विक्रमी संवत) को संबोधित करते हुए कहा कि अपनत्व का भाव जगाने वाली शिक्षा ही सही मानों में एक आदर्श नागरिक और एक आदर्श समाज बनाती है। उन्हें विश्वास है कि देश की नई शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से यह देश, इसकी संस्कृति, इसका भूगोल और यहां के लोग सब अपने हैं, यही गुण नई पीढ़ी में जायेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भागवत ने कहा कि नीति बनाने के लिए चिंतन हो रहा है और नीति के कार्यान्वयन के लिए जो भाव है उससे इसके साकार होने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का दृष्टिकोण अलग है असल में शिक्षा केवल साक्षरता मात्र नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य स्वावलंबी, स्वातंत्रय और सम्पूर्ण विश्व का स्वजन बनाना है।

यह लोगों में भारत की भूमि, जल, जीव और पर्यावरण से अपनत्व का भाव जाग्रत करती है। उन्होंने कहा कि भारत का अर्थ केवल एक मानचित्र से नहीं है। इस मौके पर ‘भारत में प्रशासनिक सेवा परीक्षाएं मिथक’ एवं ‘यथार्थ और शिक्षा विकल्प एवं आयाम’ नामक दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इसके अलावा शिक्षा में भारतीयता को लेकर विशेष कार्य करने वाले दो शिक्षाविदों प्रोफेसर सीतानाथ गोस्वामी और डॉ अनीता शर्मा को पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षाविद् सम्मान से सम्मानित किया गया।


 
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