युगवार्ता

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अमरावती बनी विपदावती

01/10/2019

अमरावती बनी विपदावती

कृष्णमोहन सिंह

सत्ता बदलते ही समीकरण किस तरह बदल जाते हैं, इसका प्रमाण आन्ध्र प्रदेश की घोषित राजधानी अमरावती में दिख रहा है। बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने नई राजधानी अमरावती बनाने का कानून पास करवाया। केन्द्र से खटपट के बाद फंड में देरी हुई, काम रुका। हालिया विधानसभा चुनाव बाद उनके घोर विरोधी जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने। वे अमरावती को केवल प्रशासनिक राजधानी रहने देना चाहते हैं और विजयनगर, काकीनाडा, गुंटूर तथा कड़पा को भी राजधानी का दर्जा देना चाहते हैं।
जाड़ा, गर्मी, बरसात और वसंत ऋतु में अलग-अलग जगह राजधानी। इसके चलते उद्योगपतियों का अमरावती में किया गया निवेश फंस गया हैं। तमिलनाडु के एक उद्योगपति अपना 300 करोड़ रुपये का निवेश वहां मेडिकल व अन्य कालेज खोलने में किया था। जगन की पार्टी के एक विधायक ने एक नोटिस भेजकर उनसे पूछा है कि आपके महाविद्यालयों में कितनी पूंजी लगी है, कितने छात्र व अध्यापक हैं।
छात्रों से प्रति वर्ष कितना फीस ली जाती है। अध्यापकों को कितना वेतन दिया जाता है। इसका विस्तृत व्यौरा मांगा है। अब राज्य सरकार 50 प्रतिशत सीट राज्य के छात्रों के लिए रखने का नियम बना रही है। इसी तरह अन्य उद्योग में 50 प्रतिशत कर्मचारी स्थानीय व राज्य के होने अनिवार्य किया जा रहा है। एक तरफ मंदी दूसरी तरफ यह आफत, फंसे उद्योगपति।


 
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