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अब ग्रीन पटाखे से मनेगी दीपावली

22/10/2019

अब ग्रीन पटाखे से मनेगी दीपावली

आशुतोष कुमार सिंह

सीएसआईआर ने ग्रीन पटाखे बनाकर दीवाली को बेरौनक होने से बचा लिया है। इसी के साथ लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर मंडरा रहा खतरा भी टल गया है।

वायु प्रदूषण को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। यह चिंता दीपावली नजदीक आते ही और बढ़ जाती है। इस बार भारत सरकार ने इस चिंता को दूर करने के लिए ग्रीन पटाखे जारी किए हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भू-विज्ञान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. हर्षवर्धन ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशाला द्वारा पर्यावरण के अनुकूल विभिन्न प्रकार की आतिशबाजी विकसित करने में सफल रहने की घोषणा की। इनमें आवाज करने वाले पटाखे, μलावर पॉट, पेंसिल, चक्करघिरनी और फुलझड़ियां शामिल हैं। उन्होंने आगे बताया कि ये आतिशबाजी सीएसआईआर द्वारा विकसित किए गए नए फॉर्म्यूलेशन पर आधारित है।
नई तरह के पटाखे उपभोक्ताओं और विक्रेताओं के लिए भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार लगाए गये प्रतिबंध के चलते पूरे आतिशबाजी उद्योग पर जल्द ही बंद होने का खतरा मंडरा रहा था। हालांकि एक बार फिर विज्ञान ने हमारे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए हस्तक्षेप की बदौलत आम आदमी और लाखों नौकरियों को बचा लिया। इस बावत डा. हर्षवर्धन ने कहा, मुझे बहुत खुशी है कि एक तरफ हम इस दीपावली पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का उपयोग करेंगे, और दूसरी तरफ, रोशनी एवं पटाखों के साथ हमारे त्यौहार का पारंपरिक उत्सव बरकरार रहेगा। लाखों घर जो आतिशबाजी बनाने और उनकी बिक्री पर निर्भर रहते हैं, वे भी इस त्यौहार का आनंद ले सकेंगे।
इसके लिए हमारे वैज्ञानकों को शुक्रिया। डा. हर्षवर्धन ने इस बात को भी उजागर किया कि नई आतिशबाजियों से होने वाले उत्सर्जन के परीक्षण की सुविधाएं सीएसआईआरएनईईआरआई के साथ-साथ उनके द्वारा अनुमोदित राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) में उपलब्ध हैं, जिसकी सूची सीएसआईआर-एनईईआरआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार इस दिशा में बहुत समय से काम कर रही थी और इस काम में लगभग 165 आतिशबाजी बनाने वालों को साथ लाया गया है। 65 से अधिक निमार्ता साथ आने की प्रक्रिया में हैं।
कम उत्सर्जन वाले/ग्रीन पटाखे विकसित करने के लिए आठ प्रयोगशालाएं सीएसआईआर एनईईआरआई, सीईईआरआई, आईआईटीआर, आईआईसीटी, एनसीएल, सीईसीआरआई, एनबीआईआई और सीएचएमआईआई साथ आईं। इस पूरी कवायद का समन्वय सीएसआईआरएनईईआरआई ने किया। नकली पटाखों के निर्माण और बिक्री से बचने के लिए पटाखों पर क्यूआर कोड की एक अच्छी सुविधा दी गई है। यह उपभोक्ताओं को स्मार्ट फोन और अन्य उपकरणों का उपयोग कर पटाखों को ट्रैक करने में भी मदद देगा। इस बावत डा. हर्षवर्धन ने बताया कि ग्रीन पटाखे को पारंपरिक पटाखे से अलग करने के लिए एक हरे रंग के लोगो के साथ-साथ एक त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआर) कोडिंग प्रणाली विकसित की गई है।
उत्सर्जन प्रमाणपत्र, क्यूआर कोड और फॉर्म्यूलेशन से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी के लए एक हेल्पलाइन भी बनाई गई है। यह हेल्पलाइन +918617770964 और +919049598046 या ई-मेल : director@neeri.res.in   पर उपलब्ध है। स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने को लेकर सरकारों पर हमेशा से दबाव रहा है। इस बावत केन्द्र सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए सभी राज्यों से अपील की है कि वे अपने बजट का कम से कम 8 फीसद खर्च स्वास्थ्य सेवा पर करें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद के 13 वें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कहा कि सेहत के क्षेत्र में हमने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं विशेषकर भारत पोलियों मुक्त हो गया है ऐसा हमारे सामूहिक प्रयासों के कारण हुआ है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे, डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सचिव सुश्री प्रीति सूदन और 13 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री उपस्थित थे। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद की बैठक का उद्देश्य देश की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर सहमति कायम करना है। देश की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में आयुष्मान भारत के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज(यूएचसी), तपेदिक रोक की समाप्ति और चिकित्सा संरचना को मजबूत बनाने जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन प्राथमिकताओं को राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में खर्च बढ़ाकर सामूहिक रूप से हासिल किया जा सकता है। ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के 2025 तक जीडीपी के 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य खर्च के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।


 
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