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इसरो के नाम बच्चे का पत्र

19/09/2019

इसरो के नाम बच्चे का पत्र


जो बच्चे इसरो नहीं पहुंच सके, उनकी नजर भी इस मिशन पर थी। उन लाखों स्कूली छात्रों में से एक हैं, अंजनेय कौल। अंजनेय ने इसरो को एक पत्र लिखा।

चांद पर चंन्द्रयान-2 के सॉμट लैंडिंग को लाइव देखने के लिए देश भर से 60 स्कूली बच्चों का चयन हुआ था। इनका चयन एक क्विज प्रतियोगिता से किया गया था। ये सभी बच्चे उस रात इसरो मुख्यालय में थे। उस रात इसरो मुख्यालय के हर एक सेकेंड का ये बच्चे गवाह बने। लेकिन जो इसरो मुख्यालय नहीं पहुंच सका, उसकी नजर भी इस मिशन पर थी। उसे लाखों स्कूली छात्रों में से एक है अंजनेय कौल। इसका उम्र महज 10 साल है।

सफल रहा चंद्रयान-2

चांद की सतह पर पहुंचने के लिए चन्द्रयान-2 को आॅर्बिटर, लैंडर और रोवर से लैस किया गया था। लेकिन लैंडर और रोवर वाला हिस्सा हम पूरा करने में सफल नहीं हो पाए। लेकिन आॅर्बिटर आज भी 100 किलोमीटर की ऊंचाई से चांद का चक्कर लगा रहा है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को सूचनाएं भेज रहा है। जब चन्द्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में पहुंचकर परिक्रमा आरंभ किया तो आॅर्बिटर और लैंडर विक्रम आपस में जुड़े हुए थे। चांद के करीब इसे पहुंचने पर लैंडर विक्रम को अलग होना था और चांद की सतह पर लैंड करना था। लैंड करने के बाद प्रज्ञान को लैंडर से बाहर निकलना था। वह 14 दिनों में चांद की सतह पर 500 मीटर की दूरी तय करके चांद के तमाम रहस्यों से इसरो को भेजता। इसरो चीफ के. सिवन ने चन्द्रयान-2 के शुरू होने से पहले ही कहा था कि सतह पर पहुंचने के 15 मिनट पहले का सफर बहुत कठिन होगा और उनकी चिंता वाजिब थी। ‘लैंडर’ का नाम भारत के अंतरिक्ष मिशन के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर ‘विक्रम’ रखा गया है। लैंडिंग योजना के मुताबिक कि चन्द्रयान-2 के आॅर्बिटर को विक्रम लैंडर डिटैच कर धीर- धीरे चांद की इस सतह पर लैंड करें। इस लैंडिंग को आसान बनाने के लिए इसरो ने विक्रम लैंडर को खास तरीके से तैयार किया था। जिससे यंत्रों से लैस प्रज्ञान को सफलतापूर्वक सतह पर उतारा जा सकें। विक्रम को आसानी से लैंड कराने के लिए इसमें चार विशेष इंजन लगाए गए थे। जिसका काम था कि वो लैंडिंग के समय यान की रμतार कम और सॉप्ट लैंडिंग कराएं। अब समझने की बात यह है कि यहां आॅर्बिटर अपना काम कर रहा है। यह चांद का अध्ययन करने के सभी आठ उपकरणों से लैस है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि चांद के अध्ययन के लिए जितने उपकरण चाहिए, वह इस आॅर्बिटर में मौजूद है। वह अपना काम कर रहे है। यह उपकरण इसरो के संपर्क में है। सूचनाएं भेज भी रहे है।

विक्रम का सॉμट लैंडिंग नहीं होने पर जहां वैज्ञानिक और बच्चे निराश हुए, वहीं अंजनेय इससे भी उत्साहित था। उत्साहित अंजनेय ने इसरो को एक पत्र लिखा। पत्र में इसरो की हौसला अफजाई की गई है। कामयाबी की उम्मीद के साथ। उसका यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अंजनेय की मां ज्योति कौल ने उसके पत्र को ट्वीट किया था। ज्योति कौल के ट्विट किए गए पत्र को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रीट्वीट कर दिया। इसके बाद तो दस वर्षीय अंजनेय का यह पत्र वायरल हो गया। अंग्रजी में लिखे, उसके पत्र का हिन्दी अनुवाद आप भी पढ़ें।

चंद्रयान-2, भारतीयों की भावना

इतनी जल्दी निराश मत हों, हम चांद पर अवश्य पहुंचेंगे। हमारा अगला प्रयास चंद्रयान-3 है, जिसे हम अगले साल जून में लॉन्च करेंगे। ये मत भूलिए कि आॅर्बिटर अब भी वहां हैं। वो हमें फोटो भेजेगा, जिससे हमारा अगला कदम तय होगा। वो हमें आगे बताएगा कि हमें कहां जाना है, अब आगे क्या करना है। हो सकता है कि विक्रम सचमुच लैंड कर गया हो। या प्रज्ञान अब भी जिंदा हो और ग्रैफिकल बैंड्स भेजने के लिए तैयार हो रहा हो। तब सफलता हमारे हाथों में होगी। इसरो के वैज्ञानिक अगली पीढ़ी के बच्चों के लिए प्रेरणा हैं। इसरो आप हमारा गर्व हैं। राष्ट्र की तरफ से आपको तहेदिल से शुक्रिया। जय हिंद।                                                                               

अंजनेय कौल। 


 
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