राष्ट्रीय

Blog single photo

डेढ़ सौ रुपये में बनी मशीन ने वंदना को दिया फिलिपींस जाने का मौका

08/11/2019

कृष्णप्रभाकर
एटा, 08 नवम्बर (हि.स.)। महज डेढ़ सौ रुपये खर्च करके बनाए गए अपने अनोखे प्रोजेक्ट से सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 12 वर्षीय वंदना ने भारत के राष्ट्रपति का मनमोह लिया। इंस्पायर योजना का नेशनल अवार्ड पाने वाली छात्रा को इसी अविष्कार के बूते अब फिलिपींस जाने का निमन्त्रण मिला है।

विकास खंड सकीट के गांव महुआखेड़ा निवासी किसान इंद्रभान की बेटी वंदना गांव के स्कूल में कक्षा छह की छात्रा है। गांव में लोगों को बेर, नीबू, करोंदा तोड़ते समय लगने वाले कांटों का दर्द जब वंदना ने स्वयं महसूस किया तो उसने सोचा कि कुछ ऐसा किया जाय कि कांटों वाले पेड़ से फल तोड़ते समय फल तो टूटकर सुरक्षित मिल जाएं, किन्तु कांटा न चुभे। बस, फिर क्या था। कबाड़ से सामान जुटाकर उसने देशी मशीन बना ली। इस मशीन से ऊंचाई के फल भी टूटकर पाइप के जरिए नीचे बांधे जाने वाले थैले में इकट्ठा हो जाते हैं।

मशीन का प्रयोग कारगर रहा तो उसने अपने शिक्षक पूरनसिंह बघेल से साझा किया। बघेल ने वंदना की मेधा की दाद देते हुए उसके प्रोजेक्ट को जिला स्तर पर इंस्पायर अवार्ड के लिए भेज दिया। जिला स्तर पर उसे प्रथम स्थान मिला तो फिर यह उपलब्धि प्रदेश स्तर पर पहुंची। जब वह प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत हुई तो फिर नेशनल इंस्पायर अवार्ड के लिए उसका प्रोजेक्ट भेजा गया। यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों सराहना व अवार्ड दोनों को मिले। 

हौसले की उड़ान को असली पंख तब मिले जब नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ. विपिन कुमार ने गुरुवार को ई-मेल से सूचना दी है कि इसी माह 11 से 22 नवम्बर तक फिलिपींस के डावाओ शहर में आयोजित आसियान भारत ग्रासरूट इनोवेशन फोरम 2019 में शामिल होने के लिए उसका चयन किया गया है। दरअसल प्रदेश स्तर के छह बाल वैज्ञानिकों के नाम व उनके प्रोजेक्ट की विशेषताओं के साथ भारत सरकार के विज्ञान एवं प्राद्योगिकी विभाग के राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान को भेजे गए थे। इसमें एटा जनपद की वंदना तथा लखनऊ के प्रांजल श्रीवास्तव का चयन फिलिपींस जाने के लिए किया गया है। दोनों छात्रों के विदेश जाने का समस्त खर्च व वीजा की व्यवस्था नवप्रवर्तन संस्थान द्वारा की जाएगी। वंदना को मिले इस आमंत्रण पर डीआईओएस एमपीसिंह, बीएसए संजयसिंह, समन्वयक इंस्पायर अवार्ड राजेन्द्रसिंह व समन्वयक जिला विज्ञान केंद्र देवेश कुमार ने खुशी जताते हुए इसे जिले को मिला बड़ा गौरव बताया है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
Top