युगवार्ता

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ऐसे होगा जल संचय

28/08/2019

ऐसे होगा जल संचय

 सौरव राय

तालाब और पोखरे बनवाना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। इसलिए इस पर अमल एक स्वागतयोग्य कदम है बशर्ते दिल्ली सरकार जल संचय की योजना को अमलीजामा पहनाए।

पानी ज्यादा हो तो समस्या न हो तो भी समस्या। ऐसे में जल प्रबंधन में ही समस्या का समाधान है। मौसम बारिश का है इललिए जल संचय पर ध्यान देना अपिरहार्य है। यदि भावी पीढ़ी के लिए जल बचाने के उपाय नहीं ढूंढे तो समस्या विकराल रूप ले लेगी। इसी के मद्देजनर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में जल शक्ति मंत्रालय बनाया है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार ने भी इसके लिए आंतरिक विभागीय कमेटी बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया है।
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत वजीराबाद से पल्ला और ओखला इलाकों में यमुना किनारे μलडप्लेन पर लगभग 1000 एकड़ की जमीनों पर दिल्ली सरकार अपनी इस सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करेगी। सरकार के अनुसार इन जमीनों पर 20 से 40 एकड़ के आकार में 1000 एकड़ अधिक की जमीन पर तालाब खोदे जाएंगे। जिसमें बाढ़ के दौरान यमुना में आने वाले पानी को संचित किया जाएगा। तालाब का यह पानी दिल्ली के सभी इलाकों में भूजल स्तर को रिचार्ज करेगा। वैसे यह परियोजना कागज पर तो बेहतरीन दिखती है लेकिन जमीन पर अभी इसका आना बाकी है।
सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक तालाब खोदना शुरू भी किया था, लेकिन हरियाणा के हथनीकुंड कुंड बैराज से छोड़ा गया 8 लाख 28 हजार क्यूसिक पानी यमुना के जल स्तर को और बढ़ा दिया। जिससे यमुना के आस पास का सारा क्षेत्र पानी में डूब गया।

केजरीवाल सरकार के अनुसार उन्होंने अपना पायलट प्रोजेक्ट पूरा कर दिया है। लेकिन वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार अभी खुदाई शुरू ही हुई थी कि यमुना का जल स्तर तेजी से बढ़ गया। अभी की स्थिति यह है कि सब कुछ पानी में डूबा हुआ है। दिल्ली सरकार का इस परियोजना पर दावा है कि इसके पूरा होने के बाद दिल्ली अकेले अपने भूजल स्रोतों से 66 हजार एमजीडी पानी का उपयोग रोज कर सकेगी। फिलहाल दिल्ली को प्रतिदिन 11 हजार एमजीडी पानी की जरूरत है, जिसमें से उसके पास यमुना में हरियाणा से छोड़े गए, गंगा से आने वाले और भूजल के दोहन से कुल मिलाकर लगभग 950 एमजीडी पानी ही वितरण के लिए मौजूद है। आज की तारीख में भी दिल्ली लगभग डेढ़ सौ एमजीडी पानी प्रतिदिन की किल्लत से जूझ रही है।
वैसे जिन किसानों कि जमीन यमुना के किनारे है उन्हें तालाब के रूप में इस्तेमाल करने के एवज में दिल्ली सरकार किसानों को 50 हजार रुपये किराये के तौर पर देगी। यह योजना इस साल पायलट प्रोजेक्ट के तहत ही शुरू होने वाली थी। मानसून बीत जाने के बाद विशेषज्ञों की टीम इसकी जांच करेगी उससे बाद कार्य को अंजाम दिया जायेगा। योजना के तहत दिल्ली के 12 झीलों को प्राकृतिक तरीके से भरा जायेगा। ताकि उन क्षेत्रों के जल स्तर में सुधर आये। इसमें से छह झीलों को चयनित कर लिया गया है- मंगेशपुर, नांगल ठाकरान, पंजाब खोरे, देरामंडी, ढिचाऊं कलां, बुराड़ी और कमलपुर माजरा शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि यमुना के किनारे कि जमीन रेतीली है और वह पानी को अपने अंदर तेजी से सोख सकती है जिससे पानी के स्तर में जल्दी से सुधर आने कि सम्भावना है। वैसे यह परियोजना कितनी कारगर होगी यह तो आने वाला समय ही बतायगा। दिल्ली चुनाव भी नजदीक है। जनता और सरकार के सामने पानी की एक बड़ी चुनौती है। कई इलाकों में बारिश के बीच भी पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है। इससे दिल्ली सरकार कैसे निपटेगी अभी कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी। इसलिए जल संचय की परियोजना अच्छी है अगर इसे मूर्त रूप दिया जाये तो, नहीं तो यह भी सरकार की अन्य परियोजनाओं की तरह सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जायेगी।


 
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