यथावत

Blog single photo

‘अटल काव्यांजलि’ का आयोजन

18/09/2019

‘अटल काव्यांजलि’ का आयोजन

यथावत

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में 17 अगस्त को दिल्ली के हिन्दी भवन में ‘अटल काव्यांजलि’ का आयोजन किया गया। इस दौरान भाजपा नेता सत्य नारायण जटिया ने अटलजी की कविताओं का पाठ करते हुए कहा कि उनकी अलग शैली और अपना दर्शन था। उनकी स्मृति आज भी हमें ऊर्जा देती है। उन्होंने वाजपेयी की ख्याति प्राप्त कविता ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’ सहित अन्य कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सुरेंद्र शर्मा, कुंवर बेचैन, गोविंद व्यास, सुनील जोगी, बुद्धिनाथ मिश्र, विष्णु सक्सेना, सुरेश अवस्थी, मनवीर मधुर, अमूल्य मिश्र, रमाकान्त पांडे और कवयित्री सीता सागर ने कविता पाठ की। हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने इस दौरान उपस्थित श्रोतागण को अपने चिर-परिचित अंदाज में हंसाते हुए कहा कि अटल जी एक जीवंत व्यक्तित्व के धनी थे, जिनका 25 दिसंबर को दुनिया में आना भी उत्सव का दिन रहा और एक श्रेष्ठ जीवन जीकर इस जगत से जाना ’16 अगस्त पुण्यतिथि’ भी उत्सव ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कवि कभी मरता नहीं। कवि गोविंद व्यास ने पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन के साथ जुड़े उनके व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान जेल में रहने के दौरान अटलजी बीमार हो गए थे और उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

आपातकाल के दौरान उन्होंने ज्यादातर अपनी कविताएं एम्स में इलाज के दौरान लिखीं। कुंवर बेचैन ने अटल जी को अतुलनीय बताते हुए कविता के माध्यम से कहा कि ‘देना हुआ जब भी कोई प्यारा सा उदाहरण, हमने दिया हर बार तुम्हारा ही उदाहरण।’ वहीं कवि विष्णु सक्सेना ने अटल जी को यूं याद किया, ‘गुमसुम हैं होठ और ये आंखें उदास हैं, मत पूछिए की मेरे गम कितने खास हैं। … लगता है अटल जी यहीं आसपास हैं।’ उन्होंने इस दौरान कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को सख्ती के साथ हटा दिया गया है। अब जरूरत है कि वहां के लोगों को प्यार से अपना बनाया जाए। इसे कविता के अंदाज में उन्होंने यूं प्रगट किया, ‘कुछ शहद घोल दो, प्यार से बोल दो। खिड़कियां खोल दो, रोशनी के लिए। जीत भी हार भी, फूल भी खार भी, चाहिए प्यार भी जÞन्दिगी के लिए।’ कार्यक्रम में प्रख्यात कवि सुरेन्द्र शर्मा, कुंवर बेचैन और विष्णु सक्सेना ने कविता पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रभक्ति को अपनी कविताएं सर्मिपत करने वाले कवि गजेंद्र सोलंकी ने किया। इस दौरान अटल जी पर कविता पाठ करते हुए कवि सुनील जोगी ने आग्रह किया कि अटल काव्यांजलि के दौरान उन पर सुनाई गई कविताओं का संकलन कर प्रकाशन किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के समापन के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी व न्यास के अध्यक्ष राज्यसभा सांसद रविन्द्र किशोर सिन्हा ने कविता पाठ करने वाले कवियों को अटलजी से जुड़ा एक स्मृति चिन्ह भेंट कर उनको सम्मानित किया।


 
Top