युगवार्ता

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प्रयोगधर्मिता में संकोची बॉलीवुड

19/06/2019


प्रयोगधर्मिता में संकोची बॉलीवुड

प्रकाश के रे

आगामी एक-डेढ़ साल में लगभग एक दर्ज़न फिल्मों पर तकरीबन डेढ़ हजार करोड़ का दांव लगा है। इनमें से एक फिल्म ‘भारत’ बड़ी कमाई की ओर तेजी से बढ़ रही है।

इन दिनों सलमान खान और कटरीना कैफ की फिल्म ‘भारत’ बॉक्स आॅफिस पर धूम मचा रही है। बड़े स्टारों और निर्देशकों की फिल्में अगर कमाई करती हैं, तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं है। परंतु, जब इनकी फिल्में ़लॉप हो जाती हैं या औसत कारोबार करती हैं, तो चर्चा होनी चाहिए। पिछले कुछ महीनों में ‘कलंक’, ‘ठग्स आॅफ हिन्दोस्तान’ और ‘जीरो’ सिनेमाघरों तक दर्शकों को ला पाने में असफल रही हैं। अगर हिंदी सिनेमा के सामान्य हिसाब-किताब पर नजर डालें, तो बेहद निराशाजनक तस्वीर उभरती है।
फिल्मों के ़लॉप होने पर अक्सर बाहरी कारणों को दोष दे दिया जाता है, पर पिछले दिनों हॉलीवुड की ‘एवेंजर्स एंडगेम’ 350 करोड़ का आंकड़ा पार कर गयी। इसका सीधा मतलब है कि लोग अगर सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म के लिए थिएटर जा सकते हैं, तो अच्छी मनोरंजक फिल्मों का भी स्वागत कर सकते हैं। सिनेमा का इतिहास इस बात का गवाह है कि हमारे निर्माता-निर्देशक प्रयोगधर्मिता के मामले में बहुत संकोची हैं तथा उन्हें लकीर का फकीर कहना ज्यादा सही होगा। सैकड़ों फिल्मों के पिट जाने के बाद भी वे फार्मूला का दामन नहीं छोड़ते और घिसे-पिटे ढंग से फिल्में बनाते जाते हैं। आगामी एक-डेढ़ साल में लगभग एक दर्जन फिल्मों पर तकरीबन डेढ़ हजार करोड़ का दांव लगा है। इनमे से एक ‘भारत’ बड़ी कमाई की ओर तेजी से बढ़ रही है।
इसके बाद अनेक भाषाओं में एक साथ ‘साहो’ आ रही है, जिसमें ‘बाहुबली’ फिल्म के नायक प्रभास ने काम किया है। यशराज फिल्ज के बैनर से ऋतिक रोशन और टाइगर श्राफ की एक फिल्म पर काम चल रहा है। इनके अलावा करण जौहर, आशुतोष गोवारिकर, संजय लीला भंसाली, अजय देवगन, रोहित शेट्टी, अक्षय कुमार, रणबीर कपूर आदि की फिल्में हैं। इन फिल्मों से बड़े नामों के जुड़े होने से कुछ कमाई टिकट खिड़की पर हो ही जाती है और बाकी भरपाई टेलीविजन, डिजिटल, संगीत, विदेश में रिलीज आदि से हो जाती है। पर मुश्किल यह है कि ये फिल्में आपसी प्रतिद्वंद्विता से नुकसान उठाती ही हैं, इनके दबाव में कई छोटे या औसत बजट की फिल्में तबाह हो जाती हैं। एक बड़ी चुनौती हॉलीवुड की फिल्मों से भी मिलती है, जो अमूमन अच्छी कमाई कर जाती हैं क्योंकि अनेक भाषाओं में उनकी डबिंग होने के कारण उन्हें देश में बड़ा बाजार मिल जाता है।
जल्दी से जल्दी यानी रिलीज के पहले कुछ दिनों में ज्यादा से ज्यादा कमाई कर लेने के दबाव के कारण बड़े बजट की फिल्में बहुत अधिक थिएटरों में रिलीज की जाती हैं। जानकारों की मानें, तो वे भले ही चारा हजार सिनेमाघरों में अपनी फिल्में लगा दें, लेकिन उनकी 80 फीसदी कमाई सिर्फ़ 500 थिएटरों से ही आती है। स्वाभाविक है कि इससे भी कम बजट और सामान्य अभिनेताओं-अभिनेत्रियों की फिल्मों को परेशानी होती है क्योंकि उन्हें थिएटर बुक होने से जगह नहीं मिल पाती है। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय भाषा की फिल्मों से भी बॉलीवुड की फिल्मों की कमाई पर असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, भोजपुरी क्षेत्रों में सलमान खान की फिल्म से बेहतर ओपनिंग भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह की फिल्म को मिली है। बाजार के संदर्भ में एक हिसाब बहुत अहम है। साल 2018 में पूरी दुनिया के सिनेमा ने 60.1 अरब डॉलर की कमाई की है।
हॉलीवुड का राजस्व इस साल 50.9 अरब डॉलर होने का अनुमान है। एक आकलन के अनुसार इस अमेरिकी इंडस्ट्री का राजस्व अगले साल तक 72.1 अरब डॉलर पहुंच जाएगा। संख्या के हिसाब से देखें, तो 2017 में हॉलीवुड ने 724 फिल्में रिलीज की थी। चीन के सिनेमा का राजस्व पिछले साल 12.8 अरब डॉलर रहा था। भले ही चीन की कमाई हॉलीवुड से कम है, पर वहां अमेरिका से 50 करोड़ अधिक टिकटों की बिक्री हुई है। चीन में सिनेमा परदों की संख्या पिछले साल 60,079 तक जा पहुंची है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 40 हजार के आसपास है। इन दोनों बाजारों की तुलना में बॉलीवुड की पूरी कीमत 2.83 अरब डॉलर है, जो 2021 तक 4.5 अरब डॉलर हो सकता है। टिकट बेचने के मामले में बॉलीवुड का आंकड़ा चीन और अमेरिका से बहुत अधिक है। पिछले साल बॉलीवुड फिल्मों के लगभग 2.2 अरब टिकटें बिकी थीं। इस पूरे गणित को देखें, साफ पता चलता है कि अगर बॉलीवुड फिल्मों की गुणवत्ता पर ध्यान दे, तो अर्थव्यवस्था में स्थायित्व संभव हो सकता है।


 
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