युगवार्ता

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यूरिया की उत्पादन लागत में आएगी कमी

30/09/2019

यूरिया की उत्पादन लागत में आएगी कमी

वर्तमान में पूरे देश में यूरिया की मांग अनुरूप उत्पादन नहीं होता है। जबकि खाद्यान्न उत्पादन में देश में यूरिया की भूमिका विशेषरूप से महत्त्वपूर्ण उर्वरक के रूप में है। इसलिए यूरिया की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रत्येक वर्ष करीब 50 से 70 लाख टन का आयात करता पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार पुराने बंद पड़े यूरिया संयत्रों को धीरे-धीरे फिर से चालू कर रही है। सिंदरी, बरौनी, रामागुंडम और गोरखपुर जैसी बंद पड़ी इकाइयों के पुनरुद्धार के प्रयास जारी हैं।
इसी क्रम में तालचेर यूरिया परियोजना के लिए कोयला गैसीकरण संयंत्र हेतु अनुबंध पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किया गया। गौरतलब है कि इस समय देश में यूरिया का उत्पादन प्राकृतिक गैस और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के उपयोग से किया जा रहा है। जो महंगा साबित होता है और उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसलिए यूरिया और अन्य उर्वरकों के उत्पादन के लिए स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। तालचेर उर्वरक परियोजना इसी नीति का हिस्सा है। जिसमें यूरिया के उत्पादन के लिए पेटकोक के साथ स्थानीय कोयले का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना के लिए पेटकोक पारादीप रिफाइनरी से आएगा। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण यह परियोजना कोप-21 पेरिस समझौते की प्रतिबद्धत को भी पूरा करेगी।


 
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