चुनावी विशेष

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लोकसभा चुनाव परिणाम : दिल्ली में भाजपा की क्लीन स्वीप

23/05/2019

नई दिल्ली, 23 मई (हि.स.)। दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने त्रिकोणीय मुकाबले में
बड़ी जीत दर्ज की है। इस जीत ने यह भी दर्शाया है कि यदि कांग्रेस और
आम आदमी पार्टी(आप) मिलकर भी दिल्ली में चुनाव
लड़ते तो भी शायद ही जीत मिलती।



दिल्ली की सातों लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवारों ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल
किए हैं। पश्चिमी दिल्ली से मौजूदा सांसद प्रवेश वर्मा और उत्तर
पश्चिम दिल्ली से सूफी गायक हंसराज हंस ने साढ़े पांच लाख से
अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। 2014 में दिल्ली की सात में से छह सीटों पर
कांग्रेस और 'आप' का कुल मतदान प्रतिशत भाजपा के मतदान प्रतिशत से अधिक था। इसी को देखते
हुए आम आदमी पार्टी दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती थी। हालांकि दिल्ली के साथ अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की महत्वकांक्षा 'आप' को थी, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया।



लोकसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने 'आपके वोट बैंक में सेंध लगाकर उसे तीसरे पायदान पर लाकर खड़ा कर
दिया। जबकि पिछले आम चुनावों में 
'आप' दिल्ली में 34.90 प्रतिशत मतदाताओं का भरोसा जीतकर
दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।



दिल्ली की जनता ने कांग्रेस और 'आप' के लुभावने वादों को दरकिनार कर देश को सशक्त नेतृत्व देने का मूड बनाया। इससे भाजपा के वोट प्रतिशत
में 2014 के आम चुनावों के मुकाबले 10.2 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं पूर्व
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपनी विकासात्मक छवि के चलते पुराने कांग्रेसियों को कुछ
हद तक आकर्षित करने में कामयाब रहीं। इसी का परिणाम रहा कि दिल्ली की सात में से पांच
सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे।



दिल्ली में 2014 के लोकसभा चुनावों में लगभग 65 प्रतिशत मतदान हुआ था। भाजपा
का वोट प्रतिशत 11.17 प्रतिशत बढ़कर 46.40 फीसदी तक पहुंच गया था। जबकि कांग्रेस
को
एंटी इनकंबेंसी के चलते 42.01 प्रतिशत का घाटा हुआ था और उसके खाते में महज
15.10 प्रतिशत वोट ही आए थे। आम आदमी पार्टी को उसके पहले लोकसभा चुनावों में उसकी
स्वच्छ छवि के चलते 34.90 प्रतिशत मतदाओं का समर्थन मिला।



पिछले पांच सालों में अन्ना आंदोलन से उपजी 'आप' का तिलस्म टूट गया। इससे मौजूदा
चुनावों में 
'आप' का 16.7 प्रतिशत वोट खिसककर महज 18.2 प्रतिशत रह गया। कांग्रेस
द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री पर भरोसा जताये जाने से उसे 7.3 प्रतिशत वोट प्रतिशत का फायदा
हुआ और उसका वोट प्रतिशत 22.4 प्रतिशत पर पहुंच गया।



भाजपा की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत छवि और विकास कार्यों के चलते
उसके वोट प्रतिशत में 10.2 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिल्ली में भाजपा के वोट प्रतिशत
का आंकड़ा 56.5 फीसदी तक पहुंच गई। इससे भाजपा ने सातों सीटों पर पहले से कहीं ज्यादा के अंतर से जीत दर्ज की। 
'आप' उम्मीदवार
दक्षिणी दिल्ली और उत्तर-पश्चिमी सीट पर ही दूसरे स्थान पर रहे। शेष सीटों पर
कांग्रेस के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहेहालांकि वह भी भाजपा को कोई खास चुनौती नहीं दे पाए जैसा कि कांग्रेस
को उम्मीद थी। भाजपा के सभी उम्मीदवारों की जीत का अंतर एक से चार लाख तक रहा।



डॉ हषर्वधन ने चांदनी चौक से जहां पिछले चुनावों में एक लाख 36 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर
दो लाख को पार कर गया।



पूर्वी दिल्ली से पिछले चुनावों में भाजपा के महेश गिरी एक लाख 90 हजार से जीते थे। पार्टी ने इस बार उनके स्थान पर क्रिकेटर
गौतम गंभीर को मौका दिया और उन्होंने इस जीत के सिलसिले को बरकरार रखते हुए तीन
लाख
90 हजार वोटों से जीत
दर्ज की।



नई दिल्ली से मौजूदा सांसद मीनाक्षी लेखी ने एक लाख 62 हजार के अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते
हुए दो लाख
55 हजार से जीत
को दोहराया।



भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और उत्तर-पूर्वी दिल्ली से
मौजूदा सांसद मनोज तिवारी ने
2014 के एक लाख 44 हजार की जीत के अंतर को पीछे छोड़ते हुए
इस बार तीन लाख
63 हजार में
बड़ी जीत दर्ज की।



उत्तर पश्चिम दिल्ली से भाजपा ने उदिज राज का टिकट काटकर सूफी
गायक हंसराज हंस को मौका दिया और उन्होंने पिछले चुनावों में पार्टी उम्मीदवार की
एक लाख वोटों की जीत को बौना साबित करते हुए लगभग साढ़े पांच लाख वोटों से जीत
दर्ज की।



दक्षिणी दिल्ली से रमेश बिधूड़ी ने एक लाख से अपनी पिछली
जीत के आंकड़े को इस बार साढ़े तीन लाख से ऊपर पहुंचा दिया।



पश्चिमी दिल्ली से मौजूदा सांसद प्रवेश वर्मा ने अपने दो
लाख
68 हजार के पिछले
रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिल्ली में सबसे अधिक अंतर से जीतने का भी तमगा हासिल किया। उन्होंने इस बार पांच लाख
62
हजार वोटों के अंतर से कांग्रेस के महाबल मिश्रा को हराया।



हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/आकाश


 
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