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एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को लगाई फटकार

10/07/2019

संजय

नई दिल्ली, 10 जुलाई (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रही दिल्ली की अवैध डेयरियों पर कार्रवाई नहीं करने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को फटकार लगाई है। एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी से कहा कि आप अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते और अपना ठीकरा नगर निगमों पर नहीं फोड़ सकते हैं।


एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने एनजीटी को ई-मेल के जरिये बताया था कि उसने अवैध डेयरियों पर कार्रवाई नहीं करने पर नगर निगमों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने बोरवेल को सील करने की जिम्मेदारी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को दी थी। बाढ़ नियंत्रण विभाग, पशुपालन विभाग और नगर निगमों को भी अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। कोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की इस रिपोर्ट पर नाराजगी जताई और कहा कि वो अपनी नाकामी छिपाने के लिए वो वाटर एक्ट, एयर एक्ट पर अपने वैधानिक दायित्वों को निभाने से बच रही है। एनजीटी ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी प्रदूषण फैलाने वालों से जुर्माना वसूल सकती है और दूसरी कोई प्राधिकार नहीं। उन प्राधिकारों के पास जुर्माना वसूलने का अधिकार नहीं है , ये काम दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी को ही करना होगा।


पिछली एक अप्रैल को एनजीटी ने अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी और सभी नगर निगमों पर दस-दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि दिल्ली में कोई डेयरी कचरा प्रबंधन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं और प्रशासन असंवेदनशील बना हुआ है।


एनजीटी ने कहा था कि ये जुर्माना इसलिए लगाया गया है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी और चारो नगर निगम अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं। एनजीटी ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वो सभी संबंधित पक्षों की एक बैठक बुलाएं और उनकी जिम्मेदारी तय करें और अगर वे विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई करें।


एनजीटी ने कहा था कि किसी भी विभाग के पास कोई ऐसा सुझाव नहीं आया कि पर्यावरण नियमों का पालन कैसे हो। ये सभी की असंवेदनशीलता को बताता है। सभी विभागों ने अपने हलफनामे में कहा है कि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हो रहा है। देश की राजधानी में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन तब हो रहा है जब इसे जीवन के अधिकार में शामिल किया गया है।


याचिका पशु अधिकार कार्यकर्ता नुगेहल्ली जयासिम्हा ने दायर किया है। याचिका में अवैध डेयरियों को बंद करने की मांग की गई है। अवैध डेयरियों की वजह से दिल्ली के वायु और जल प्रदूषण की समस्या पैदा हो रही है। सफाई नहीं रहने से मवेशियों के अलावा इलाके के लोगों के लिए स्वास्थ्य की समस्या भी पैदा हो रही है। याचिका में कहा गया है कि डेयरी मालिक पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स का पालन नहीं कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि डेयरियों के कचरे यमुना में प्रदूषण की एक मुख्य वजह है।


हिन्दुस्थान समाचार


 
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