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प्लास्टिक कचरा रोकने की समाज करे पहल

30/08/2019

सुरेश हिन्दुस्थानी
प्लास्टिक कचरा बढ़ने से प्राकृतिक हवाओं में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह मानव जीवन के लिए अहितकर है। साथ ही हमारे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी विपरीत स्थितियां पैदा कर रहा है। इसके लिए समय-समय पर सरकार और सरकारी सहयोग लेकर चलने वाली गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जनजागरण अभियान भी चलाए जाते रहे हैं, परंतु परिणाम उस गति से मिलता दिखाई नहीं देता। ऐसे में प्रश्न उठता है कि गैर सरकारी संस्थाओं के यह अभियान अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दे पा रहे हैं? उधर, कागजों पर प्लास्टिक मुक्ति अभियान की सफलता के तीर चलाये जाते रहे हैं। अपने देश में कागजों में काम होने की बीमारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने की यही गति बरकरार रही तो एक दिन हमें शुद्ध हवा से वंचित होना पड़ सकता है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्लास्टिक प्रदूषण की भयावहता का संकेत करते हुए देश से आह्वान किया कि इसकी रोकथाम के लिए समाज को आगे आना होगा। प्रधानमंत्री की चिंता समाज की भलाई के लिए है। कोई भी सरकारी योजना तभी सफल हो सकती है जब उसमें जनता की सकारात्मक भागीदारी होती है।
हम जानते हैं कि प्लास्टिक के कारण हो रहे वायु प्रदूषण के चलते हमारे शरीर में कई प्रकार के विषैले कीटाणु प्रवेश कर रहे हैं, जो हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं। इससे तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं। यह भी सच है कि कई बीमारियां केवल गंदगी के कारण हो रही हैं। चाहे वह प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न गंदगी हो या फिर इसके कारण जाम नालियों के गंदे पानी से प्रदूषण से पैदा होने वाली गंदगी हो। पॉलीथिन में बहुत से लोग घर का कचरा भरकर बाहर फेंक देते हैं, जिसे खाकर गायें दम तोड़ देती हैं और हम जाने-अनजाने गौहत्या का पाप कर देते हैं। सच यह भी है कि पॉलीथिन और खाद्य सामग्री में उपयोग आने वाले प्लास्टिक के सामान रसायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के कारण हमें जहर भरे खाना खाने के लिए विवश कर रहे हैं। इसके कारण हमारा स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। हालांकि अपने देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन क्या हम जानते हैं कि प्लास्टिक कचरा स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में बहुत बड़ा अवरोधक बनकर सामने आया है। 
प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाने के लिए केन्द्र सरकार ने सराहनीय कदम उठाये हैं। कई स्थानों पर इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध भी लगा है। विवाह समारोहों और अन्य कार्यक्रमों में भी अब प्लास्टिक से निर्मित सामग्री और खाद्य पदार्थों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली डिस्पोजल वस्तुओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का यह कदम सभी राज्य और जनता के लिए एक पाथेय है। प्लास्टिक कचरा आयातित कचरा है। हमारे देश में बहुत पहले से कागज और कपड़े के बैग ही प्रचलन में रहते थे, लेकिन विदेशियों की नकल करने के कारण हम भी प्लास्टिक का उपयोग करने की ओर प्रवृत होते चले गए। यही प्रवृति आज हमारे देश की सबसे विकराल समस्या बनकर उभर रही है। इसे रोकने के लिए क्या सरकार के कदम उठाने मात्र से यह सफल हो सकेगा? इसके लिए जनता की भागीदारी भी बहुत मायने रखती है। वास्तव में जिस देश की जनता अपने देश के प्रति तादात्म्य स्थापित करते हुए कार्य करती है, वह देश बहुत सुंदर और स्वच्छ होता है। देश में वातावरणीय समस्याओं का प्रादुर्भाव हमारी अपनी देन है, जो जाने या अनजाने हमने ही पैदा की है। स्वच्छ हवा प्रदान करने वाले पेड़-पौधे भी प्रदूषित वातावरण का शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें ताजी हवा कैसे मिल सकती है? हमें चैतन्य शक्ति का जागरण करके देश को स्वच्छ वातावरण देने के लिए प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाना है। अगर हम ऐसा कर सके तो हमारा देश फिर से तरोताजा हवा प्रदान करने वाला देश बन जाएगा। इसके लिए सरकार की योजना में हमें भी पूरी तरह से सहभागी बनना होगा।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।) 


 
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