लेख

Blog single photo

दुनिया को निरोग रखने की भारत की पहल

19/06/2019

(अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून पर विशेष)

डॉ. वंदना सेन
र्तमान में विश्व में जितनी भी ज्ञान और विज्ञान की बातें की जाती हैं, वह भारत में युगों पूर्व की जा चुकी हैं। इससे कहा जा सकता है कि भारत में ज्ञान और विज्ञान की पराकाष्ठा थी, लेकिन यह हमारा दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि हम विदेशी चमक के मोहजाल में फंसकर अपने ज्ञान को संरक्षण प्रदान नहीं कर सके। हम स्वयं ही यह भुला बैठे कि हम क्या थे? भारत की भूमि से विश्व को एक परिवार मानने का संदेश प्रवाहित होता रहा है। विश्व को शांति के मार्ग पर ले जाने का ज्ञान और दर्शन भारत के पास है। योग विधा एक ऐसी शक्ति है, जिसके माध्यम से दुनिया को स्वस्थ और मजबूती प्रदान की जा सकती है। 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से आज विश्व के कई देश भारत के साथ खड़े हुए हैं। यह विश्व को निरोग रखने की भारत की सकारात्मक पहल है।
देवभूमि भारत में वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा को आत्मसात करने वाले मनीषियों ने बहुत पहले ही विश्व को स्वस्थ और मजबूत होने का संदेश दिया है। योग में राजनीति देखना संकुचित मानसिकता का परिचायक है। पिछले दो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पूरे विश्व में योग का जो स्वरूप दिखाई दिया, वह अपने आप में एक करिश्मा है। करिश्मा इसलिए क्योंकि ऐसा न तो पहले कभी हुआ है और न ही योग के अलावा दूसरा कार्यक्रम हो सकता है। इतनी बड़ी संख्या में भाग लेने वाले लोगों के मन में योग के बारे में अनुराग पैदा होना यह प्रमाणित करता है कि अब विश्व एक ऐसे मार्ग पर कदम बढ़ा चुका है, जिसका संबंध सीधे तौर पर व्यक्तिगत उत्थान से है। 
हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के योग साधकों के साथ मिलकर योग विद्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की जो पहल की थी, आज उसके सार्थक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। अब तीसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की तैयारियां पूरे विश्व में हो रही हैं। पिछले दो योग दिवस की सफलता यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि अब विश्व के कई देशों ने स्वस्थ और मजबूती की राह पर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। विश्व के अनेक देश इस सत्य से भलीभांति परिचित हो चुके हैं कि योग जीवन संचालन की एक ऐसी शक्ति है, जिसके सहारे तनाव मुक्त जीवन की कल्पना की जा सकती है। हम जानते हैं कि विश्व के कई देशों में जिस प्रकार का विचार प्रवाह है, उससे जीवन की अशांति का वातावरण तैयार हो रहा था। लोग इस बात को जान चुके हैं कि योग के सहारे ही मानसिक शांति को प्राप्त किया जा सकता है।
योग दिवस को मिले भारी वैश्विक समर्थन के बाद यह तो तय हो गया है कि विश्व को सुख और समृद्धि के मार्ग पर ले जाने के लिए भारत के दर्शन को विश्व के कई देश खुले रूप में स्वीकार करने लगे हैं। इससे पहले जो भारत विश्व के सामने अपना मुंह खोलने से कतराता था, आज वही भारत एक नए स्वरूप में विश्व के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विश्व को भारत की विराट शक्ति का अहसास हो चुका है। नरेन्द्र मोदी जब से देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से हमारे देश के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण में गजब का बदलाव दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव नरेन्द्र मोदी को देखकर आया है, नहीं। इसका जवाब यह है कि भारत के पास पूर्व से ही ऐसी विराट शक्ति थी, जिसका भारत की पूर्व सरकारों को बोध नहीं था। हर भारतवासी के अंदर शक्ति का संचय है। हम शक्ति को प्रदर्शित नहीं कर पा रहे थे। हम यह भी भूल गए थे कि हमारे अंदर विराट शक्ति है। नरेन्द्र मोदी ने जामवंत की भूमिका अपनाकर देशवासियों एवं अप्रवासी भारतीयों के मन में इस भाव को जाग्रत किया कि आप महाशक्ति हैं। जैसे ही नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के मेडीसन एस्क्वायर में भारतीय शक्ति का प्रस्फुटन किया, वैसे ही भारत के नागरिकों के अंदर गौरव का अहसास हुआ और दुनिया के विकसित देश भारत को अपना समकक्ष मानने लगे।
भारत के दर्शन में एक ठोस बात यह भी है कि यहां हमेशा 'सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया' वाला भाव ही रहा है। जो भी देश भारत के इस दर्शन से तालमेल रखता हुआ दिखाई देता है, वह कभी दूसरे का अहित सोच भी नहीं सकता। उधर, विश्व के अनेक देश केवल स्वयं का हित सबसे ऊपर रखकर दूसरों के हितों पर चोट करते हैं। वर्तमान के मोहजाल में फंसे विश्व के अनेक देश आज किसी भी चीज में राहत नहीं देख रहे हैं। पैसे के पीछे भाग रहा पूरा विश्व तनाव भरा जीवन जी रहा है। इस तनाव से मुक्ति पाने का एक ही मार्ग है योग को अपनाना। जिसने अपने जीवन में योग को महत्व दिया है, वह इस तनाव से छुटकारा पाने में सफल रहा है। आज सबसे ज्यादा तनाव का जीवन मुस्लिम देशों में दिखाई देता है। वहां केवल मारकाट की भाषा के अलावा कुछ भी नहीं है। इन देशों में हमेशा अशांति का वातावरण दिखाई देता है और सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। बताने की जरूरत नहीं कि आध्यात्मिकता और ध्यान योग के मामले में हम विश्व के सभी देशों से बहुत आगे हैं। इस बारे में दुनिया का ज्ञान भारत के समक्ष अधूरा ही है। भारत को जब तक इस बात का बोध था, तब तक विश्व का कोई भी देश भारत का मुकाबला करने का सामर्थ्य नहीं रखता था। आज इस शक्ति के प्रदर्शन की शुरूआत हो चुकी है, जरूरत इस बात की है कि हम सभी सरकार के कदम के साथ सहयोग का भाव अपनाकर अपना कार्य संपादित करें आने वाले समय में भारत का भविष्य उज्जवल है।
(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।) 


 
Top