चुनावी विशेष

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चंद्रभद्र सिंह को ​शिकस्त दे सुलतानपुर से 'पहली महिला सांसद' बनी मेनका गांधी

23/05/2019

दयाशंकर

सुल्तानपुर, 23 मई (हि.स.)। भारत के इतिहास में गुरुवार की तारीख स्वर्णक्षरों में दर्ज हो गई है। मोदी लहर की इस आंधी में सुल्तानपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री व भाजपा उम्मीदवार मेनका संजय गांधी को गठबंधन के प्रत्याशी बाहुबली चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह से कड़ी टक्कर के बाद मात्र 12 हजार 392 वोट से जीत दर्ज की है। 

  भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार मेनका गांधी को चार लाख, बावन हजार,छह सौ चौरानबे मत मिले तो वहीं दूसरे स्थान पर गठबंधन के बसपा उम्मीदवार चंद्रभान सिंह उर्फ सोनू सिंह को चार लाख, चालीस हजार, दो सौ सत्तानबे मत मिले। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के डॉक्टर संजय सिंह को एकतालीस हजार दो सौ त्रियासी मत पर ही संतोष करना पड़ा। 

  सुल्तानपुर में प्रियंका गांधी के रोड शो का कोई जादू नहीं चल पाया। सुल्तानपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के मुकाबले कांग्रेस से डॉ. संजय सिंह व गठबंधन से बाहुबली चंद्रभद्र सिंह चुनाव मैदान में थे। मेनका गांधी चुनाव मैदान में उतरी तो सप्ताह भर में ही उन्हें अपने असली प्रतिद्वंदी का एहसास हो गया। उन्होंने अपनी सभाओं में गठबंधन के उम्मीदवार सोनू सिंह को निशाने पर लिया। हालात तो यह हो गए थे कि गठबंधन उम्मीदवार के विरोध और उन्हें कद को छोटा करने के लिए वरुण गांधी भी आ गए। मां और बेटे ने मिलकर सोनू सिंह के खिलाफ प्रचार में जमकर मोर्चा खोला। 

 मेनका गांधी तो घोषणा के बाद से लगातार सुल्तानपुर में जमी रही और अपने पक्ष में तरह तरह के माहौल बनाने का प्रयास किया बावजूद इसके कुछ ज्यादा प्रभाव नहीं बना सकी। अंततः शहरी क्षेत्र के ईवीएम ने उन पर जीत का सेहरा बांध दिया। गठबंधन उम्मीदवार चंद्र भद्र सिंह लगातार लगे रहे। स्थानीय होने तथा एमएलसी शैलेन्द्र प्रताप सिंह के व्यक्तिगत प्रभाव का नतीजा रहा कि उन्हें कई क्षेत्रों में अच्छी मजबूती मिली। लेकिन मोदी लहर के प्रभाव से वह जीत दर्ज नहीं कर सके। 

  कांग्रेस उम्मीदवार डॉ संजय सिंह तो शुरू से लड़ाई से बाहर रहे। मतगणना में भी लगभग वही दिखा। उनके पक्ष में कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा का रोड शो भी कोई जादू नहीं कर सका। 9662 मतदाताओं ने इन 15 उम्मीदवारों में से किसी को भी पसंद नहीं किया और नोटा पर अपनी सहमति व्यक्त की। सुल्तानपुर की जनता ने किसी महिला को संसद तक कभी नहीं पहुंचाया। 1998 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा जोशी की बेटी एवं प्रयागराज की निर्दलीय रही रीता बहुगुणा जोशी को प्रत्याशी बनाया था। उस समय भाजपा के डी.वी. राय ने इन्हें शिकस्त दी थी। 1999 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गांधी परिवार की करीबी दीपा कौल को प्रत्याशी बनाया था। दीपा कौल को चौथे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में बसपा के जय भद्रसिंह चुनाव जीत गए थे। 

  2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने डॉ वीणा पांडे को प्रत्याशी बनाया था। इस चुनाव में भी श्रीमती पांडे को चौथे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा था। बसपा के मोहम्मद ताहिर खान विजयी हुए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी नरेश डॉ संजय सिंह की पत्नी डॉ अमिता सिंह चुनाव मैदान में थी इस चुनाव में भाजपा के वरुण गांधी विजय हुए थे अमिता सिंह को चौथे स्थान पर ही जगह मिली थी। 2014 के चुनाव में डॉ संजय सिह की पत्नी अमिता सिंह मैदान में थी जिन्हें करारी शिकस्त भी खानी पड़ी थी। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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