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पवार परिवार में कलह की आहट!

14/10/2019

पवार परिवार में कलह की आहट!

सुधीर जोशी

पहले से हाशिये पर पहुंच चुकी राकांपा के लिए पवार परिवार की आंतरिक कलह पार्टी पर भारी पड़ सकती है।

राज्य के राजनीतिक घरानों में सबसे बड़े पवार घराने में उठापटक जारी है। पांच दशकों से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय शरद पवार इन दिनों अनेक संकटों के दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ उनकी पार्टी के कई दिग्गजों ने कांग्रेस तथा शिवसेना का दामन थामा है तो दूसरी ओर राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर आने वाले दिनों में शरद पवार की दूसरी, तीसरी पीढ़ी के बीच टकराव की स्थिति पैदा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
शिखर सहकारी बैंक में नाम आने के बाद जब शरद पवार ने खुद ही ईडी के कार्यालय में जाने की घोषणा की और जिस दिन पवार ईडी कार्यालय में जाने वाले थे, उस दिन शरद पवार के मुंबई स्थित आवास पर शरद पवार समेत राकांपा के लगभग सभी बड़े नेता थे, केवल नहीं थे तो अजित पवार। संकट के समय शरद पवार के साथ अजित पवार का न होना, कई सवालों को जन्म देता है।
बगैर अनुमति के ईडी कार्यालय में जाने की घोषणा के बाद शरद पवार के समर्थकों द्वारा राज्य के अलग अलग स्थानों पर केंद्र तथा राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई, उससे राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो गई। बिगड़ते हालात को देखते हुए ईडी के मुंबई कार्यालय से शरद पवार के घर यह संदेश भेजा गया कि वे ईडी कार्यालय न आए। इसके लिए मुंबई के पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे को शरद पवार के घर आना पड़ा और उनसे अपील की कि वे ईडी कार्यालय न जाए। खुद राज्य के गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके शरद पवार ने हालात को देखते हुए ईडी कार्यालय न जाने का निर्णय लिया।
इस घटनाक्रम के बीच एक गौर करने बात यह रही कि शरद पवार के बाद परिवार में जिस व्यक्ति की सबसे ज्यादा चलती है, वे हैं अजित पवार। वह शरद पवार के साथ नहीं थे। अजित पवार ने शिखर बैंक घोटाले में राकांपा सुप्रिमो शरद पवार का नाम आने के बाद अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि पहले यह कहा जा रहा था कि अजित पवार ने शिखर बैंक घोटाले में शरद पवार का नाम आने से आहत होकर विधायक पद से इस्तीफा दिया है। लेकिन पूरे मामले की पड़ताल करने पर पता चला कि छोटे पवार बड़े पवार का सहकारी बैंक घोटाले में नाम आने ज्यादा इस बात को लेकर आहत हैं कि पवार घराने के दो युवराजों पार्थ पवार (अजित पवार के पुत्र) तथा रोहित पवार (अजित पवार के भतीजे) को लेकर परिवार में कलह बढ़ गयी है।
अजित पवार शरद पवार से इसलिए नाराज हैं, क्योंकि उनके पुत्र पार्थ को शरद पवार ने मावल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवारी दी थी। पार्थ पवार वहां से लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाए, इसी बात का मलाल अजित पवार को है। इसके अलावा राकांपा में इन दिनों सुप्रिया सुले का दबदबा कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। जिस तरह शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे को शिवसेना के हर कार्यक्रम में आगे ला रहे हैं, उसी तरह राकांपा प्रमुख शरद पवार अपनी सुपुत्री तथा अमरावती की सांसद सुप्रिया सुले को हर कार्यक्रम में आगे कर रहे हैं। अजित पवार बेहद गरम मिजाज वाले नेता हैं।
विधानसभा चुनाव 2009 के बाद अजित पवार ने सिंचाई घोटाले में नाम आने के बाद उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह एक बार फिर अजित पवार ने सहकारी बैंक ऋण वितरण घोटाले में नाम सामने आने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। अब देखना यह है कि शरद-अजित के इस टकराव का अंत कहा तक जाता है। पवार के करीबियों का कहना है कि शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। शायद इसीलिए शरद पवार, अजित पवार, उनके पुत्र पार्थ पवार से ज्यादा सुप्रिया सुले और रोहित पवार के रूप में महाराष्ट्र में राकांपा का नया नेतृत्व सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।
शरद पवार आगामी 12 दिसंबर को 80 वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। ऐसे में पहले जैसा सक्रिय रहना संभव नहीं है। इसलिए शरद पवार की चाहत हैं कि राकांपा को युवा नेतृत्व दिया जाए। सच तो यह है कि रोहित और पार्थ के रूप में सामने आए दो युवा नेतृत्व की वजह से राकांपा अपनी खोई ताकत तो वापस जरूर मिल सकती है लेकिन इसके लिए उन्हें सुप्रिया सुले तथा अजित पवार दोनों को भी साथ मिलना पड़ेगा।


 
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