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कोरोना का भय : हमीरपुर में 26 मौरंग खदानें बंद, हजारों मजदूरों की बढ़ी परेशानी

24/03/2020

-करीब ढाई हजार ट्रकों के पहिये थम जाने से हजारों चालक व खलासी भी हुये बेरोजगार

पंकज मिश्रा
हमीरपुर, 24 मार्च (हि.स.)। कोरोना वायरस के लगातार फैलाव को लेकर हमीरपुर जिले में मौरंग की 26 खदानें बंद कर दी गयी है। इन मौरंग खदानों में काम कर रहे हजारों मजदूर बेरोजगार हो गये हैं। मौरंग खदानों की बंदी के कारण पांच हजार से अधिक चालक भी घर बैठ गये हैं। 

देश में कोरोना वायरस का फैलाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी चौन को तोड़ने के लिये योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एहितियाती फैसले लेते हुये राज्य के 16 जनपदों को लाक डाउन कर दिया है। हालांकि पड़ोसी जनपद कानपुर सीमा से जुड़े हमीरपुर को अभी लाक डाउन नहीं किया गया है जिससे सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों के लोग अपने प्राइवेट वाहनों से कानपुर से हमीरपुर अप-डाउन कर रहे हैं। उनमें भी वायरस को लेकर खौफ देखा जा रहा है। कानपुर के प्रमुख अखबारों की सप्लाई में लगे प्राइवेट वाहनों पर भी लोगों का हमीरपुर और कानपुर आना-जाना जारी है।

इससे यहां के लोगों में वायरस के संक्रमण को लेकर भय देखा जा रहा है। सरकार के आदेश पर रोडवेज निगम की बसें और प्राइवेट बसें पूरी तरह से बंद है लेकिन आकस्मिक सेवाओं से जुड़े संस्थानों के वाहनों पर प्रतिबंध न लगाये जाने के बावजूद लोग दहशत में हैं।

इधर जिला खनिज अधिकारी ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुये 26 मौरंग की खदानें बंद करा दी हैं। जिला खनिज अधिकारी शनि कौैशल ने मंगलवार को बताया कि कोरोना वायरस के फैलाव के बचाव में एहतियातन सभी मौरंग खदानों की ओटीपी बंद कर दी गयी है। इससे करोड़ों रुपये के राजस्व का झटका लगेगा। उन्होंने बताया कि खदानें बंद होने से मौरंग परिवहन में लगे ट्रकों के पहिये भी थम गये हैं। 

भाजपा नेता एवं समाजसेवी राजीव शुक्ला ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण यहां हर रोज करीब ढाई हजार ट्रक मौरंग का परिवहन करते थे। इनमें चालकों और खलासी के परिवारों का भरण पोषण होता है, लेकिन अब कोरोना के कारण पांच हजार ट्रक चालक और खलासी घर बैठ गये हैं। उन्होंने बताया कि मौरंग खदानों में दस हजार से अधिक गरीब लोगों के घरों के चूल्हे जल रहे थे, जो खदानें बंद हो जाने से अब मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। 

मौरंग खदानें बंद होने से हजारों मजदूरों के घरों में चूल्हे बुझे 
बताया जाता है कि जनपद में मौरंग खदानों में बड़ी संख्या में यहां के लोग काम करते हैं। एक मौरंग खदान से कम से कम सौ लोगों के घरों के चूल्हे जलते हैं, लेकिन आज से इन मजदूरों के लिये संकट के दिन शुरू हो गये हैं। कुरारा, सुमेरपुर, पत्यौरा, पौथिया, मौदहा, चिकासी, जलालपुर, जरिया, राठ क्षेत्र के अलावा सदर कोतवाली क्षेत्र में खदानों के बंद हो जाने से मजदूरों के घरों के चूल्हे जलने का संकट गहरा गया है। कोरोना वायरस को लेकर हर जगह सन्नाटा पसर गया है। कही कोई काम न मिलने से मजदूरों में खाने पीने के लाले पड़ गये हैं। मौरंग कारोबारी अशोक सचान ने बताया कि सरकार के फैसले जनहित के हैं जो समय रहते बहुत जरूरी था। एक बड़े नुकसान से बचाने के लिये इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। 

निर्माण कार्य बंद होने से भुखमरी के मुहाने आये मजदूर
कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर यहां आपात काल जैसे हालात है। ज्यादातर लोग घरों में रहने को मजबूर है। कल तक जो लोग बेतवा नदी से मौरंग निकलाकर ठिलिया और रिक्शे में लादकर गली कूचों में बेचते थे वह भी अब घर बैठ गये हैं क्योंकि प्राइवेट व सरकारी निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गये है। समाजसेवी विजय द्विवेदी एडवोकेट ने बताया कि हमीरपुर नगर के रमेड़ी, केसरिया का डेरा, डिग्गी, मेरापुर, भिलांवा, पारा, सिडऱा, कलौलीतीर, कुछेछा, टिकरौली सहित दर्जनों इलाकों के केवट बिरादरी के लोग ठिलिया और रिक्शे में मौरंग लादकर फुटकर सप्लाई करते थे लेकिन हर जगह निर्माण बंद है। सरकारी योजनाओं के भी कार्य बंद होने से बड़ी संख्या में लोग जीविकोपार्जन नहीं कर पा रहे हैं। 

होटल व्यवसाय भी धड़ाम, कारीगर और लेबर घर बैठे
कोरोना के खौफ के कारण यहां होटल और भोजनालय बंद हो गये है। जनता कर्फ्यू के बाद हमीरपुर में कुछ होटल खुले लेकिन ग्राहकों के न आने से होटल व्यवसाय पूरी तरह से धड़ाम हो गया है। होटल व्यवसायी दीपू ने बताया कि वायरस के भय से ग्राहक घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। जो लोग आ भी रहे हैं वह कुछ भी नहीं ले रहे हैं। होटल में खाने पीने का सामान बनाने वाले कारीगर घर बैठ गये हैं। वहीं लेबर भी बेरोजगार हो गये हैं। नगर के बस स्टाप में बाजपेई होटल, कंचन होटल सहित अन्य सैकड़ों होटल भी सन्नाटा है। बाजपेई होटल तो बीतें तीन दिनों से बंद है। इस होटल में कई कारीगर व तमाम लोग काम करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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