युगवार्ता

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भाजपा सरकार की अग्नि परीक्षा

14/10/2019

भाजपा सरकार की अग्नि परीक्षा

मुनीष बन्याल

राज्य में दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव होने हैं। धर्मशाला और पच्छाद सीटों पर भाजपा जहां सत्तासीन होने का फायदा उठाएगी, वहीं विपक्षी कांग्रेस के पास साख वापिस पाने की चुनौती होगी।

देवभूमि हिमाचल में आयोजित होने जा रहे दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव सत्तासीन भाजपा सरकार और विपक्षी कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती पेश करने जा रहे हैं। भाजपा सरकार के लिए जहां यह उपचुनाव लगभग एक साल दस महीने के कार्यकाल की परीक्षा होगी, वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस के लिए एक खोई हुई साख को बचाने की चुनौती होगी। पिछले लोकसभा चुनावों में दो भाजपा के विधायकों के सासंद बनने पर धर्मशाला और पच्छाद विधानसभा सीटें खाली हो गई थीं। इन दोनों ही खाली सीटों के लिए 21 अक्तूबर को विधानसभा उपचुनाव होने जा रहे हैं।
24 अक्टूबर को नतीजे घोषित होंगे। इन सीटों पर हार जीत का भले ही भाजपा सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता हो, लेकिन दूसरे कई मायनों में यह नतीजे काफी महत्वपूर्ण होंगे। रोचक तथ्य यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इन सीटों पर अपनों की बगावत के चलते नई तरह की चुनौती से जूझ रहे है। पच्छाद विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पुराने चेहरे गंगूराम मुसाफिर को मैदान में उतारा है, तो भाजपा ने नए चेहरे रीना कश्यप को टिकट दिया है। मुसाफिर अपने अनुभव के सहारे कांग्रेस की चुनावी वैतरणी को पार लगाने की कोशिश करेंगे, वहीं रीना कश्यप सत्तासीन भाजपा सरकार का लाभ लेते हुए भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगी। रीना कश्यप 2006 से भाजपा की सदस्य हैं। इसके अलावा वह जिला परिषद की सदस्य रही हैं।
भाजपा एससी मोर्चा की मीडिया सह प्रभारी पद पर भी हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में भी गंगूराम मुसाफिर ने विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह बीजेपी के सुरेश कश्यप से हार गए थे। वह मंत्री के अलावा हिमाचल विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। प्रदेश के दूसरे विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला के उपचुनाव की बात करें तो यहां मुकाबला अपनों की बगावत के चलते काफी रोचक रहेगा। कांग्रेस के चिरपरिचित चेहरे व पूर्व मंत्री सुधीर इस बार चुनाव लड़ने से कन्नी काट चुके हैं, तो ऐसे में कांग्रेस ने नए चेहरे विजय इंद्र कर्ण को मैदान में उतारा है। उनके सामने भाजपा की तरफ से युवा नेता विशाल नैहरिया चुनाव लड़ रहे हैं। काफी दिन से इस विधानसभा सीट के लिए भाजपा में टिकट को लेकर माथापच्ची चल रही थी। नैहरिया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे हैं।
इसके अलावा वे कॉलेज व रीजनल सेंटर में एससीए प्रधान भी रहे हैं। वर्तमान में वे भाजपा युवा मोर्चा के राज्य सचिव हैं। गौरतलब है कि धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से लगभग तीन दशक बाद भाजपा का चेहरा बदल रहा है। इससे पहले तक कांगड़ा से वर्तमान सांसद किशन चंद कपूर इस विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे थे। भाजपा की जीत सुनिश्चित करने लिए नए चेहरे नैहरिया के लिए गद्दी समुदाय से संबंध रखना और भाजपा का सत्तासीन होना ही काफी नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें बागियों के भीतरधात की चुनौती को भी पार करना होगा। इसी तरह यहां कांग्रेस भी बागियों की चुनौती का सामना कर रही है। इस सीट के लिए लगभग दोनों ही राजनीतिक दलों से लगभग दर्जन भर उम्मीदवार टिकट के लिए लॉबिंग कर रहे थे।

संगठन के अनुशासित सिपाहियों पर भाजपा की मार
भाजपा के युवा संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से लंबे समय से जुड़े रहे अनुशासित सिपाहियों पर इन चुनावों में सबसे बड़ी मार पड़ी है। हालांकि भाजपा कुछ हद तक इन्हें मनाने में सफल भी हुई है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी धर्मशाला से उमेश दत्त का नाम घोषित हो चुका था लेकिन आखिरी समय में पार्टी ने किशन कपूर को चुनाव मैदान में उतारा था। कपूर के सार्वजनिक विद्रोह करने पर भाजपा ने उमेश दत्त को टिकट देने के बाद भी उनका नाम वापिस ले लिया था।
इस बार फिर व विशाल नैहरियां के सर्मथकों ने सार्वजनिक तौर पर विरोध किया तो उमेश दत्त का टिकट पर भाजपा ने फिर कैंची चला दी। इसी तरह पच्छाछ विधानसभा क्षेत्र से भी विद्यार्थी परिषद के नेता आशीष सिक्टा भी अंत तक अनुशासित सिपाही बने रहे तो उनके टिकट पर भी भाजपा ने कैंची चला दी है। सिक्टा विद्यार्थी परिषद के प्रदेश विश्वविद्यालय में हुए छात्र संघर्ष के चलते लगभग एक साल तक जेल में रहे। आशीष सिक्टा ने पच्छाद विधानसभा क्षेत्र बतौर आजाद प्रत्याशी नामांकन भरा है। लेकिन मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद भाजपा आशीष सिक्टा को मनाने में सफल रही है। जिस पर सिक्टा को अपने समर्थकों के कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा।
उनके समर्थकों ने तो उन पर बिकने का भी आरोप लगा दिया। इसी तरह पच्छाद से भाजपा की एक और कार्यकर्ता दयाल प्यारी जो वोटरों में अच्छी पकड़ रखने वाली मानी जाती हैं, ने भी बतौर आजाद उम्मीदवार अपना नामांकन भरा है। भाजपा ने इन्हें पहले मना लिया था। लेकिन वीरवार को अपने समर्थकों के दवाब के चलते वे चुनाव मैदान में डटी रहीं। अब पच्छाद से पांच पत्याशी चुनाव म्मैदान में हैं। जबकि धर्मशाला से सात उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है।


 
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