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शटल परी सिंधु की ऊंची उड़ान

06/09/2019

शटल परी सिंधु की ऊंची उड़ान

मोहम्मद शहजाद

एक चैम्पियन की तरह खेलकर पीवी सिंधु ने जैसे ही विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया, देशवासी गर्व से भर गए। इस खिताब के बाद अब उनसे ओलंपिक पदक की उम्मीद बढ़ गई है।

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के करियर की शटल ने अब तक की सबसे ऊंची उड़ान भरी है। उन्होंने स्विट्जरलैण्ड में आयोजित हालिया विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह कारनामा अंजाम देने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। देश को इसका सालों से इंतजार था। इससे पहले इस टूर्नामेंट के महिला, पुरुष या फिर डबल्स समेत किसी भी वर्ग में भारत की तरफ से कोई भी खिलाड़ी सोने का तमगा नहीं जीत सका था। देखा जाए तो पूरी प्रतियोगिता में पीवी सिंधु का अभियान जबरदस्त रहा।
फाइनल मुकाबले में उन्होंने अपने से बेहतर चौथी रैंकिंग वाली खिलाड़ी जापान की नोजोमी ओकुहारा को एकतरफा मुकाबले में महज 37 मिनट में 21-7, 21-7 से शिकस्त दे दी। मानो उन्होंने ओकुहारा से दो साल पहले इसी टूर्नामेंट के फाइनल मैच में मिली हार का बदला ले लिया हो। यही नहीं पांचवी विश्व रैंकिंग होल्डर सिंधु ने इस टूर्नामेंट में पहले क्वार्टर फाइनल में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी ताइपे की ताइपे जूएंग को और फिर सेमिफाइनल में तीसरे नंबर की खिलाड़ी चीन की खिलाड़ी चेन यु फेइ को परास्त किया।
पीवी सिंधु की यह जीत कई मायनों में अभूतभूर्व है। दरअसल पिछले कुछ समय से कई बड़े टूर्नामेंट में धाकड़ प्रदर्शन करने के बावजूद फाइनल में हारने की वजह से खिताब उनके हाथ से फिसल जाते थे। रियो ओलंपिक, विश्व चैम्यिनशिप, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल समेत इसकी कई नजीरें हैं। अब तक उन्होंने बड़े टूर्नामेंट्स में 25 फाइनल मैच खेले, लेकिन इनमें से केवल 10 बार ही जीत दर्ज की। यही वजह है कि आलोचकों ने उन्हें फाइनल के चोकर तक का तमगा दे दिया। लेकिन इस विश्व चैंपियनशिप में सोने के तमगे से उन्होंने इसका जवाब दे दिया। विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में वे 2013 और 2014 में लगातार दो बार कांस्य पदक जीत चुकी हैं। फिर 2017 और 2018 में उन्होंने इस चैम्पियनशिप में बैक-टू-बैक दो बार रजत पदक जीता था। विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के इतिहास में भारत की झोली में अब तक कुल 10 पदक आए हैं जिनमें एक गोल्ड, तीन सिल्वर और 6 ब्रोंज मेडल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन दस तमगों में अकेले पीवी सिंधु के पांच पदकों का योगदान है।
इस तरह उन्होंने एक और इतिहास रच दिया। वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पदकों की संख्या के मामले में सिंधु ने चीन की पूर्व ओलंपिक चैम्पियन झांग निंग के पांच पदकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। फिर जिस तरह उनका करियर अभी अपने चरम पर है, उनसे इस रिकॉर्ड को तोड़ने और उससे काफी आगे निकलने की उम्मीदें की जा रही हैं। साइना नेहवाल की तरह ही पीवी सिंधु भी हैदराबाद से आती हैं। खेल भावना उन्हें विरासत में मिली है। अलबत्ता यह अलग बात है कि उनके पिता पी.वी. रमन्ना और मां पी. विजया, दोनों ही वॉलीबॉल के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने महबूब अली नामी कोच से बैडमिंटन के आरंभिक गुर सीखे, लेकिन उनके खेल में चार-चांद लगाने का काम मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ने अपनी अकादमी के जरिए किया।
उन्होंने जूनियर लेवल से ही अपने खेल का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था लेकिन 2013 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद वे सुर्खियों में आईं। उस समय भारतीय महिला बैडमिंटन के क्षितिज पर साइना नेहवाल का एकछत्र राज था। पीवी सिंधु ने अपनी मेहनत और लगन से अपना अलग मकाम बनाया। अप्रैल 2017 में वे विश्व रैंकिंग में अपने करियर के श्रेष्ठ दूसरे नंबर पर पहुंचीं। अब इस मुकाम के बाद उनसे टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में गोल्ड मेडल की आशा की जा रही है।





 
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