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क्लीन चिट पर बिफरे उप मुख्यमंत्री

06/07/2019

क्लीन चिट पर बिफरे उप मुख्यमंत्री


अरुण कुमार पाण्डेय

सरकारी बंगले की साज-सज्जा पर अधिक खर्च के मामले में पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को नीतीश सरकार ने क्लीन चिट दे दी है। अचानक क्लीन चिट देने की दरकार ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

नीतीश सरकार इन दिनों क्लीन चिट विवाद में उलझ गयी है। यह विवाद विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के उप मुख्यमंत्री रहते उनके सरकारी बंगला के साज—सज्जा पर पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च को क्लीन चिट देने का है। सरकार के क्लीन चिट दिये जाने पर राजद ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से इस्तीफा की मांग कर दी वहीं मोदी ने क्लीन चिट को ही खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि तेजस्वी ने 5 देशरत्न मार्ग स्थित साज—सज्जा पर अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये खर्च किया। आखिर किस नियम के तहत तेजस्वी ने भवन निर्माण विभाग के अतिरिक्त पुल निर्माण निगम से 59 लाख का कीमती फर्नीचर मंगवाया।
किस प्रावधान के तहत केवल कमरे में ही नहीं बल्कि शौचालय तक में एसी लगवाए गए। तेजस्वी के बंगले की 7 स्टार वाली साज—सज्जा के बाद ही तो भवन निर्माण विभाग को नई गाइड लाइन जारी करनी पड़ी। ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति तेजस्वी की तरह सरकारी धन का दुरुपयोग न कर सके। दरअसल लोकसभा के 16 और राज्य सभा के 6 सदस्य वाले जदयू को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में एक पद देकर सांकेतिक साझेदारी नहीं स्वीकार करने के कारण संबंधों में तल्खी आयी है। जदयू के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्रियों के समारोह में शरीक तो हुए, परंतु पटना लौटते ही जो कुछ कहा, वह अप्रत्याशित था।
जदयू के अध्यक्ष के नाते उन्होंने ऐलान किया कि भविष्य में उनका दल न तो केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होगा और न इस संबंध में कभी बातचीत करेगा। उसके बाद नीतीश ने राज्य मंत्रिमंडल का पहला विस्तार कर जदयू कोटे से आठ नये मंत्रियों को शामिल कर लिया। भाजपा कोटे की दो सीटें खाली रह गयी। हालांकि उप मुख्यमंत्री ने उस समय कहा कि मंत्रिपरिषद की उन्हें पहले न सिर्फ जानकारी दी गयी, बल्कि भाजपा कोटे में नये मंत्री शामिल करने का प्रस्ताव भी मांगा गया। जदयू—भाजपा की नयी सरकार बनने के बाद बंगला विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी को न सिर्फ फटकार लगायी, बल्कि 50 हजार रुपये का जुर्माना भी कर दिया। नीतीश सरकार ने उप मुख्यमंत्री के रूप में तेजस्वी को मिला सरकारी बंगला सुशील कुमार मोदी के नाम आवंटित कर दिया।

साज-सज्जा को लेकर नई गाइड लाइन
भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने 21 मार्च, 2019 को सरकारी बंगलों की साज—सज्जा को लेकर नये दिशा— निर्देश जारी किये थे। इसमें सरकारी राशि का अपव्यय रोकने के लिए कई बदलाव किये गये है। इसके अनुसार अगर भविष्य में अनुमान्य राशि से अधिक राशि खर्च होगी, तो यह आवासी को ही वहन करना होगा। 5, देशरत्न मार्ग आवास की तरह वॉकिंग ट्रैक, महाराजा गेट, अतिरिक्त रसोईघर व भोजन कक्ष, तालाब निर्माण, आउट हाउस में टाइल्स, हरित स्थानों पर टाइल्स किसी प्रकार का वूडेन μलोरिंग आदि पर सख्त मनाही कर दी गयी है।

बंगला आवंटन को लेकर तेजस्वी सुप्रीम कोर्ट गये। वहां न सिर्फ निराशा हाथ लगी, बल्कि इसी कारण नीतीश कुमार, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्र व सतीश प्रसाद को पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मिला सरकारी बंगला भी खाली करने की नौबत आ गयी। लालू के छोटे बेटे तेजस्वी पहली बार विधायक बनने के साथ उप मुख्यमंत्री और पथ एवं भवन निर्माण विभागों के मंत्री बने थे। उसी समय सरकारी बंगला की साज—सज्जा पर सरकारी धन लुटाने का उदाहरण सामने आया। परंतु भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने साज—सज्जा पर नियमों की अवहेलना किये जाने से साफ इंकार कर दिया। जानकार मानते हैं कि सरकार का तेजस्वी को क्लीन चिट यू ही नहीं दी गई है। हाल के वर्षों में मुख्यमंत्री आवास के विस्तार और इसकी साज—सज्जा पर भी 10 करोड़ से अधिक खर्च हुए हैं। इसको लेकर भी लोग सरकार से हिसाब— किताब नहीं लें, इसके कारण तेजस्वी के बंगला प्रकरण को सरकार की ओर से पटाक्षेप किया गया है।
जदयू-भाजपा के बीच संबंधों में आयी तल्खी के बीच तेजस्वी को नीतीश सरकार के क्लीन चिट का राजनीतिक अर्थ भी निकाले जाने लगे हैं। इसे भविष्य में फिर नीतीश कुमार की ओर विधानसभा चुनाव तक नयी राजनीतिक दिशा की तलाश के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। अभी बिहार में चमकी बुखार से मासूमों की मौत को लेकर नीतीश सरकार राजनीतिक कठघरे में है। भाजपाई स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय से इस्तीफे की मांग हो रही है।


 
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