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रक्तदान बचाए अनमोल जान

13/06/2019

(विश्व रक्तदान दिवस, 14 जून पर विशेष)

योगेश कुमार गोयल
क्तदान को दुनियाभर में सबसे बड़ा दान माना गया है, क्योंकि रक्तदान ही है, जो न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है बल्कि जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियों के रंग भी भरता है। कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है और आप एकाएक उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। आपके द्वारा किए गए रक्तदान से उसकी जिंदगी बच जाती है तो आपको स्वयं कितनी खुशी होगी। हालांकि एक समय था, जब मेडिकल साइंस इतनी विकसित नहीं थी और किसी को यह पता ही नहीं था कि किसी दूसरे व्यक्ति का रक्त चढ़ाकर किसी मरीज का जीवन बचाया जा सकता है। उस समय रक्त के अभाव में असमय होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत ज्यादा था, किन्तु अब स्थिति बहुत अलग है। यह विडम्बना ही कही जाएगी कि रक्तदान के महत्व को समझने के बावजूद रक्त के अभाव में आज भी दुनियाभर में प्रतिवर्ष करोड़ों लोग असमय काल के ग्रास बन जाते हैं। इसमें अकेले भारत में ही रक्त की कमी के चलते होने वाली मौतों की संख्या करीब 20 लाख होती है, क्योंकि देश में हर साल करीब 25 लाख यूनिट रक्त की कमी रह जाती है। दरअसल, समाज में आज भी रक्तदान को लेकर ढेरों गलत धारणाएं विद्यमान हैं। जैसे, रक्तदान करने से संक्रमण का खतरा रहता है। शरीर में कमजोरी आती है। बीमारियां शरीर को जकड़ सकती हैं या एचआईवी जैसी भयानक बीमारी हो सकती है। 
इन भ्रांतियों को लेकर लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाते रहे हैं, किन्तु अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान करने से शरीर को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता। बल्कि, रक्तदान से शरीर को काफी सारे फायदे होते हैं। जहां तक रक्तदान से संक्रमण की बात है तो सभी स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा रक्त लेते समय विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय मानक अपनाए जाते हैं। इसलिए संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता। 18 साल से अधिक उम्र का शारीरिक रूप से स्वस्थ, कम से कम 45 किलो से अधिक वजन का कोई भी वयस्क स्वेच्छा से कम से कम तीन माह के अंतराल पर रक्तदान कर सकता है। 
कुछ लोगों को रक्तदान के समय हल्की कमजोरी का अहसास हो सकता है, किन्तु यह चंद घंटों के लिए ही होता है। इसके उलट रक्तदान के फायदों की चर्चा करें तो रक्तदान करते रहने से खून की प्राकृतिक रूप से सफाई होती है और रक्त कुछ पतला हो जाने से खून में थक्के नहीं जमते। फलत: हार्टअटैक की आशंका बेहद कम हो जाती है। रक्तदान के बाद शरीर में जो नए ब्लड सेल्स बनते हैं, उनमें किसी भी बीमारी से लड़ने की अपेक्षाकृत अधिक ताकत होती है। स्वच्छ व ताजा रक्त शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मददगार होता है। इससे न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप नियंत्रित रहता है, बल्कि कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों से बचाव, कुछ हद तक मोटापे पर नियंत्रण तथा कई संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। रक्त में आयरन की मात्रा नियंत्रित हो जाने से लीवर की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। 
जीवनदायी रक्त की महत्ता के मद्देनजर लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से 14 जून 1868 को जन्मे कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिवस पर 14 जून 2004 को रक्तदान दिवस की शुरूआत की गई थी। तब पहली बार विश्व स्वास्थ्य संगठन, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रॉस तथा रेडक्रिसेंट सोसायटीज द्वारा 'रक्तदान दिवस' मनाया गया था। तभी से यह दिन 'रक्तदान' के नाम कर दिया गया। विश्व रक्तदान दिवस की शुरूआत का उद्देश्य यही था कि चूंकि दुनियाभर में लाखों लोग समय पर रक्त न मिल पाने के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं। अतः लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूक किया जाए। हमारे शरीर में कुल वजन का करीब 7 फीसदी रक्त होता है। अगर हम उसमें से 3 फीसदी दान भी कर दें तो स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं आती। वैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशानुसार एक बार में किसी व्यक्ति का एक यूनिट अर्थात् 450 मिलीलीटर से अधिक रक्त नहीं लिया जा सकता। इस रक्त की पूर्ति हमारा शरीर खुद ही 2-3 दिनों में कर लेता है। रक्तदान के बाद प्राप्त रक्त से आवश्यकतानुसार लाल रक्त कणिकाएं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और क्रायोप्रेसिपिटेट अलग कर मरीजों के लिए उपयोग किए जाते हैं। आरबीसी का उपयोग रक्त लिए जाने के 42 दिन बाद तक किया जा सकता है जबकि प्लेटलेट्स सिर्फ 5 दिन के अंदर उपयोग की जा सकती हैं।
रक्तदान करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए, तभी आप द्वारा किया गया रक्तदान सार्थक होगा। आपको एचआईवी, एड्स, मलेरिया, हेपेटाइटिस, अनियंत्रित मधुमेह, किडनी संबंधी रोग, उच्च या निम्न रक्तचाप, टीबी, डिप्थीरिया, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, एलर्जी, पीलिया जैसी कोई बीमारी हो तो रक्तदान न करें। यदि आपको टाइफाइड हुआ हो और ठीक हुए महीनाभर ही हुआ हो, चंद दिनों पहले गर्भपात हुआ हो, तीन साल के भीतर मलेरिया हुआ हो, पिछले छह महीनों में किसी बीमारी से बचने के लिए कोई वैक्सीन लगवाई हो, आयु 18 से कम या 60 साल से ज्यादा हो, माहवारी के दौरान या गर्भवती अथवा स्तनपान कराने वाली महिलाएं रक्तदान करने से बचें। जब भी रक्तदान करें तो उससे कुछ समय पहले और कुछ समय बाद तक पर्याप्त पानी पीएं, भोजन में हरी सब्जियां तथा आयरन व विटामिन से भरपूर पौष्टिक आहार लें। रक्तदान से पहले जंक फूड, अधिक वसायुक्त भोजन के अलावा धूम्रपान, मद्यपान इत्यादि किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करने से बचें। शराब पीते हैं तो 2-3 दिन पहले शराब का सेवन बंद कर दें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष एक करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है किन्तु सिर्फ 75 लाख यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पाता है। अगर देश की कुल आबादी के लिहाज से देखें और यह मानकर चलें कि एक व्यक्ति साल में केवल एक बार ही रक्तदान करता है तो भी इसका अर्थ है कि महज आधा फीसदी लोग ही रक्तदान करते हैं। यह बेहद चौंकाने वाली स्थिति है। रक्त की कमी के चलते लाखों लोगों की मौतों के मद्देनजर यह नितांत आवश्यक है कि आमजन को रक्तदान के लिए प्रेरित करने और उसके फायदे समझाने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरण अभियान चलाया जाए। लोगों को समझाया जाए कि रक्तदान करने से उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता बल्कि अपने रक्त से एक अनमोल जीवन बचाकर आत्मिक संतुष्टि मिलती है। रक्तदान करने वाले व्यक्ति का एक रक्तदाता कार्ड भी बना दिया जाता है। इसका लाभ यह होता है कि यदि उसे या उसके किसी परिजन को सालभर के अंदर कभी रक्त की जरूरत पड़ जाती है तो वह इस रक्तदाता कार्ड के जरिये एक यूनिट रक्त ब्लड बैंक से आसानी से प्राप्त कर सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)


 
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