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पीएम का 5 पी मंत्र योगी ने अपनाया

01/04/2020

पीएम का 5 पी मंत्र योगी ने अपनाया

डॉ. रहीस सिंह
 


योगी आदित्यनाथ ने एक विजनरी एप्रोच को अपनाते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था में ग्रोथ और समावेशिता के साथ धारणीयता को मुख्य आयाम के रूप में संस्थापित किया। उत्तर प्रदेश देश के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित हो, इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन्वेस्टर्स समिट (फरवरी 2018) में ‘5 पी’ यानि पोटैंशियल, पॉलिसी, प्लानिंग, परफार्मेंस और प्रोग्रेस के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार को आगे बढ़ने के लिए मंत्र दिया था। इसी के अनुरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विकास का एक रोडमैप तैयार किया और उसी के अनुरूप प्रदेश को आगे बढ़ाया। इसी का परिणाम है कि तीन वर्ष पूरे होते-होते उत्तर प्रदेश की इकोनॉमी प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बनाने के संकल्प में एक निर्णायक घटक के रूप में सामने आ रही है। यदि उत्तर प्रदेश का माइक्रो आब्जर्वेशन करें तो स्पष्ट रूप से प्रदेश के पास सबसे बड़ा बाजार, सर्वाधिक स्किल्ड डेमोग्राफी, स्किल्ड प्रोफेशनल्स और सर्वाधिक ग्रोथ पोटेन्शियल है।

इसलिए प्रदेश के बेहतर प्रतिस्पर्धी बनने और भारतीय अर्थव्यवस्था को लीड करने की सर्वाधिक संभावनाएं इसी के पास हैं। इसे ध्यान में रखकर पिछले तीन वर्षों में योगी सरकार ने जिस इन्फ्रास्ट्रक्चर की रूपरेखा बनायी और उसे क्रियान्वित किया तथा कानून-व्यवस्था और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस सम्बंधी जो वातावरण निर्मित किया उसके चलते उत्तर प्रदेश कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए बेहतर डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। लेकिन प्रदेश की आर्थिक प्रगति में सस्टेनेबिलिटी और तीव्र ग्रोथ के लिए जरूरी है कि मल्टीडायमेंशनल डिवेलपमेंट हो। इस दिशा में रूरल हेल्थ, रूरल वेलफेयर और रूरल इकोनॉमी को समृद्ध बनाने की जरूरत थी। जब तक सोशियो-इकोनॉमिक भेदभाव खत्म नहीं होगा तब तक सोशल डायनॉमिक्स में बदलाव नहीं आ पाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस दिशा में कई आधारभूत कदम उठाए। मुख्यमंत्री ने बीते तीन वर्षों में कानून और व्यवस्था पर जीरो टालरेंस की नीति अपनाकर सुशासन को दृढ़ किया। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं को निचले स्तर तक पहुंचाकर सामाजिक-आर्थिक संरचना में आमूलचूल परिवर्तन किए। इस बदली हुई सामाजिक संरचना के कारण आम लोगों में कार्यक्षमता, कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धा की विशेषता पनपी और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुए। कृषकों को ऋणमोचन सुविधाओं सहित विभिन्न प्रकार की सहयोग सुविधाएं देकर समृद्ध किया। उन्होंने एक तरफ जीरो बजटिंग खेती के लिए प्रेरित कर इनपुट कॉस्ट कम करने के लिए प्रशिक्षित किया वहीं दूसरी तरफ धान, गेहूं, तिलहन, दलहन आदि फसलों की सरकारी खरीद कर उचित मूल्य प्रदान किए। इससे उनकी आय और बचतें बढ़ीं जिससे निवेश प्रेरणा बढ़ी और वे अपनी आय दो गुनी करने की ओर कुछ कदम और आगे बढ़ गये।

प्रदेश सरकार ने नई औद्योगिक नीति लागू की और निवेश फ्रेंडली 21 नई नीतियां बनाई। फरवरी 2018 में इंवेस्टर्स समिट का आयोजन किया जिसमें 4.68 लाख करोड़ रुपये के निवेश संबंधी एमओयू साइन हुए। इसके बाद प्रथम ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी एवं द्वितीय ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजनों के माध्यम से लगभग 2 करोड़ रुपये के निवेश की 371 परियोजनाएं क्रियान्वित हुईं। इससे लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावनाएं हैं। डिफेंस एक्सपो और बुंदेलखंड में डिफेंस इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग कॉरीडोर की दिशा में बढ़ते कदमों से उत्तर प्रदेश एक तरफ डिफेंस एवं मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ओर बढ़ेगा बल्कि देश की रक्षा रणनीति में निर्णायक हैसियत प्राप्त करेगा। इन्वेस्टर्स समिट और ओडीओपी योजना के आने के बाद एक तो प्रदेश का एमएसएमई उद्योग सक्रिय हुआ दूसरी तरफ ग्रामीण जीवन की निर्भरता कृषि अर्थव्यवस्था पर कम होने लगी।

इसी के संगत अनुपात में कृषि अधिशेष की स्थिति पहुंचना शुरू हो गयी है। इसका परिणाम यह हुआ कि एक तो प्रति इकाई ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्पादन बढ़ा, प्रतिव्यक्ति आनुपातिक आउटपुट बढ़ा जिसके फलस्वरूप ‘परकैपिटा रूरल डोमेस्टिक प्रॉड्यूस’ में वृद्धि हुई। स्वाभाविक है कि ग्राम और जिले एक साथ आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने शुरू हुए। दूसरी तरफ इससे प्रदेश के इन्क्लूसिव और सस्टेनेबल डिवेलपमेंट के साथ-साथ सोशियो-इकोनॉमिक जस्टिस स्थापित करने की दिशा में बढ़ने का अवसर मिला। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने ओडीओपी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हम क्लस्टर एप्रोच से परिचित थे लेकिन ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ एक पूरी होलिस्टिक इकोनॉमिक सिस्टम का निर्माण कर सकता है। ध्यान रहे किसी भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था तभी प्रगतिशील, समोवेशी, सस्टेनेबल और जस्टीशिएबल होगी जब प्रदेश की मानव पूंजी स्वस्थ हो।

इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश में रूरल हेल्थ का समृद्ध होना बेहद आवश्यक है। यदि प्रदेश स्वस्थ होगा यानि प्रदेश की मानव पूंजी स्वस्थ होगी, तो उसकी कार्य क्षमता और दक्षता भी बेहतर होगी। अगर कार्य क्षमता और दक्षता बेहतर होगी तो प्रतिव्यक्ति उत्पादन क्षमता बेहतर होगी। उत्पादन क्षमता बेहतर होगी तो निवेश पोटैंशियल अधिक होगी और निवेश पोटैंशियल निवेश प्रेरणा में वृद्धि करेगी। यही प्रेरणा निवेश में वृद्धि लाने में निर्णायक होगी। मुख्यमंत्री ने इन संभावनाओं को गंगा यात्रा और मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेले के जरिए आगे बढ़ाया। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश की सर्वाधिक पोटैंशियल आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पास है। इसलिए यदि सस्टेनेबिलिटी के साथ तीव्र विकास को प्राप्त करना है तो सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन आयामों को मजबूत और सक्रिय करना होगा।

इस दृष्टि से योगी सरकार ने गंगा यात्रा के माध्यम से गंगा के किनारे बसे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। इस यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार ने गंगा के तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा। इस तरह से ‘गंगा-यात्रा’ ने गंगा को आस्था से अर्थव्यवस्था तक विस्तार देने का काम किया। दूसरा प्रमुख पहलू ग्रामीण हेल्थ का है। इस संदर्भ में ग्रामीण क्षेत्र में कई विसंगतियां हैं जिसमें सबसे बड़ी है चिकित्सिकीय सुविधाओं की उपलब्धता और उनके प्रति लोगों की जागरूकता। अस्पतालों और चिकित्सा सेवा प्रदाताओं की उपलब्धता और दायित्व की। इन दोनों ही धरातलों पर हमारी ग्रामीण मानवीय पूंजी कमोबेश अपेक्षाओं के अनुरूप आपूर्ति से वंचित रह रही थी।

जबकि कोई भी आर्थिक चिंतक यह बता सकता है कि जब तक सामाजिक और मानवीय पूंजी समृद्ध नहीं होगी तब तक कार्य दक्षता और क्षमता में वृद्धि नहीं होगी। पूंजीगत क्षति (कैपिटल लॉस) और डेप्रिसिएशन में कमी नहीं आएगी। अगर ऐसा रहा तो ग्रामीण आर्थिक संरचना में न ही मौलिक परिवर्तन आएगा और न ही स्थायी ग्रोथ बढ़ पाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन आरोग्य मेले की शुरुआत की जो ग्रामीण स्वास्थ्य में समृद्धि लाकर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में वैल्यू एड करने में सहायक होगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए लाइफ लाइन की तरह होता है। इस दिशा में प्रदेश सरकार ने निर्णायक कदम उठाए। ध्यान रहे कि डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर बुंदेलखण्ड के लिए आने वाले समय में लाइफ लाइन सिद्ध होगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे तथा बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से आने वाले समय में पूर्वांचल और बुंदेलखंड में औद्योगीकरण की प्रक्रिया रμतार पकड़ेगी। 600 किमी के प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस वे, जेवर एयरपोर्ट एवं प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स हब अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेंगे। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को समृद्ध बनाएंगे जिससे निवेशों के इनμलो और निर्यात के प्रवाह में वृद्धि होगी। पिछले कई दशकों से उत्तर प्रदेश में टूरिज्म आनुपातिक रूप से बहुत पीछे था। लेकिन कुंभ और दीपोत्सव ने प्रदेश को न केवल दुनिया में रची बसी भारतीय आस्था से ही जोड़ा बल्कि स्प्रिचुअल इकोनॉमी को टूरिज्म इकोनॉमी से जोड़कर फार्मल इकोनॉमी में परिवर्तित किया। टूरिज्म को इकोनॉमिक ग्रोथ के मल्टीप्लायर के तौर पर स्थापित किया जाए, इसी उद्देश्य से अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन…. आदि का स्प्रिचुअल इकोनॉमिक सर्किट पूरा हो जाएगा जो अपने विस्तार के साथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नया रूप प्रदान करेगा। कुल मिलाकर योगी सरकार ने राज्य की विशेषताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप एक रणनीति के साथ लक्ष्यों को न केवल सुनिश्चित किया है बल्कि उन्हें प्राप्त भी किया है। इसलिए यह कहना तर्कसंगत लगता है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था फास्ट, इन्क्लूसिव एवं सस्टेनेबल ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रही है और ईज आॅफ डूइंग के साथ-साथ ईज आॅफ लिविंग के लक्ष्यों को हासिल कर रही है। 


 
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