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उत्तराखंड में डॉप्लर रडार से मिलेगी बर्फबारी की सटीक जानकारी : बिक्रम सिंह

09/07/2019

साकेती
देहरादून, 09 जुलाई (हि.स.)। विज्ञान की एक नई तकनीक का लाभ उत्तराखंड को जल्द मिलना शुरू हो जाएगा। हम डाप्लर रडार की बात कर रहे हैं, जिसके द्वारा आने वाले वर्ष में प्रदेश में बर्फबारी की सटीक जानकारी मिल सकेगी। यह बर्फबारी के शौकीनों के लिये अच्छी खबर है। इससे यह भी पता चल जाएगा कि कहां कितनी बर्फबारी होगी। इससे पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को लाभ होगा। यह मानना है मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह का। 

प्रदेश के विभागीय निदेशक बिक्रम सिंह ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित डॉप्लर रडार सर्दियों तक स्थापित हो जाएंगे और अपना पूर्वानुमान देना शुरू कर देगा, लेकिन बादल फटने की घटनाओं के लिए अभी एक वर्ष प्रतीक्षा करनी होगी। इसका कारण वर्तमान सत्र में डाॅप्लर रडार न लग पाना है।

निदेशक ने बताया कि नैनीताल के मुक्तेश्वर में पहला डॉप्लर रडार स्थापित करने का काम प्रारंभ हो गया है जो दो से तीन माह में पूरा हो जाएगा। उत्तराखंड का मौसम विभाग बेहतर पूर्वानुमान के लिए काफी समय से तीन डॉप्लर रडार लगाने की मांग करता रहा है जो अब पूरी हो गई है। इसके बाद टिहरी के सुरकंडा में भी डॉप्लर रडार लगाने की कसरत प्रारंभ हो गई है। उनका कहना है कि मौसम विभाग में बादल फटना जैसा कुछ नहीं होता। केवल भारी बारिश या सामान्य बारिश को विभक्त किया जाता है। एक घंटे में कितनी बारिश हुई, इसके मानक होते हैं। मानकों से अधिक हुई बारिश बादल फटने की घटना मानी जाती है।  

निदेशक बिक्रम सिंह का कहना है कि अति सामान्य वर्षा 2.4 मिलीमीटर तक सामान्य वर्षा। इससे अधिक मध्यम वर्षा 15.6 मिलीमीटर से 64.4 मिलीमीटर तक तथा भारी वर्षा 64.5 से 115.5 मिलीमीटर जबकि बहुत भारी वर्षा 115.6 से 204.4 मिलीमीटर और अति वर्षा - 204.5 मिलीमीटर और उससे अधिक होती है। यह मानक पूरी तरह लागू हैं। मौसम विभाग मानता है कि एक घंटे में 100 मिलीटर से अधिक वर्षा हो तो उसे भी बादल फटना कहते हैं। यह स्थितियां तब आती हैं, जब बहुत भारी वर्षा होती है। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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