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शिक्षा : बड़े काम का लिबरल आर्ट्स

11/07/2019

डॉ. राकेश राणा
लिबरल आर्ट्स दुनिया की पुरानी विद्याओं में से एक है। यह एक तरह का संतुलित समिश्रण है, जिसमें इतिहास, भाषा, मानविकी, संगीत, दर्शन, मनोविज्ञान और सामान्य गणित जैसे विषय शामिल हैं। यह समग्र समझ के विकास की विद्या है जो सदियों पहले से हमारी सनातन शिक्षा परम्पराओं में अंतर्गुम्फित दिखती है। मानव व्यक्तित्व को संतुलित और सम्पूर्ण ढंग से विकसित करना ही शिक्षा का उद्देश्य है। समाज विज्ञानी जॉन हेनरी न्यूमैन लिबरल आर्ट्स की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क को खोलना मानते हैं। ताकि, मानव मस्तिष्क को सही दिशा मिल सके। उसका परिष्कार और संवर्द्धन हो सके। वह ज्ञान को आत्मसात करने में सक्षम बन सके। चूंकि मानवीय व्यवहार मस्तिष्क से नियंत्रित और संचालित होता है। मानव मस्तिष्क को समाजोपयोगी बनाने के लिए लिबरल आर्ट्स एक बेहतरीन विद्या है। यह हमारे सोचने के ढंग को उदार बनाता है। सटीक अनुमानों की तरफ बढ़ाता है तथा बुद्धिमता का विकास करता है। लिबरल आर्ट्स ऐसी कला है जो हमें उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दृष्टि प्रदान करती है। चुनौतियों को अवसरों की तरह देखने का साहस प्रदान करती है। स्वयं के सम्मुख सवालों को तार्किक संबोधन देने की क्षमता प्रदान करती है और अभिव्यक्ति की शैली से लैस करती है। 
    लिबरल आर्ट्स शिक्षा का एक ऐसा उभरता क्षेत्र है जो व्यावसायिक मूल्यों, सिद्धांतों और आवश्यक प्रबंधन तथा कौशल का तरल सम्मिश्रण तैयार करता है। मनुष्य को अपनी समसामयिक चुनौतियों से निपटने और आगे बढ़ने के विकल्प सुझाता है। लिबरल आर्ट्स युवाओं को ऐसे मूल्यों से परिपोषित करता है जो समेकित दृष्टिकोण के साथ पर्याप्त संभावनाओं को उकेरने को प्रेरित करता है। आज देश में लिबरल आर्ट्स के संस्थान तेजी से खुल रहे हैं। दुनिया में उदार कलाओं के विशेषज्ञों की भारी मांग है। इंजीनियरिंग के साथ प्रबंधन सबसे उम्दा युग्म समझा जा रहा है। लिबरल आर्ट्स पाठ्यक्रम एक दूरद्रष्टा की तरह उन सब आवश्यक अंशों को अपने में समाहित कर विकसित होता है जो स्थानीयता से सर्वव्यापकता के क्रम को निरंतरता प्रदान कर समसामयिक चुनौतियों का सम्यक समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता रखता हो। इसलिए वह मजबूत आधार पर विशेषज्ञता खड़ी करने का हिमायती है। फांडेशन के साथ स्पेशलाइजेशन लिबरल आर्ट्स की विशेषता है। लिबरल आर्ट्स अंतर्सबंधों को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। व्यक्ति की आंतरिक क्षमताओं को विकसित कर अपार संभावनाओं के क्षेत्र खोलता है। लिबरल आर्ट्स हमें स्वयं को और दुनिया को समझने की दृष्टि प्रदान करता है। सामान्य कौशल और तार्किक सोच पैदा करता है।
   हाल ही में अमेरिका में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि मानविकी में स्नातक करने वाले 15 प्रतिशत प्रबंधन पदों पर काम कर रहे हैं। लगभग इतने ही मानविकी स्नातक प्रशासनिक पदों को संभाल रहे हैं। 13 प्रतिशत सेल्स-मार्केटिंग में हैं और 12 प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र में योगदान कर हैं। अन्य 10  प्रतिशत कारोबार और वित्त क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए हैं। इसलिए यह मान लेना कि मानविकी के स्नातकों को विज्ञान के विद्यार्थियों की तरह अच्छी नौकरियां नहीं मिलती तो यह धारणा गलत है। जैसे-जैसे दुनिया विज्ञान के भौतिक सुख-साधनों पर सवार होगी, वैसे-वैसे समाज विज्ञान और मानविकी में लिबरल आर्ट्स और ज्यादा प्रासंगिक होकर उभरेंगे। जिस तेजी से समाज दिनोंदिन तकनीक के करीब आ रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाज को संचालित करने लगी है। उतना ही इमोशनल इंटेलिजेशिया भविष्य के समाज की जरूरत बनेगा और लिबरल आर्ट्स जैसे शिक्षा के नये क्षेत्र महत्वपूर्ण बनेंगे। लिबरल आर्ट्स सोचने, आलोचना करने और दूसरों को अपने पक्ष में राजी करने की क्षमता बढ़ाने की कला है। लिबरल आर्ट्स हमारे लिखने, पढ़ने, बोलने और तार्किक ढंग से सोचने के कौशल को बढ़ा देते हैं। 
    मौजूदा समय की सबसे बड़ी सामाजिक और प्रौद्योगिकीय चुनौतियों का सामना करने के लिए उनके मानवीय संदर्भ के बारे में आलोचनात्मक ढंग से सोचने की क्षमता की दरकार है। लिबरल आर्ट्स में प्रशिक्षित युवा इस काम में सबसे अच्छे ढंग से पारंगत होते हैं। लिबरल आर्ट्स एक तरह से सामान्य और सहज बोध जैसी क्षमताओं का विकास करने की विद्या है। जो किसी समाज अथवा राष्ट्र के सभी सामान्य नागरिकों में होना जरूरी है। इसमें ज्ञान, विज्ञान, कला, प्रबंधन व मानविकी की सभी धाराओं से जुड़े विषयों का अंतर्विषयी दृष्टिकोण से ज्ञान हासिल करना जो यह दृष्टि विकसित करने में मदद करे कि हमें अपने अधीनस्थों और साथियों की शिक्षा और कौशल का किस तरह बेहतर उपयोग करना है। एक समावेशी ढंग का व्वयाहारिक मॉडल विकसित करने में मदद करता है। लिबरल आर्ट्स विषय नहीं विषयों का समूह है, अंतर्विषयी समझ का परिप्रेक्ष्य है। जो मानवीय बुनियादी समझ को व्यापक बनाता है। बदलते परिदृश्य में अनुकूलन कर क्षमताओं को अधिक परिणामदायक बनाने वाला दृष्टिकोण विकसित करता है। यह विज्ञान और मानविकी दोनों का संयुग्मन है। समाज को शिक्षित और प्रशिक्षित करने का एक खास नजरिया है। जो सामाजिक जटिलताओं, विविधताओं और परिवर्तनों को सम्य्क दृष्टि से सम्बोधित करता है। इस खास कौशल का विकास कर लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद मिलती है।  
    मौजूदा दौर बाजार का दौर है जो लाभ की दृष्टि से आप्लावित है। जोड़-घटाव के गणित के आधार पर मानवीय क्रिया-कलाप संचालित हो रहे हैं। ऐसे में संवेदना, रचनात्मकता, जिज्ञासा और जरूरत के लिए स्थान नहीं बचता जबकि संवेदना समाज का आधार है। समाज की विविधताओं, आवश्यकताओं और इच्छाओं को संवेदना के साथ समझने की क्षमता उदार ज्ञान धाराएं ही प्रदान करती हैं। आज जिस तरह से बदलावों का दौर है, मशीनीकरण का विस्तार, जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम मेधा तथा अंधाधुंध उपभोग व पर्यावरण क्षरण से समाज नये-नये तनावों का सामना कर रहा है उनके लिए एक स्मार्ट मानव व्यवहार  विकसित होना जरुरी है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के जरिए सोशल मीडिया जिन तनावों और जटिल समस्याओं के बीच मानव को फंसाये खड़ा है उनमें लिबरल आर्ट्स जैसे माध्यम उत्तर-आधुनिक दौर के मनुष्य का सशक्तीकरण करने में मददगार होंगे। उत्तर-आधुनिक और उत्तर-औद्योगिक वैश्विक समाज को आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से एक अलग ढंग के कौशलों और दृष्टिकोणों की जरूरत है। सामयिक महत्व की इन जरूरतों को पूरा करने में लिबरल आर्ट्स की शिक्षा मील का पत्थर साबित होगी।
(लेखक युवा समाजशास्त्री हैं।) 


 
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