युगवार्ता

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कमजोर होते विपक्षी दल

20/09/2019

कमजोर होते विपक्षी दल

सुधीर जोशी

भाजपा तथा शिवसेना में शामिल होने वालों की सूची कितनी लंबी होगी, इस बारे में अभी से कह पाना मुश्किल है। लेकिन जिस तेजी से कांग्रेस, राकांपा के दिग्गज नेताओं ने भाजपा, शिवसेना का दामन थामा है, उससे इस बात को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।

महाराष्ट्र में किसी वक्त अपनी राजनीतिक ताकत के लिए प्रसिद्ध कांग्रेस की हालत इन दिनों बहुत खराब है। कांग्रेस ही नहीं शरद पवार की राकांपा की भी हालत अच्छी नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण बिखे पाटिल और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे द्वारा कांग्रेस छोड़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह सिलसिला कहां जाकर रुकेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हर्षवर्धन पाटिल तथा लोकसभा चुनावी जंग में उत्तर मुंबई संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर उतरी उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस को रामराम कह दिया है।
जिस सीट को उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस की झोली में नहीं डाल पायी थी, वह सीट किसी जमाने में सिने अभिनेता गोविंदा ने राम नाईक जैसे दिग्गज भाजपाई नेता को हराकर कांग्रेस की झोली में डाली थी। वह जमाना कांग्रेस का था, लेकिन अब राज्य में भाजपा शिवसेना की राजनीतिक ताकत काफी ज्यादा बढ़ गई है। भाजपा नेता प्रसाद लाड के प्रयासों से कृपाशंकर सिंह को भाजपा में प्रवेश मिला है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभालने के बाद बाला साहेब थोरात के नेतृत्व में राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार के विरोध में महापर्दाफाश यात्रा निकाली गई, इस यात्रा में भाजपा की महाजनादेश यात्रा का जबर्दस्त विरोध किया गया।
सातारा के विधायक जयकुमार गोरे ने भी कांग्रेस को रामराम कहकर कांग्रेस की परेशानी और ज्यादा बढ़ा दी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभाल चुके अशोक चव्हाण, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम और मिलिंद देवरा के कंधों पर कांग्रेस का अगला सफर कितना मुश्किल होगा, यह बताने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस के बाद राकांपा की ओर से भी कुनबा छोड़ने का सिलसिला लगातार जारी है। मुंबई राकांपा अध्यक्ष सचिन अहिर ने जब राकांपा छोड़कर शिवसेना का दामन थामा, उस वक्त से राकांपा में टूट का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अभी भी थमा नहीं है।
नवी मुंबई की राजनीति में जबर्दस्त प्रभाव रखने वाले गणेश नाईक, उनके पुत्र तथा पूर्व सांसद संजीव नाईक के भाजपा में आने के बाद राकांपा का कुनबा और छोटा हो गया है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सातारा के सांसद उदयन राजे भोसले भी आने वाले दिनों में भाजपा में दिखायी देंगे। हालांकि उदयन राजे का भाजपा प्रवेश महाजनादेश यात्रा के दूसरे चरण के अंतिम दिन सोलापुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में करने की तैयारी की गई थी। लेकिन उदयन राजे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भाजपा में प्रवेश करने की बात कही थी, इसलिए उनका भाजपा प्रवेश नहीं हो पाया।
राकांपा का त्याग करने वाले नेताओं में उस्मानाबाद जिले के दिग्गज नेता तथा पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल, विधायक राणा जगजीत सिंह, राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष समीर देखमुख, कान्हा यादव से पहले राकांपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मधुकर राव पिचड, उनके पुत्र वैभव पिचड ने भी भाजपा का दामन थाम था। लगभग दो दशक पहले शिवसेना छोड़कर राकांपा का दामन थामने वाले छगन भुजबल के बारे में भी यह कहा जाने लगा है कि उनकी भी घर वापसी हो सकती है।
हालांकि भुजबल ने साफ तौर पर कहा है कि वे राकांपा छोड़कर नहीं जा रहे हैं। राकांपा में रहते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके छगन भुजबल का शिवसेना में प्रवेश उद्धव ठाकरे के कारण नहीं मिल पा रहा है। बहरहाल राज्य में बह रही राजनीतिक बयार को देखते हुए यह कहना गलत नहीं कि अबकी बार भी भाजपा ही सबसे बड़ा राजनीतिक दल होगा और दूसरे नंबर पर शिवसेना होगी। अगर कोई चमत्कार हुआ तभी कांग्रेस, राकांपा को सम्मानजनक सीटें मिल पाएंगी।



 
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