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अब ऊर्जा दाता भी बनेगा किसान

17/02/2020

अब ऊर्जा दाता भी बनेगा किसान

राकेश कुमार


केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के लिए बजट पेश करते हुए कृषि के महत्व को सबसे ऊपर रखा है। वास्तव में उन्होंने अपने बजट की शुरुआत ही कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों के महत्व को संसद के सामने रखते हुए की। वित्त मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा पिछले 6 साल से किसानों के हितों में उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। सीतारमण ने कहा कि देश भर की मंडियों को एक साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने से उनसे जुड़े 1.65 करोड़ किसानों को अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलने में सहूलियत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के माध्यम से किसानों को सोलर पंप बांटे गए हैं। इससे उनकी बिजली की खपत कम हुई है और फसल की लागत में कमी हुई है। इस साल भी 20 लाख किसानों को सोलर पंप देने के लिए केंद्र सरकार वित्तीय अनुदान देगी। वित्त मंत्री ने फसल बीमा योजना से जुड़े 6.11 करोड़ किसानों को फसलों के खराब होने की चिंता से मुक्ति मिलने का दावा करते हुए कहा कि किसानों को किसान सम्मान निधि के माध्यम से अतिरिक्त आय सीधे उनके बैंक खातों में जा रही है। इससे 2022 तक देश में किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल रही है।

कृषि प्रधान देश की आवश्यकताओं को समझते हुए बजट में किसानों का खास ख्याल रखा गया है। अन्नदाता के साथ ऊजार्दाता बनाने का संकल्प इसी को इंगित कर रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन, मछली पालन, पशु पालन, मुर्गी पालन जैसे क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश करने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने 16 बिंदुओं की योजनाएं घोषित की हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक जो भी राज्य सरकार केंद्र द्वारा पारित कृषि संबंधी कानूनों का अनुपालन करते हैं, उन राज्यों को केंद्र सरकार मदद देती है। इन कानूनों में मॉडल कृषि भूमि पट्टा अधिनियम 2016, मॉडल कृषि उत्पाद और पशुधन विपणन (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2017 और मॉडल कृषि उत्पाद और पशुधन संविदा कृषि और सेवाएं (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2018 शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अन्नदाता ऊर्जा दाता भी बन सकता है। इस बार देश में 20 लाख सोलर पंप की स्थापना के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही 15 लाख सोलर पंपों को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने में भी मदद की जाएगी। जिससे कि खाली समय में देश को बिजली मिल सकेगी। रासायनिक खेती से किसानों को दूर हटाने और जैविक खेती की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए भी मदद देने का प्रावधान इस बजट में किया गया है। उन्होंने जीरो बजट खेती का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि देश में खेती की लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने में इससे बहुत ज्यादा मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में 162 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के निर्माण की संभावना है। इसके लिए नाबार्ड किसानों के साथ मिलकर के जहां भी संभव हो वहां शीत गृहों की श्रृंखला बनाएगा। इससे सब्जियों और फलों के संरक्षण और उनके भंडारण का काम संभव होगा। क्योंकि अब देश में फलों और सब्जियों का उत्पादन अनाज उत्पादन से भी अधिक यानी 311 मिलियन मीट्रिक टन से भी अधिक हो गया है। यह बहुत जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं हैं। शीत गृहों के निर्माण से इन सभी समस्याओं पर एक साथ काबू पाया जा सकेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को भी कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय मदद दी जाएगी। दूध, मांस, फल और सब्जियों जैसे जल्दी खराब हो जाने वाले कृषि उत्पादों को रेलगाड़ियों के माध्यम से पूरे देश में भेजने के लिए अब किसान रेल चलाई जाएगी। जिसमें रेफ्रिजरेटेड डिब्बों में इन सामग्रियों का परिवहन किया जाएगा। इसके अलावा किसान वायु सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। जिसमें कार्गो हवाई जहाज में इन वस्तुओं को पूरे देश में एक से दूसरी जगह ले जाया जाएगा। इसी के साथ कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिए 2020-21 के लिए 15 लाख करोड़ रुपये की ऋण उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि पशुपालकों की मदद के लिए 2025 तक खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों के उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है।

साथ ही कृत्रिम गभार्धान की क्षमता वर्तमान में 30 फीसदी से बढ़ाकर 70 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। 2025 तक दुग्ध प्रोसेसिंग की क्षमता को 53.5 मिलियन मीट्रिक टन से दोगुना करके 108 मिलियन मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने समुद्र तटीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए नीली क्रांति या मछली पालन पर फोकस करने की घोषणा की है। इसके अनुसार तटीय इलाकों में 2022-23 तक मछली उत्पादन बढ़ाकर 200 लाख टन करने की बात कही गई है। इसके अलावा शैवाल उत्पादन और कैज सुविधाओं को बढ़ाने की भी घोषणा बजट में की गई है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि 3477 सागर मित्रों और 500 मत्स्य पालक उत्पादक संघों के मदद से 2024-25 तक मछली का निर्यात बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी को खत्म करने के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना में 50 लाख परिवारों को 58 लाख स्वयं सहायता समूह में जोड़ा जाएगा। इन सभी कार्यों के लिए कृषि क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है। इसे दो भागों में बांटा गया है-कृषि सिंचाई और संबंधित गतिविधियों में 1.60 लाख करोड़ रुपये जबकि ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए 1.23 लाख करोड़ रुपये दिये गये हैं।


 
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