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मंजिल तक पहुंचा राम मंदिर आन्दोलन

07/03/2020

मंजिल तक पहुंचा राम मंदिर आन्दोलन

संजय सिंह

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक के साथ ही अयोध्या में राम मन्दिर निर्माण की ओर कदम बढ़ गये हैं। बैठक में मणिराम दास जी की छावनी के महंत व श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास को अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव बनाने के बाद जिस तरह से अयोध्या में खुशी का माहौल देखा गया है, उससे साफ देखने को मिला कि इन दोनों प्रमुख चेहरों को ट्रस्ट में शामिल करना कितना जरूरी था। महंत नृत्यगोपाल दास को रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने पर अयोध्या के संतों ने फूलों की होली खेली और मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया। दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास कहते हैं कि महंत नृत्यगोपाल दास ने आजीवन राममंदिर के लिए संघर्ष किया, यह उनके संघर्ष की ही विजय है। अब करोड़ों भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूरी होगी और रामलला टेंट से बाहर होंगे। इसके साथ ही महंत गोविंद गिरी को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट की निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। ट्रस्ट में योगी आदित्यनाथ सरकार के दो विश्वसनीय अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी व अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा को भी शामिल किया गया है।

लगभग पांच सौ वर्ष तक चले इस विवाद को अगर मौजूदा पीढ़ी राम मंदिर आन्दोलन के रूप में जानती है तो इसका श्रेय विहिप को ही जाता है। अब ट्रस्ट ने विहिप के राम मंदिर के मॉडल को स्वीकार कर उसके संघर्ष को सम्मान दिया है।

अयोध्या में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में ट्रस्ट का बैंक अकाउंट भी खोलने का निर्णय किया गया है। भले ही अभी मंदिर निर्माण की तारीख की घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन माना जा रहा है कि पन्द्रह दिन बाद अयोध्या में आयोजित दूसरी बैठक में इसका ऐलान किया जायेगा। इसके अलावा राम मन्दिर विहिप के ही मॉडल पर बनाने का निर्णय होने से संगठन ने अपने दशकों से चले रहे आन्दोलन को आखिर उसकी मंजिल तक पहुंचाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। दरअसल मंदिर निर्माण का रास्ता भले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हुआ हो, लेकिन इसे जनआकांक्षाओं से जोड़ने में विहिप की ही अहम भूमिका रही। लगभग पांच सौ वर्ष तक चले इस विवाद को अगर मौजूदा पीढ़ी राम मंदिर आन्दोलन के रूप में जानती और समझती है तो इसका श्रेय विहिप को ही जाता है।

महंत नृत्यगोपाल दास: मंदिर आंदोलन में समर्पित जीवन

राममंदिर आंदोलन में जिन प्रमुख संतों ने अग्रणी भूमिका निभाई उनमें दिगंबर अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास के बाद मणिरामदास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास का नाम है। जब परमहंस रामचंद्र दास ने घोषणा करके सनसनी फैला दी थी कि 8 मार्च 1986 तक श्रीराम जन्मभूमि का ताला नहीं खुलने पर वह आत्मदाह करेंगे तो नृत्यगोपाल आंदोलन को धार दे रहे थे। इसके बाद 1 फरवरी 1986 को विवादित स्थल का ताला खुलने के साथ पूजापाठ शुरू भी हो गया। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष जगद्गुरु रामानन्दाचार्य शिवरामाचार्य महाराज के गुजरने के बाद अप्रैल, 1989 में परमहंस को श्रीराम जन्मभूमि न्यास का कार्याध्यक्ष घोषित किया गया। तब नृत्यगोपाल दास उपाध्यक्ष बने। इसके बाद 9 नवम्बर 1989 को शिलान्यास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। वहीं कारसेवा के दौरान भी नृत्यगोपाल दास ने अहम भूमिका निभायी। 26 मार्च 2003 को दिल्ली में आयोजित सत्याग्रह के प्रथम जत्थे का नेतृत्व कर परमहंस रामचन्द्र दास के साथ गिरतारी देने वालों में नृत्यगोपाल दास भी शामिल थे। परमहंस के गुजरने के बाद 2003 में नृत्यगोपाल दास न्यास के अध्यक्ष बने। ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद नृत्य गोपाल दास ने कहा कि लोगों की भावना का आदर किया जाएगा। जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण होगा।

विहिप ने इस मामले पर राष्ट्रव्यापी जनांदोलन खड़ा करते हुए न सिर्फ आम आदमी का ध्यान इस ओर खींचा बल्कि उसके अन्दर इस बात का विश्वास पैदा किया कि एक दिन रामलला को जरूर उनका हक मिलेगा और वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा। अतीत के पन्नों को खंगाले तो 1984 में दिल्ली में आयोजित अपनी पहली धर्म संसद में विहिप ने अयोध्या, मथुरा और काशी के धर्मस्थलों को हिंदुओं को सौंपने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 21 जुलाई, 1984 को अयोध्या में बैठक कर विहिप ने रामजन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन किया। इसका अध्यक्ष तब गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ और महामंत्री दाऊदयाल खन्ना को बनाया गया। वहीं महंत रामचंद्रदास परमहंस व महंत नृत्यगोपाल दास को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। 14 अक्टूबर 1984 को को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में आयोजित विशाल सभा में विहिप के संस्थापक महासचिव अशोक सिंहल ने रामजन्मभूमि का स्वामित्व अविलंब जगद्गगुरु रामानंदाचार्य को सौंपने का प्रस्ताव रखा।

इस समय तक श्री राम जन्मभूमि न्यास का गठन नहीं हुआ था और यह मंदिर निर्माण की मांग को लेकर पहली विशाल जनसभा थी। 1985 में विहिप ने श्री रामजन्मभूमि न्यास का गठन किया। 1 फरवरी 1986 को विवादित स्थल का ताला जिला व सत्र न्यायाधीश के आदेश पर खुलने से वहां पूजापाठ शुरू हो गया। अगले दिन विहिप ने रामजन्मभूमि का स्वामित्व श्री रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने की मांग की। इस बैठक में महंत अवेद्यनाथ, परमहंस रामचंद्रदास व महंत नृत्यगोपाल दास के अलावा विहिप के कई शीर्ष नेता मौजूद थे। 09 नवम्बर 1989 को विहिप ने पूरे देश में शिलापूजन कार्यक्रम की घोषणा की। 24 जून 90 को विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की हरिद्वार में आयोजित बैठक में 30 अक्टूबर देवोत्थानी एकादशी से मंदिर के लिए कारसेवा करने की घोषणा की।

इसके बाद बड़ी संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे। उस दौरान उत्तर प्रदेश में मुलायम सरकार ने जिस तरह से कारसेवकों पर गोली चलवाई, उसको लोग आज भी याद करते हैं। उत्तर प्रदेश की सियासत में इस घटनाक्रम को मुलायम के अल्पसंख्यक कार्ड के तौर पर भी देखा जाता है, जिसका पार्टी आज तक सियासी तौर पर इस्तेमाल करती आयी है। वहीं 06 दिसम्बर 1992 की घटना विहिप के आन्दोलन की परिणति बनी। अब 2020 में ट्रस्ट में शामिल होकर विहिप रामभक्तों के सपने को साकार करती नजर आयेगी।

श्रीरामलला विराजमान राजस्व गांव

वहीं विहिप सूत्रों के मुताबिक सरकार 67 एकड़ जमीन और उससे जुड़ी भूमि को मिलाकर नया राजस्व ग्राम श्रीरामलला विराजमान बनाने की तैयारी कर रही है। आस पास की कुछ और जमीनों के अधिग्रहण के बाद इसका पूरा क्षेत्र करीब 100 एकड़ तक हो सकता है। श्रीरामलला राजस्व ग्राम अयोध्या नगर निगम में दर्ज होकर श्रीरामलला शहर हो जाएगा, इसकी कवायद शुरू हो चुकी है।

आन्दोलन का चेहरा चंपत राय

ट्रस्ट में महासचिव बनाये गये विहिप के चंपत राय को 1977 में इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने कॉलेज से गिरतार कर जेल भेज दिया था। करीब 18 महीने तक वह जेल में बंद रहे। जेल से छूटने के बाद चंपत राय अपने घर वापस नहीं लौटे और 1980 में विश्व हिंदू परिषद में शामिल हो गए। 1984 से विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल के करीबी सहयोगी के रूप में वह राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। वह इस आन्दोलन के अहम रणनीतिकार भी हैं। अयोध्यां धाम के स्टेट बैंक आॅफ इंडिया शाखा में ट्रस्ट का जो बैंक अकाउंट खोला जाएगा उसका संचालन स्वामी गोविंद देव गिरी जी, चंपत राय, डॉ. अनिल कुमार मिश्र में से किन्हीं दो के संयुक्त हस्ताक्षरों से होगा।

पूजा पर होगा फैसला

‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट की पहली बैठक में ट्रस्ट के न्यासी निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास ने निर्मोही अखाड़ा को पूजा का अधिकार प्रदान किए जाने का प्रस्ताव रखा। बोर्ड आॅफ ट्रस्टियों ने इस प्रस्ताव को विचार के लिए स्वीकार करते हुए निर्णय करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक में महंत श्री दास ने अखाड़े के सरपंच महंत राजा रामचंद्राचार्य के अलावा पांच अन्य पंचों को भी स्थान देने सम्बन्धित प्रस्ताव रखा, जिसे केन्द्र सरकार के पास भेजने का फैसला किया गया। अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अखाड़ा के पंचों की पिछले दिनों अयोध्या में हुई बैठक ये प्रस्ताव ट्रस्ट की बैठक में रखने पर सहमति बनी थी।

रामलला के दर्शन

इस बीच राम मंदिर निर्माण शुरू होते ही विराजमान रामलला के विग्रह को गर्भगृह से हटाकर दूसरे स्थान पर अस्थायी तौर पर रखा जायेगा। इस दौरान भी रामलला के दर्शन पूजन होते रहेंगे। यह अस्थायी मन्दिर फाइबर का होगा। इसके लिए अधिगृहीत परिसर में मानस भवन के दक्षिणी हिस्से का चयन किया गया है। अस्थाई मंदिर की डिजाइन भी बनवाई गई है। यहां रामलला अपने भाइयों, हनुमान जी व सालिकराम भगवान के साथ विराजेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ट्रस्ट की बैठक में इसका पूरा मसौदा रखकर स्वीकृति ली जाएगी। विराजमान रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक जब तक मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक रामलला अस्थायी तौर पर यही विराजेंगे। पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी ने प्रस्तावित स्थल को लेकर हरी झंडी दे दी है। गौरतलब है कि छह दिसम्बर 1992 की घटना के बाद से ही रामलला अस्थायी टेंट में विराजमान हैं।


 
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