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नौ साल में बनाये 18 मेडिकल उपकरण

22/10/2019

नौ साल में बनाये 18 मेडिकल उपकरण

निरंकार सिंह

कुछ नया करने की इच्छा हो तो आप किसी भी क्षेत्र में सुधार कर सकते हैं। बेंगलुरू के डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी ने मेडिकल उपकरणों में सुधार करके अपनी आविष्कारक बुद्धि का उदाहरण पेश किया है। डॉक्टर चतुर्वेदी ने साल 2010 से 18 मेडिकल उपकरणों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी भूमिका को-इन्वेंटर यानी सहआ िवष्कारकर्ता की है। ये मशीनें भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद करने के इरादे से तैयार की गई हैं। जगदीश नई पीढ़ी के पेशेवर लोगों की उस जमात से आते हैं, जो कामकाज में आने वाली परेशानियों को न केवल हल करने बल्कि उससे पैसा बनाने का हुनर भी जानते हैं। साल 2008 में जब उनकी पढ़ाई पूरी होने को थी और डॉक्टरी की उनकी ट्रेनिंग जारी थी, तब जगदीश को पहली बार ऐसा ही एक आइडिया आया था। आज वे एक ईएनटी स्पेशलिस्ट (आंख, नाक और गले का डॉक्टर) हैं।

गांवों में मौजूद बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच ही जगदीश ने अपना पहला हुनर सीखा। अपनी किताब ‘इन्वेंटिंग मेडिकल डिवाइसेज-अ पर्सपेक्टिव फ्रॉम इंडिया’ में डॉक्टर जगदीश ने कहा है, ‘‘हम मरीजों की जांच के लिए लंबे शीशे और हेड लैंप का इस्तेमाल कर रहे थे जबकि मेरे अस्पताल में μलैट स्क्रीन वाली टीवी और कहीं आधुनिक टेक्नॉलाजी मौजूद थी।’’ इस परेशानी ने उन्हें एक आइडिया दिया, एक ऐसा ईएनटी इंडोस्कोप जिसमें डिजिटल कैमरा भी लगा हो, लेकिन उन्हें एहसास हुआ कि डॉक्टर होने के बनिस्बत एक उद्यमी बनना बहुत मुश्किल है। डॉक्टर जगदीश चतुर्वेदी बताते हैं कि डॉक्टर होना अलग बात है क्योंकि किसी प्रोडक्ट को तैयार करने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती है। मैंने सचमुच संघर्ष किया और एक डिवाइस फर्म को इसका लाइसेंस दे दिया। जगदीश को उनकी कोशिश में अस्पताल के ईएनटी विभाग के दूसरे सीनियर डॉक्टरों का भी पूरा साथ मिला। ये साथ इसलिए भी अहम था कि निवेशकों से मिलने के सिलसिले में वे अस्पताल की ट्रेनिंग मिस कर रहे थे।

एक डॉक्टर का कमाल

ये मशीनें भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद करने के इरादे से तैयार की गई हैं। जगदीश नई पीढ़ी के पेशेवर लोगों की उस जमात से आते हैं, जो कामकाज में आने वाली परेशानियों को न केवल हल करने बल्कि उससे पैसा बनाने का हुनर भी जानते हैं।

डॉक्टर जगदीश की गैरमौजूदगी में सहयोगी डॉक्टरों को उनकी काम की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। इसे लेकर साथी डॉक्टरों के बीच नाराजगी थी और ये होना भी था। जब डॉक्टर चतुर्वेदी के ईएनटी इंडोस्कोप पर काम चल रहा था तो उसी दौरान उन्होंने अमरीका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बायोडिजाइन की पढ़ाई के लिए आवेदन दिया। इसके लिए उन्हें भारत सरकार से वजीफा मिला था। डिजिटल कैमरा वाला ईएनटी इंडोस्कोप आगे चलकर साल 2015 में लॉन्च किया गया। अमरीका से भारत वापस आकर चतुर्वेदी ने एक कंपनी की शुरुआत की, जिसका इरादा बाजार में ज्यादा से ज्यादा मेडिकल उपकरण लाने का था। वे ऐसी मशीन बनाना चाहते थे जो साइनस के इन्फेक्शन में मदद करे। उनके एजेंडे में नाक से कुछ निकालने के काम आने वाला औजार तैयार करना भी था। इस सबके बावजूद वे स्टैंड अप कॉमेडी के अपने शौक को पूरा करने के लिए महीने में ठीकठाक संख्या में शो भी कर लेते हैं।

पिछले साल उन्होंने एक ऐसा प्लेटफार्म लॉन्च किया, जो खासतौर पर इनोवेशन इंडस्ट्री (नई मशीनें, नई टेक्नालॉजी तैयार करने वाला उद्योग) में काम करने वाले भारतीय डॉक्टरों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए तैयार किया गया था। डॉक्टर चतुर्वेदी कहते हैं कि जब आप सिस्टम का हिस्सा होते हैं तो उसमें टेक्नालॉजी के लिए जगह बनाना आसान होता है। फिलहाल उनका डॉक्टरी छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। डॉक्टर चतुर्वेदी के अनुसार उन्होंने जो चीजें बनाई हैं, आप उन्हें कॉर्पोरेट चश्मे से नहीं देख सकते हैं। उन्हें एक डॉक्टर के नजरिये से डॉक्टरों के लिए ही तैयार किया गया है।


 
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