यथावत

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जातीय समीकरण ध्वस्त

19/06/2019

मोदी सुनामी का असर देश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में भी दिखा। विपक्षियों के सारे दांव पेंच को ध्वस्त करते हुए भाजपा ने 80 में से 62 सीटें जीत ली। इस महत्वपूर्ण राज्य के चुनाव परिणाम ने राहुल, मायावती, अखिलेश समेत विपक्षी नेताओं को दिवास्वपन से हकीकत की जमीन पर उतार दिया। भाजपा के सहयोगी अपना दल को 02 सीटें मिली हैं। हालांकि 2014 की तुलना में भाजपा को 09 सीटों का नुकसान हुआ है। फिर भी गठबंधन और कांग्रेस के चुनावी दावे को देखते हुए भाजपा की यह उपलब्धि काफी खास है। गठबंधन को मात्र 15 सीटें मिली। सपा मात्र 05 सीटों पर सिमट गई। गठबंधन का लाभ लेकर बसपा शून्य से 10 सीटों पर पहुंच गई। रालोद सुप्रीमो अजीत सिंह एवं उनके पुत्र जयंत चौधरी चुनाव हार गए। पूरे प्रदेश में सबसे आश्चर्यजनक नतीजा अमेठी का रहा। यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपना चुनाव हार गए।

सर्वाधिक महिला पहुंचीं ससंद
2019 के लोक सभा चुनाव में 104
महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इनमें
11 महिलाएं संसद पहुंचने में कामयाब
रहीं। केंद्रीय कपड़ा मंत्री और अमेठी
से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी,
सुल्तानपुर से केंद्रीय मंत्री मेनिका गांधी,
फतेहपुर से केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी
निरंजन ज्योति, इलाहाबाद से प्रदेश की
पर्यटन मंत्री डॉ रीता बहुगुणा जोशी,
फूलपुर से केशरी देवी पटेल, धौरहरा
से रेखा वर्मा, मथुरा से हेमा मालिनी
और बदायंू से प्रदेश सरकार के मंत्री
स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी संगमित्रा
मौर्या ने भाजपा उम्मीदवार के तौर
पर विजयश्री हासिल की। कांग्रेस की
महिला उम्मीदवारों में सिर्फ रायबरेली से
कांग्रेस की संरक्षक सोनिया गांधी चुनाव
जीती हैं। मिर्जापुर से अपना दल (यस)
की प्रत्याशी केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया
पटेल एवं लालगंज से बसपा की संगीता
आजाद ने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर
में दस्तक दी है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें पराजित किया। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की जीत का अंतर पिछली वर्ष की तुलना में इस बार कम रहा। राज्य में केंद्र की योजनाओं का सही ढंग से वितरण हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय, उज्जवला, सौभाग्य, आयुष्मान भारत आदि योजनाओं का लाभ उचित लोगों को मिला। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी प्रदेश का प्रदर्शन अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर रहा। इन सभी का व्यापक असर चुनाव के दौरान पड़ा। भाजपा ने चुनाव की घोषणा होने पर प्रदेश में 700 से अधिक जन सभाएं की। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 30 रैलियां और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की करीब 60 सम्मेलन, 28 रैलियां एवं सभाएं की। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी 86 सभाएं की। प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेन्द्र नाथ पाण्डेय प्रत्याशी होने बावजूद प्रदेश भर का दौरा कर रैलियों को संबोधित किया।

शाह की सफल रणनीति

चुनावी लक्ष्य हासिल करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बिसात बिछाई थी। यह उनके रणनीतिक कौशल का ही परिणाम था कि सपा-बसपा के जातीय समीकरण को तोड़ने के लिए लाभार्थियों के समूहों को जोड़ लिया। भाजपा ने केंद्र और राज्य सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं के 3 करोड़ 46 लाख लाभार्थियों से सर्म्पक किया। शाह की रणनीति में उनके करीबी और प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री सुनील बसंल ने असली रंग दिया। पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए गठबंधन का गणित काफी मजबूत दिख रहा था। लेकिन गठबंधन के तहत 38 पर लड़ने वाली बसपा सिर्फ 10 सीटें जीतने में कामयाब रही। सपा 37 सीट में से सिर्फ पांच पर ही जीती।

तीन सीट पर लड़ने वाली रालोद का एक बार फिर खाता नहीं खुल सका। गठबंधन ने अमेठी और रायबरेली सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया। लेकिन कांग्रेस अमेठी सीट को नहीं बचा सकी। मिशन 2019 को जीतने के लिए भाजपा ने विजन, मिशन की एैसी रणनीति बनाई की विपक्ष धराशाई हो गया। मिशन के रूप में 30 लाख कार्यकर्ताओं को मोदी और योगी सरकार के कामकाज और योजनाओं का प्रचार-प्रसार के लिए लगाया गया। फीडबैक के आधार पर लोगों को इन योजनाओं का लाभ बताकर भाजपा के साथ जोड़ा गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जुलाई 2018 में उत्तर प्रदेश को मिशन 74 का लक्ष्य देते हुए रोडमैप तैयार किया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने बूथ से लेकर चुनाव प्रबंधन कर इस ऐतिहासिक विजय को अंजाम दिया। प्रदेश की सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक-एक पूर्णकालिक व्यक्ति के जरिये एक वर्ष से ज्यादा बूथ स्तर तक चलने वाले अभियानों पर बारीकी से नजर रखी।

नेताओं, सांसदों और विधायकों का गांव-गांव, घर-घर संपर्क एवं संवाद कराया गया। प्रत्येक मोर्चे के सम्मेलनों और 700 चुनावी सभाओं से लोगों को भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश की। प्रदेश के सभी 80 लोकसभा क्षेत्रों में प्रोफेशनल युवाओं को लगाया गया। इसके अलावा 600 सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिये भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया। पार्टी ने सोशल मीडिया और आईटी का भरपूर उपयोग किया। भाजपा आईटी सेल के प्रभारी संजय राय के अनुसार प्रदेश में 20 लाख से अधिक व्हाट्स अप गु्रप, फेसबुक, ट्विटर और इंस्ट्राग्राम के जरिये मोदी सरकार की उपलब्धियों और संगठन की विचारधारा को जनता तक पहुंचाया गया।

चार फीसदी खिसका गठबंधन का वोट

चुनाव परिणाम से साफ है कि गठबंधन में शामिल सपा और बसपा का वोट पिछली बार से चार फीसद खिसक गया है। 2014 के चुनाव में अलग-अलग लड़ी सपा-बसपा और रालोद का इस चुनाव में कुल वोट बैंक 42.98 फीसदी रह गया है। इसमें सपा का सर्वाधिक 4.39 फीसद वोट खिसका है। जबकि बसपा का 0.47 फीसद घटा है। रालोद सीट जीतने में तो कामयाब नहीं रही है लेकिन उसके वोट में 0.81 फीसद का इजाफा हुआ है।

चुनाव में सपा को अभूतपूर्व नुकसान हुआ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरी ताकत लगाने के बावजूद कन्नौज में पत्नी डिम्पल को नहीं जिता पायें। फिरोजाबाद और बदायूं में सांसद रहे उनके दोनों चचरे भाई अक्षय यादव और धर्मेन्द्र यादव भी अपनी सीट हार बैठे। मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव की जीत का अंतर 2014 के मुकाबले केवल एक चौथाई रह गया है। नरेंद्र मोदी के राष्ट्रवाद एवं विकास की प्रयोगशाला में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन फेल हो गया। पश्चिम उत्तर प्रदेश में रालोद को गठबंधन का हिस्सा बनाकर जाट और जाटव को एक साथ लाना था। जातीय गणित को तोड़ने के लिए भाजपा ने मोदी लहर तैयार की। लोकसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति प्रधानमंत्री के चेहरे को आगे रखने की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, दिनेश शर्मा समेत ज्यादातर स्टार प्रचारकों ने अपने भाषण में मोदी को आगे रखकर विकास की चर्चा की।

दल-बदलुओं को लगी चोट

राजनीति में नेताओं को निष्ठा बदलने में वक्त नहीं लगता। इस बार भी लोकसभा चुनाव में कई दल-बदलू नेताओं ने पाला बदला, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। टिकट कटने की आशंका को भांपकर भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्त, सावित्री बाई फूले, अशोक दोहरे और रामचरित्र निषाद ने दल बदल कर टिकट तो ले आए, लेकिन जीत की दौड़ में पीछे छूट गए। रालोद की तबस्सुम हसन और बसपा के कैसर जहां भी दल बदल कर मैदान में आई। लेकिन उन्हें भी मतदाताओं ने नकार दिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पराजित कर गांधी परिवार की प्रतिष्ठा परक सीट अमेठी में भाजपा का परचम फहरा दिया।

इस सीट पर 55120 मतों से ईरानी ने राहुल को शिकस्त दी। राहुल के पराजय के साथ ही ईरानी ने इतिहास रच दिया। इसी की आहट पर राहुल ने केरल के वायनाड लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा। वे वायनाड से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनावी जंग में पहली बार कड़े मुकाबले में घिरी दिखाई पड़ी। सोनिया गांधी का रायबरेली से यह पांचवां चुनाव था। पार्टी ने इसी को ध्यान में रखकर 05 लाख पार का नारा दिया था। मगर शुरूआती दौर में ही सोनिया लड़खड़ाने लगी। वे इस घोषित आकड़े से पहले ही रूक गई। गाजीपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय संचार एवं रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का चुनाव हारना आश्चर्यजनक रहा। सिन्हा ने पूरे प्रदेश में विकास पुरुष के तौर अपनी पहचान बनाई। पूरे 05 वर्ष वे लगातार जनता के सम्पर्क में रहे। पिछड़े जनपद के तौर पर पहचान बना चुके गाजीपुर को देश के विकासशील क्षेत्रों में शामिल कराया। पूरे संसदीय क्षेत्र का संर्वागीण विकास कराया।

गाजीपुर ही नहीं आस-पास के जनपदों में भी रेलवे की सेवाओं का विस्तार किया। लोकप्रिय, मृदुभाषी, आईआईटी, (बीएचयू) के परास्रातक सिन्हा ने जातिगत समीकरण को नकारकर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का संकल्प लिया। लेकिन उन्हें गठबंधन प्रत्याशी अल्प शिक्षित अफजाल अंसारी ने पराजित किया। अफजाल अंसारी कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी के भाई है। प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद महेंद्र नाथ पाण्डेय का कहना है कि हमारे बेहतर चुनाव प्रबंधन ने जातीय आधार पर बने गठबंधन को हराया है। सेवा, विकास और गरीब कल्याण की नई राजनीति की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने इस विजय को ऐतिहासिक बताते हुए ‘मोदी है तो मुमकिन है’ कहा।


 
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