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वित्‍तमंत्री चार जुलाई को पेश करेंगी आर्थिक सर्वे, जानिए बजट से पहले क्‍यों किया जाता है इसे पेश

01/07/2019

प्रजेश शंकर
नई दिल्‍ली, 01 जुलाई (हि.स.)। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पांच जुलाई को पेश  होगा। सदन में इससे एक दिन पहले प्रत्‍येक वर्ष आर्थिक सर्वे पेश किया जाता है। इस बार लोकसभा में आर्थिक सर्वे चार जुलाई को वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी।

आर्थिक सर्वे में देश के विकास का सालाना लेखा-जोखा
दरअसल आर्थिक सर्वे में देश के विकास का सालाना लेखा-जोखा होता है। इसमें पिछले एक साल में अर्थव्‍यवस्‍था और सरकार की योजनाओं से देश में क्‍या प्रगति हुई इसकी जानकारी मिलती है। ये दस्‍तावेज वित्‍त मंत्रालय के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार तैयार करते है। य‍ह वित्‍त मंत्रालय का बहुत ही महत्‍वपूर्ण दस्‍तावेज होता है। खासकर इसमें सरकार की नीतियों के बारे में जानकारी होती है।

2015 के बाद आर्थिक सर्वे को दो हिस्‍सों में बांटा गया
आर्थिक सर्वे का दस्‍तावेज सरकार के विकास कार्यक्रमों की प्रगति का सारांश होता है। इसमें सरकार की नीतिगत फैसलों का प्रमुख अंश होता है। यह दस्‍तावेज अल्‍पकालिक से मध्‍यम अवधि में देश की अर्थव्‍यवस्‍था की संभावनाओं का विश्‍लेषण करता है। साल 2015 के बाद आर्थिक सर्वे को दो हिस्‍सों में बांट दिया गया, जिसमें से एक भाग में अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिति के बारे में बताया जाता है। इसे आम बजट से पहले जारी किया जाता है।

फरवरी 2017 में आर्थिक सर्वे दो भाग में विभाजित
आर्थिक सर्वे के दूसरे भाग में प्रमुख आंकड़े और डाटा होते हैं। इसको जुलाई या अगस्‍त में पेश किया जाता है। यह व्‍यवस्‍था तब से लागू है जब फरवरी 2017 में आम बजट को अंतिम सप्‍ताह के बदले पहले हफ्ते यानी एक फरवरी को पेश किया जाने लगा। इससे एक दिन पहले आर्थिक सर्वे को पेश किया जाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण एक उपयोगी नीतिगत दस्‍तावेज
आर्थिक सर्वे एक उपयोगी नीति दस्तावेज के तौर पर कार्य करता है। इसमें नीतिगत विचार, आर्थिक मापदंडों पर प्रमुख आंकड़े, व्यापक आर्थिक रिसर्च और क्षेत्रवार आर्थिक रूझानों का विश्लेषण भी शामिल होता है। आमतौर पर सर्वे बजट के लिए नीति दिशानिर्देश के रूप में कार्य करता है। हालांकि इसकी सिफारिशें लागू करना सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। ज्यादातर आर्थिक सर्वे में प्रस्तुत नीति को बजट प्रस्तावों में शामिल नहीं किया गया है।

एक फरवरी को पेश हुआ था अंतरिम बजट
चुनावी साल होने की वजह से इस साल (2019 में) तत्कालीन वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था। आर्थिक सर्वे को उस वक्‍त पेश नहीं किया गया था। दरअसल ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोकसभा चुनाव होने वाले थे। जिस साल लोकसभा चुनाव  होते हैं, उस साल अंतरिम बजट पेश किया जाता है। चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट और आर्थिक सर्वे पेश करती है। अब केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्‍व में एनडीए की नई सरकार है, जो 5 जुलाई को बजट पेश करेगी।

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